धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण मिलने पर भावुक हुईं हेमा मालिनी (तस्वीर क्रेडिट@dreamgirlhema)

राष्ट्रपति भवन में सजा सम्मान का भव्य समारोह,धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण मिलने पर भावुक हुईं हेमा मालिनी

नई दिल्ली,26 मई (युआईटीवी)- देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सोमवार शाम भारतीय कला,संस्कृति और सिनेमा जगत की कई महान हस्तियों के सम्मान का गवाह बना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस समारोह का सबसे भावुक पल वह रहा जब हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उनकी पत्नी,अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमा मालिनी ने ग्रहण किया। इस दौरान उनकी बेटी अहाना देओल भी मौजूद रहीं और दोनों माँ-बेटी की आँखों में भावनाएँ साफ दिखाई दीं।

राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में आयोजित इस समारोह में देशभर से कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद थीं। जैसे ही धर्मेंद्र के नाम की घोषणा हुई,पूरे सभागार में तालियों की गूँज सुनाई दी। हेमा मालिनी जब मंच की ओर बढ़ीं तो माहौल बेहद भावुक हो गया। उनके चेहरे पर एक तरफ पति की उपलब्धियों पर गर्व दिखाई दे रहा था,वहीं दूसरी ओर उन्हें खो देने का दर्द भी साफ झलक रहा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मान ग्रहण करते समय हेमा मालिनी खुद को सँभालती नजर आईं। उनकी बेटी अहाना देओल भी इस दौरान भावुक दिखाई दीं।

धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं,जिन्होंने दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। रोमांटिक किरदारों से लेकर एक्शन फिल्मों तक,उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें हिंदी फिल्म उद्योग का “ही-मैन” भी कहा जाता था। उनकी लोकप्रियता सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रही,बल्कि वे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के प्रतीक भी माने जाते थे।

धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर 2025 को हुआ था। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे अभिनेता को सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया,लेकिन आखिरकार 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। फिल्म उद्योग से लेकर राजनीति और खेल जगत तक,हर क्षेत्र की हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

पद्म विभूषण भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है,जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट योगदान दिया हो। धर्मेंद्र को यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान और दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए प्रदान किया गया। उनकी फिल्मों ने भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ा। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘सत्यकाम’, ‘फूल और पत्थर’ तथा ‘धरम वीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है।

समारोह में बंगाली सिनेमा के मशहूर अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी को भी पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया। भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक योगदान देने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद प्रोसेनजीत चटर्जी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद गर्व और भावनाओं से भरा क्षण है।

उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के रूप में उनका फिल्मी सफर 40 वर्षों से भी अधिक लंबा रहा है और इस दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं,बल्कि उन सभी लोगों का है,जिन्होंने उनके पूरे करियर में उनका साथ दिया। प्रोसेनजीत ने कहा कि वह इस सम्मान को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते और यह उनके जीवन के सबसे खास पलों में से एक है।

प्रोसेनजीत चटर्जी को बंगाली सिनेमा का सुपरस्टार माना जाता है। उन्होंने कई दशकों तक क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी और अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्मों ने न केवल व्यावसायिक सफलता हासिल की,बल्कि आलोचकों से भी सराहना प्राप्त की। उन्हें बंगाली फिल्म उद्योग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले कलाकारों में गिना जाता है।

इसके अलावा समारोह में भारतीय विज्ञापन जगत के प्रमुख नाम पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। भारतीय विज्ञापन उद्योग में उनके योगदान को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में भारतीय भावनाओं और संस्कृति को जिस तरह प्रस्तुत किया,उसने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें कला और संचार के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया।

पीयूष पांडेय को भारतीय विज्ञापन जगत का एक क्रांतिकारी चेहरा माना जाता था। उन्होंने कई ऐसे विज्ञापन तैयार किए जो लोगों की यादों का हिस्सा बन गए। ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जैसे लोकप्रिय अभियान ने देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता को खूबसूरती से प्रस्तुत किया था। इसके अलावा उन्होंने सौ से अधिक विज्ञापन अभियानों को नया आयाम दिया और भारतीय विज्ञापन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा,बल्कि यह भारतीय कला,संस्कृति और सिनेमा की समृद्ध परंपरा का उत्सव भी बन गया। समारोह के दौरान कई ऐसे पल आए,जब पूरा सभागार तालियों से गूँज उठा। देश की महान हस्तियों को सम्मानित होते देख वहाँ मौजूद लोगों में गर्व की भावना दिखाई दी।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारत अपने कलाकारों,रचनाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मान देना अच्छी तरह जानता है। धर्मेंद्र, प्रोसेनजीत चटर्जी और पीयूष पांडेय जैसे नाम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। राष्ट्रपति भवन में सोमवार को सजा यह सम्मान समारोह भारतीय कला जगत के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।