आईसीसी ने सभी टेस्ट में 'पिंक बॉल' के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दी (तस्वीर क्रेडिट@TalhaDigital007)

टेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव,खराब रोशनी से निपटने के लिए गुलाबी गेंद के ट्रायल को मिली मंजूरी

अहमदाबाद,2 जून (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने टेस्ट क्रिकेट को अधिक आधुनिक,व्यावहारिक और दर्शकों के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी टेस्ट मैचों में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य खराब रोशनी के कारण खेल में आने वाली रुकावटों को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि मौसम या प्रकाश संबंधी चुनौतियों के बावजूद मुकाबले अधिक समय तक जारी रह सकें।

हाल ही में आयोजित परिषद की बोर्ड बैठक में क्रिकेट के भविष्य से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा की गई और उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें सबसे अधिक चर्चा का विषय टेस्ट क्रिकेट में गुलाबी गेंद के प्रयोग को लेकर लिया गया फैसला रहा। परिषद का मानना है कि पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में गुलाबी गेंद कृत्रिम रोशनी में अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसे में यदि किसी मैच के दौरान प्राकृतिक रोशनी कमजोर पड़ जाती है या मौसम अचानक खराब हो जाता है,तो खेल को रोकने की आवश्यकता कम होगी और मुकाबला जारी रखा जा सकेगा।

हालाँकि,इस ट्रायल को लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। किसी भी टेस्ट मैच में गुलाबी गेंद का उपयोग तभी किया जाएगा,जब दोनों टीमों की पूर्व सहमति प्राप्त होगी। परिषद का मानना है कि इस प्रयोग से प्राप्त अनुभव भविष्य में टेस्ट क्रिकेट के नियमों और संचालन को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।

क्रिकेट जगत में लंबे समय से खराब रोशनी के कारण खेल रुकने की समस्या चर्चा का विषय रही है। कई बार रोमांचक मुकाबले उस समय प्रभावित हुए हैं,जब बल्लेबाज और अंपायर दृश्यता को लेकर संतुष्ट नहीं होते। इससे दर्शकों की निराशा बढ़ती है और मैच के परिणाम पर भी असर पड़ सकता है। इसी समस्या के समाधान के लिए परिषद ने व्यापक स्तर पर शोध और तकनीकी विकास कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।

इस परियोजना के तहत मैच अधिकारियों और स्टेडियमों में उपयोग होने वाली प्रकाश व्यवस्था की आधुनिक तकनीकों का अध्ययन किया जाएगा। उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन तकनीकी सुधारों के जरिए खेल को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाया जा सकता है। इस अनुसंधान और विकास कार्यक्रम के लिए परिषद और मेरिलबोन क्रिकेट क्लब संयुक्त रूप से आर्थिक सहयोग प्रदान करेंगे। दोनों संस्थाओं का मानना है कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से क्रिकेट को नई दिशा दी जा सकती है।

बोर्ड बैठक में केवल रोशनी और गेंद से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं,बल्कि खेल संचालन और अंपायरिंग से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। परिषद ने मैच अधिकारियों को अवैध गेंदबाजी एक्शन की जाँच के दौरान हॉक-आई तकनीक से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की पहचान अधिक वैज्ञानिक और सटीक तरीके से की जा सकेगी।

क्रिकेट में तकनीक का बढ़ता उपयोग पहले ही निर्णयों की गुणवत्ता को बेहतर बना चुका है। अब गेंदबाजी एक्शन के मामलों में भी तकनीकी आँकड़ों की मदद मिलने से खिलाड़ियों और टीमों को अधिक पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विवादों में कमी आएगी और निर्णयों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

बैठक में खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब हेड कोच या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को निर्धारित ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान खिलाड़ियों से बातचीत करने और रणनीतिक सलाह देने की अनुमति होगी। पहले इस प्रकार की बातचीत पर सीमित प्रतिबंध थे,लेकिन आधुनिक क्रिकेट की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए परिषद ने यह बदलाव किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय खिलाड़ियों को मैच के दौरान बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे प्रारूप में रणनीतिक बदलावों की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। ऐसे में कोच की सक्रिय भूमिका टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को लेकर भी परिषद ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब सभी टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 15 मिनट का मध्यांतर अनिवार्य होगा। इस निर्णय का उद्देश्य मैच संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना और खिलाड़ियों को पर्याप्त तैयारी का समय देना है। इसके साथ ही बल्लेबाजों के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि खेल दोबारा शुरू होने के तुरंत बाद वे खेलने के लिए तैयार रहें। इससे समय की बर्बादी कम होगी और मैच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकेंगे।

परिषद ने लेग साइड वाइड से संबंधित नियमों के ट्रायल को भी स्थायी रूप से लागू करने की मंजूरी दे दी है। पिछले कुछ समय से इस नियम का परीक्षण विभिन्न प्रतियोगिताओं में किया जा रहा था। परीक्षण के सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे स्थायी रूप से नियमों का हिस्सा बना दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे अंपायरों को निर्णय लेने में अधिक स्पष्टता मिलेगी और बल्लेबाजों तथा गेंदबाजों के बीच संतुलन भी बेहतर बना रहेगा।

इसके अलावा मेरिलबोन क्रिकेट क्लब द्वारा क्रिकेट के नियमों में किए गए अन्य संशोधनों को भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। ये सभी बदलाव एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। परिषद का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य खेल को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालना और विभिन्न परिस्थितियों में नियमों को अधिक स्पष्ट बनाना है।

बोर्ड बैठक में आधिकारिक क्रिकेट के वर्गीकरण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलावों को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत यह स्पष्ट किया गया कि क्रिकेट विश्व कप चैलेंज लीग में भाग लेने वाली टीमें टूर्नामेंट चक्र के दौरान सूची-ए श्रेणी के अन्य सीमित ओवरों के मुकाबले भी खेल सकेंगी। इस फैसले से उभरती हुई क्रिकेट टीमों को अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने के अवसर मिलेंगे और उनके विकास को गति मिलेगी।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि परिषद द्वारा लिए गए ये फैसले खेल को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट में गुलाबी गेंद के ट्रायल को भविष्य के लिए एक प्रयोगात्मक लेकिन संभावनाओं से भरा निर्णय माना जा रहा है। यदि यह सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में टेस्ट क्रिकेट के संचालन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कुल मिलाकर परिषद के इन फैसलों से यह संकेत मिलता है कि क्रिकेट प्रशासन खेल को अधिक तकनीकी,पारदर्शी और दर्शक-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। खराब रोशनी से निपटने के लिए गुलाबी गेंद का ट्रायल,आधुनिक तकनीक का बढ़ता उपयोग,कोचिंग नियमों में बदलाव और टी20 प्रारूप में नई व्यवस्थाएं आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की तस्वीर बदल सकती हैं।