जीएसटी

मई में जीएसटी संग्रह करीब 2 लाख करोड़ रुपये के पार,वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती

नई दिल्ली,2 जून (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव,वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती के संकेत दिए हैं। सोमवार को जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार,मई 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। देश का सकल जीएसटी संग्रह लगभग दो लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँच गया, जो आर्थिक गतिविधियों में निरंतर वृद्धि और कर अनुपालन में सुधार का संकेत माना जा रहा है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक मई 2026 में कुल सकल जीएसटी राजस्व 1,94,184 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 1,88,172 करोड़ रुपये था। इस प्रकार वर्ष-दर-वर्ष आधार पर जीएसटी संग्रह में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं शुद्ध जीएसटी राजस्व भी बढ़कर 1,66,904 करोड़ रुपये पहुँच गया,जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.3 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका असर देखा जा रहा है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में माँग मजबूत बनी हुई है,जिसका सकारात्मक प्रभाव कर संग्रह पर पड़ा है।

मई महीने के दौरान करदाताओं को दिए गए कुल रिफंड की राशि भी बढ़ी है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार कुल रिफंड 27,281 करोड़ रुपये रहा,जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.6 प्रतिशत अधिक है। रिफंड समायोजित करने के बाद मई 2026 में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि वास्तविक आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि का स्तर शीर्ष आँकड़ों से कहीं अधिक मजबूत है।

हालाँकि,घरेलू स्तर पर एक मिश्रित तस्वीर भी सामने आई है। मई में सकल घरेलू जीएसटी राजस्व 1,34,530 करोड़ रुपये रहा,जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.6 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयात आधारित जीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आयात गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं तथा देश में औद्योगिक और उपभोक्ता माँग बनी हुई है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार पिछले वर्ष मई महीने में एक बड़ी दूरसंचार कंपनी द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान किया गया था। यदि इस असाधारण भुगतान के प्रभाव को हटाकर आँकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो मई 2026 में शुद्ध जीएसटी संग्रह की वृद्धि दर लगभग 10 प्रतिशत बैठती है। इससे स्पष्ट होता है कि कर संग्रह की वास्तविक स्थिति आँकड़ों में दिखाई देने वाली वृद्धि से कहीं अधिक सकारात्मक है।

वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों के आँकड़े भी उत्साहजनक रहे हैं। अप्रैल और मई को मिलाकर कुल सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आँकड़ा 4.11 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार दो महीनों के दौरान 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में शुद्ध जीएसटी संग्रह 5.5 प्रतिशत बढ़कर 3.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।

अप्रैल महीने में भी जीएसटी संग्रह ने नया रिकॉर्ड बनाया था। अप्रैल 2026 में कुल जीएसटी संग्रह 2,42,702 करोड़ रुपये रहा था,जो अब तक का सबसे ऊँचा मासिक संग्रह माना गया। रिफंड समायोजित करने के बाद अप्रैल का शुद्ध जीएसटी राजस्व 2,10,909 करोड़ रुपये रहा था। इसने सरकार को वित्त वर्ष की शुरुआत में ही मजबूत राजस्व आधार प्रदान किया।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि जीएसटी संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि का प्रमुख कारण देश के भीतर मजबूत खपत और उत्पादन गतिविधियाँ हैं। अप्रैल 2026 के दौरान वस्तुओं से संबंधित कर योग्य आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि 27 प्रमुख वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है,बल्कि व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है।

उद्योग जगत के लिए यह विशेष रूप से उत्साहजनक संकेत है क्योंकि वस्तुओं की माँग में वृद्धि आमतौर पर विनिर्माण,परिवहन,लॉजिस्टिक्स और खुदरा व्यापार जैसे क्षेत्रों में गतिविधियों को बढ़ावा देती है। मजबूत माँग यह भी दर्शाती है कि उपभोक्ताओं का विश्वास बरकरार है और वे खर्च करने के लिए तैयार हैं।

सेवा क्षेत्र ने भी कर संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकारी आँकड़ा के अनुसार कर योग्य सेवा आपूर्ति में 22.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सभी प्रमुख सेवा श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली,जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेवा अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी,वित्तीय सेवाएँ,परिवहन,पर्यटन और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई राज्यों ने जीएसटी संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों में राज्य जीएसटी संग्रह 11 प्रतिशत बढ़ा। उत्तर प्रदेश में 9 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। केरल ने 19 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि हासिल की,जबकि गुजरात में 3 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।

अंतरराज्यीय कर समायोजन यानी आईजीएसटी सेटलमेंट के बाद कई राज्यों की स्थिति और मजबूत दिखाई दी। कर्नाटक में समायोजन के बाद राज्य जीएसटी राजस्व 17 प्रतिशत बढ़ गया। गुजरात और आंध्र प्रदेश में 16-16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। केरल में 15 प्रतिशत और तेलंगाना में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हरियाणा ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राज्यों में कर संग्रह की यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय विकास का संकेत है। यह दर्शाता है कि केवल बड़े महानगर ही नहीं,बल्कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में भी व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ रही हैं।

सरकार का मानना है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में मिले ये सकारात्मक संकेत पूरे वर्ष के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे। जीएसटी संग्रह में निरंतर वृद्धि से केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को विकास परियोजनाओं,सामाजिक योजनाओं और बुनियादी ढाँचा निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बीच मई 2026 के जीएसटी आँकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू माँग,बेहतर कर अनुपालन और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के बल पर आगे बढ़ रही है। आयात आधारित संग्रह में वृद्धि, सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और राज्यों की बेहतर कर प्राप्तियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि देश की आर्थिक गतिविधियाँ व्यापक स्तर पर विस्तार कर रही हैं। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत दोनों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में भी कर संग्रह का यह सकारात्मक रुझान जारी रहेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विकास की अपनी गति बनाए रखेगी।