काहिरा,20 जुलाई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव एक बार फिर नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन की दिशा में नए हमले किए हैं,जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है,बल्कि खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि एक ओर सैन्य गतिविधियाँ तेज हो रही हैं,वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी तेज किए जा रहे हैं,ताकि संघर्ष को और व्यापक होने से रोका जा सके।
जॉर्डन के सरकारी प्रसारक जॉर्डन रेडियो एंड टेलीविजन कॉर्पोरेशन ने सोशल मीडिया मंच “एक्स” पर जानकारी देते हुए बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया। हालाँकि,चौथी मिसाइल दक्षिणी जॉर्डन के एक दूरस्थ क्षेत्र में जाकर गिरी। अधिकारियों के अनुसार इस घटना में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई और न ही किसी प्रकार की संपत्ति को नुकसान पहुँचा। इसके बावजूद इस घटना ने पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन मिसाइलों का संभावित लक्ष्य दक्षिणी जॉर्डन का तटीय शहर अकाबा था। बताया गया कि वहाँ अमेरिकी सैन्य विमान तैनात थे। अकाबा का भौगोलिक महत्व भी काफी अधिक है क्योंकि यह सीधे इजरायल के शहर इलियट के निकट स्थित है। इस कारण इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि को पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
घटना के बाद इजरायली मीडिया ने भी सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। रिपोर्टों के अनुसार मिसाइल प्रक्षेपण की सूचना मिलने के बाद अमेरिकी सेना ने इलियट से लगभग 18 किलोमीटर उत्तर में स्थित दक्षिणी इजरायल के रेमन हवाई अड्डे से अपने ईंधन भरने वाले सैन्य विमान को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया। इसके साथ ही इजरायल के सरकारी प्रसारक ने बताया कि सुरक्षा कारणों से हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन में भी कुछ समय के लिए देरी हुई।
इस बीच अम्मान स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी एक सुरक्षा परामर्श जारी किया। इसमें कहा गया कि अकाबा के हवाई अड्डे और समुद्री बंदरगाह को संभावित खतरे के कारण खाली करा दिया गया है और अमेरिकी नागरिकों से अगली सूचना तक इन क्षेत्रों से दूर रहने का आग्रह किया गया। हालाँकि,बाद में जॉर्डन सरकार ने इस दावे का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि हवाई अड्डा और बंदरगाह सामान्य रूप से कार्य कर रहे थे तथा उन्हें खाली नहीं कराया गया था। सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की।
इसी दिन कुवैत में भी सुरक्षा स्थिति अचानक गंभीर हो गई। कुवैत की सशस्त्र सेनाओं ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। सेना के अनुसार सुबह से ही हवाई गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी और जैसे ही संभावित खतरे का पता चला,तुरंत कार्रवाई की गई। हालाँकि,सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितनी मिसाइलें और ड्रोन हमले में शामिल थे।
कुवैती सेना ने आरोप लगाया कि हमलों का निशाना केवल सैन्य प्रतिष्ठान ही नहीं थे, बल्कि महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को भी बनाया गया। सेना के अनुसार बिजली उत्पादन और समुद्री जल को पेयजल में बदलने वाले एक महत्वपूर्ण संयंत्र पर हमला हुआ,जिससे वहाँ आग लग गई और काफी नुकसान हुआ। यह संयंत्र देश की ऊर्जा और जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। घटना के बाद संबंधित विभागों ने आग पर नियंत्रण पाने और सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के प्रयास शुरू कर दिए।
कुवैत की सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नागरिक सुविधाओं और आवश्यक आधारभूत ढाँचे पर हमले अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। सेना ने आरोप लगाया कि ईरान लगातार ऐसे प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा है,जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों से है। हालाँकि,ईरान की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
उधर बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाएँ भी लगातार निगरानी अभियान चला रही हैं।
बढ़ते तनाव के बीच अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा हालात को नियंत्रित नहीं किया गया,तो पूरा क्षेत्र व्यापक संघर्ष की चपेट में आ सकता है। उन्होंने कहा कि हिंसा का नया दौर किसी भी पक्ष के हित में नहीं होगा और इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ेगा।
नबील फहमी ने अमेरिका और ईरान दोनों से तत्काल तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लगातार सैन्य कार्रवाई से केवल अस्थिरता बढ़ेगी और क्षेत्र के सभी देशों को आर्थिक,सामाजिक और मानवीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। उनके अनुसार यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते तो हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं और इसके परिणाम पूरे विश्व को प्रभावित कर सकते हैं।
जॉर्डन के उपप्रधानमंत्री तथा विदेश और प्रवासी मामलों के मंत्री अयमान सफादी ने भी क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। उन्होंने तुर्किए और कुवैत के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के उपायों पर विचार करना था।
तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान के साथ बातचीत के दौरान अयमान सफादी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी युद्धविराम पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि उन मूल कारणों को भी दूर करना होगा जिनके कारण यह संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने दोनों पक्षों से पुनः संवाद की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की,ताकि स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति हो सके।
कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा के साथ हुई बातचीत में अयमान सफादी ने कुवैत और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद देशों के प्रति जॉर्डन की एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है,बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता का प्रश्न बन चुका है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान केवल बातचीत,कूटनीति और आपसी सहयोग के माध्यम से ही संभव है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर संकटों में से एक हैं। अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार किए जा रहे हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा विभिन्न क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी हितों तथा सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अमेरिका अब तक ईरान के विभिन्न ठिकानों पर आठ बड़े हमले कर चुका है। इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई ने यह आशंका बढ़ा दी है कि यदि जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला,तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।
इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी क्षेत्र विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक इलाकों में शामिल है और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है,जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों में तेज उछाल आने की संभावना है। इसका प्रभाव भारत जैसे उन देशों पर भी पड़ सकता है,जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सबसे बड़ी आवश्यकता संयम और कूटनीति की है। लगातार सैन्य कार्रवाई से न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा कमजोर हो रही है,बल्कि मानवीय संकट का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। नागरिक आबादी,ऊर्जा ढाँचा,परिवहन व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सभी इस संघर्ष की चपेट में आने लगे हैं।
फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। जॉर्डन,कुवैत और बहरीन पर हुए ताजा हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेने की क्षमता रखता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की सैन्य रणनीति,क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा तैयारियाँ और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की कूटनीतिक पहल ही यह तय करेगी कि हालात शांत होते हैं या यह संकट और अधिक गहरा जाता है।
