नई दिल्ली,26 मई (युआईटीवी)- नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्वाड अब केवल विचार-विमर्श करने वाला मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक “कार्रवाई-प्रधान” समूह के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि चारों देश अब सिर्फ वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा नहीं करते, बल्कि उन समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर ठोस कदम भी उठा रहे हैं। रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि बीते एक वर्ष में क्वाड ने व्यावहारिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होने वाली है।
नई दिल्ली में मंगलवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक की शुरुआत में रुबियो ने भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की शानदार मेजबानी की है। उन्होंने कहा कि यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है,जब दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे में समान सोच वाले देशों के बीच सहयोग पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
रुबियो ने कहा कि जब उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में पदभार सँभाला था,तब उनकी पहली आधिकारिक बहुपक्षीय बैठक क्वाड के साथ ही हुई थी। उनके अनुसार यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अमेरिका इस समूह को कितनी गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि क्वाड अमेरिका की विदेश नीति का अहम हिस्सा बन चुका है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान क्वाड देशों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि यह मंच केवल बयानबाजी तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि चारों देशों का साझा लक्ष्य यह रहा है कि सहयोग को वास्तविक परियोजनाओं और ठोस पहलों में बदला जाए। रुबियो ने कहा कि अब क्वाड देशों के नागरिकों को भी यह महसूस होने लगा है कि यह समूह केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि आज जिन मुद्दों पर क्वाड देश साथ मिलकर काम कर रहे हैं,वे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण बन चुके हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और ऊर्जा सुरक्षा,समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता,जरूरी खनिजों की उपलब्धता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे में क्वाड देशों के बीच सहयोग वैश्विक स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकता है।
रुबियो ने कहा कि क्वाड की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें शामिल चारों देश अपनी-अपनी अलग विशेषज्ञता और क्षमताएँ लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि भारत तकनीक और मानव संसाधन के क्षेत्र में मजबूत है,जापान बुनियादी ढाँचे और उन्नत प्रौद्योगिकी में अग्रणी है, ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि अमेरिका वैश्विक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में मजबूत स्थिति रखता है। इन सभी क्षमताओं को एक साथ जोड़कर दुनिया की बड़ी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।
बैठक के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत के मुद्दे पर भी विशेष चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के समय क्वाड देशों का सहयोग कई देशों के लिए मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चक्रवात,भूकंप और समुद्री आपदाएँ लगातार बढ़ रही हैं,इसलिए इस क्षेत्र में राहत और बचाव के लिए मजबूत साझेदारी बेहद जरूरी है।
समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी बैठक के केंद्र में रहा। रुबियो ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्री व्यापार पर निर्भर करती है और ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्वाड देश इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग खुले और सुरक्षित रहें तथा किसी भी देश द्वारा दबाव या अवरोध पैदा करने की कोशिशों का मुकाबला किया जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने कई देशों को प्रभावित किया है। रुबियो ने कहा कि क्वाड देश मिलकर ऐसी रणनीति तैयार कर रहे हैं जिससे जरूरी खनिजों और ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता सुरक्षित और विविध बनी रहे। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकों,विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों,सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी खनिजों की स्थिर सप्लाई बेहद महत्वपूर्ण होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्वाड का बढ़ता प्रभाव इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। हाल के वर्षों में चीन की बढ़ती सक्रियता और समुद्री दावों को लेकर कई देशों में चिंता बढ़ी है। हालाँकि,क्वाड देश लगातार यह कहते रहे हैं कि यह समूह किसी एक देश के खिलाफ नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति,स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करना है।
नई दिल्ली में हुई यह बैठक ऐसे समय पर हुई है,जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच क्वाड देशों का सहयोग अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला कि आने वाले समय में क्वाड केवल रणनीतिक चर्चा का मंच नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक सक्रिय और प्रभावशाली समूह के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा।
