ट्विशा शर्मा मौत मामला में मध्य प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की (तस्वीर क्रेडिट@Pari__ag)

भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,निष्पक्ष जाँच और मीडिया ट्रायल पर जताई चिंता

नई दिल्ली,25 मई (युआईटीवी)- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच गया है। इस मामले ने पूरे देश में गहरी चर्चा और संवेदनशील बहस को जन्म दिया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के साथ-साथ मीडिया ट्रायल को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में सनसनी फैलाने के बजाय कानून और प्रक्रिया को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ ने की। अदालत में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे पेश हुए,जबकि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयानों को लेकर गंभीर टिप्पणियाँ कीं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखकर अदालत को काफी तकलीफ हुई है। उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष के बयानों को सनसनीखेज तरीके से प्रसारित करने से बचना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली चर्चाएँ उचित नहीं हैं और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि ट्विशा शर्मा की सास एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं और यह बेहद दुखद है कि कुछ लोग यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि न्यायपालिका निष्पक्ष सुनवाई की अनुमति नहीं दे रही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत को जाँच एजेंसियों और न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है। अदालत ने कहा कि चाहे जाँच राज्य एजेंसी करे या केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई,सच सामने लाने की पूरी कोशिश की जाएगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि ट्विशा की सास लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों पर जाकर बयान दे रही हैं और मृतका के बारे में बातें कर रही हैं। दूसरी ओर आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दावा किया कि धारा 161 के तहत दर्ज बयान अगले ही दिन अखबारों में प्रकाशित कर दिए गए थे,जिससे जाँच प्रभावित हो सकती है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है,उसकी जाँच पूरी तरह स्वतंत्र,निष्पक्ष और बिना किसी पूर्वाग्रह के होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष मीडिया के सामने जाकर अपनी-अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं,जबकि ऐसा करने के बजाय उन्हें जाँच एजेंसी के सामने अपने बयान देने चाहिए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत मीडिया को केवल अनुरोध ही कर सकती है कि वे पीड़ित परिवार या आरोपी पक्ष के बयानों को इस तरह प्रसारित न करें जिससे माहौल प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि अदालत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कोई भी पक्ष सनसनीखेज बयान देकर जाँच को प्रभावित न करे। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ही अदालत के संज्ञान में आया।

पीड़ित परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी की,जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस सबूतों को सुरक्षित रखने में नाकाम रही। लूथरा ने अदालत को बताया कि ट्विशा की सास अपनी कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर सार्वजनिक रूप से पेश कर रही हैं,जिससे जाँच प्रभावित हो सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील दोहराई। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोई भी पक्ष समय से पहले बयानबाजी न करे और जाँच को स्वतंत्र तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए। अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया है कि वह संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे,ताकि सीबीआई जल्द से जल्द इस मामले की जाँच अपने हाथ में ले सके।

गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपनी सास गिरिबाला सिंह के घर में फाँसी पर लटकी हुई मिली थीं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने शुरुआती जाँच के बाद ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामला सामने आने के बाद परिवार और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जाँच की माँग की थी।

इस मामले ने तब और ज्यादा तूल पकड़ लिया,जब सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर लगातार अलग-अलग दावे और बयान सामने आने लगे। कई लोगों ने पुलिस जाँच पर सवाल उठाए,जबकि कुछ ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जाहिर की। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान लेना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। रविवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स की विशेषज्ञ टीम ने शव का पुनः पोस्टमार्टम किया। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट से मौत के कारणों और परिस्थितियों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने वाली जाँच से मामले में पारदर्शिता बढ़ेगी और दोनों पक्षों को निष्पक्ष न्याय मिलने की संभावना मजबूत होगी। अदालत की ओर से मीडिया ट्रायल को लेकर जताई गई चिंता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि हाल के वर्षों में कई संवेदनशील मामलों में मीडिया कवरेज ने जाँच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील मामलों में मीडिया की भूमिका कितनी जिम्मेदार होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि जाँच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाना चाहिए और किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी या मीडिया ट्रायल से बचना जरूरी है।

भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत का यह मामला अब केवल एक आपराधिक जाँच तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया,मीडिया की भूमिका और जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में सीबीआई जाँच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और जाँच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हुई है।