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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई,दो और आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली,27 मई (युआईटीवी)- नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई ने अपनी जाँच तेज करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन नई गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े इस पेपर लीक मामले ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई का कहना है कि जाँच लगातार आगे बढ़ रही है और प्रश्नपत्र लीक के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ की जा रही है।

सीबीआई के अनुसार,गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लातूर निवासी डॉक्टर मनोज शिरुरे शामिल हैं। जाँच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने इस साजिश में अहम भूमिका निभाई और आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक के बेटे समेत तीन छात्रों को रसायन विज्ञान का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने में मदद की। एजेंसी का कहना है कि डॉक्टर मनोज शिरुरे ने पहले से गिरफ्तार आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से संपर्क स्थापित कर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुँचाने का काम किया।

इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी की पहचान तेजस हर्षदकुमार शाह के रूप में हुई है,जो पुणे स्थित डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल अकादमी में भौतिकी के फैकल्टी सदस्य हैं। सीबीआई के मुताबिक,उन्हें नीट-यूजी 2026 का लीक हुआ भौतिक विज्ञान का प्रश्नपत्र पहले से गिरफ्तार आरोपी मनीषा हवलदार से मिला था। जाँच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किन-किन लोगों तक पहुँचाया गया और इसके बदले कितनी रकम ली गई।

सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कुछ लोगों तक सीमित मामला नहीं है,बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। एजेंसी को शक है कि परीक्षा से पहले अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्र चुनिंदा छात्रों और कोचिंग संस्थानों तक पहुँचाए गए। जाँच के दौरान यह भी सामने आया है कि रसायन विज्ञान,जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले प्रसारित किए गए थे।

जाँच एजेंसी अब इस पूरे रैकेट के मुख्य स्रोत और मास्टरमाइंड तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। सीबीआई के अनुसार,अब तक देशभर में 49 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा चुका है। दिल्ली,जयपुर,गुरुग्राम,नासिक,पुणे,लातूर और अहिल्यानगर सहित कई शहरों में एक साथ छापेमारी की गई। इन कार्रवाइयों के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज,लैपटॉप,मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जाँच कर रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र किस माध्यम से लीक किए गए और किन लोगों के बीच साझा किए गए।

सीबीआई ने यह मामला 12 मई को दर्ज किया था। यह कार्रवाई शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो गया था और इसे कुछ छात्रों तक पहुँचाया गया। मामला सामने आने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया था,क्योंकि नीट-यूजी परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी हुई है।

मामला दर्ज होने के तुरंत बाद सीबीआई ने विशेष जाँच दलों का गठन किया और अलग-अलग राज्यों में छापेमारी शुरू की। एजेंसी ने कई संदिग्धों से पूछताछ की और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड भी खंगाले। जाँच के दौरान कई ऐसे सबूत मिले जिनसे संकेत मिला कि प्रश्नपत्र लीक करने और बेचने का एक संगठित तंत्र सक्रिय था।

सूत्रों के अनुसार,जाँच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ शिक्षा संस्थानों,कोचिंग सेंटरों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भी भूमिका हो सकती है। हालाँकि,सीबीआई ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक रूप से किसी बड़े नाम का खुलासा नहीं किया है। एजेंसी का कहना है कि वह सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से जाँच कर रही है।

नीट-यूजी परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने की खबर ने छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। कई छात्र संगठनों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा प्रणाली में और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए तथा संवेदनशील सूचनाओं तक पहुँच सीमित की जानी चाहिए।

इस बीच सीबीआई ने साफ किया है कि जाँच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य राज्यों या किसी बड़े परीक्षा माफिया से भी है। अधिकारियों का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा,उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल देशभर के छात्रों और अभिभावकों की नजर सीबीआई की जाँच पर टिकी हुई है। यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा,बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था में भरोसे और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क का कितना बड़ा खुलासा कर पाती है और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।