सुप्रीम कोर्ट को मिले पाँच नए न्यायाधीश (तस्वीर क्रेडिट@aapka_vineet)

सुप्रीम कोर्ट को मिले पाँच नए न्यायाधीश,शपथ ग्रहण के साथ न्यायपालिका की क्षमता हुई और मजबूत

नई दिल्ली,2 जून (युआईटीवी)- भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार का दिन न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया,जब देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पाँच नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है,जिससे देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यक्षमता और न्यायिक क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। शपथ लेने वाले न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू,न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर,न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा,न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं।

इन नियुक्तियों को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर मंजूरी दी थी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर इन सभी को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। शपथ ग्रहण समारोह सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित किया गया,जहाँ न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्य,न्यायाधीश,अधिवक्ता और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह नियुक्तियाँ ऐसे समय में हुई हैं,जब देश की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए न्यायाधीशों की पर्याप्त उपलब्धता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने सोमवार को इन नियुक्तियों को औपचारिक मंजूरी प्रदान की थी। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद पाँचों नामों को मंजूरी प्रदान की है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति शील नागू,न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा,न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी अपनी सिफारिशों को सार्वजनिक करते हुए बताया था कि 22 मई और 27 मई को आयोजित बैठकों में इन नामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था। कॉलेजियम ने उनके अनुभव,न्यायिक कार्य,वरिष्ठता,योग्यता और विभिन्न न्यायालयों में दिए गए योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की अनुशंसा की थी।

न्यायमूर्ति शील नागू का न्यायिक करियर लंबे अनुभव और उल्लेखनीय योगदान से भरा रहा है। उन्हें मई 2011 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और न्यायिक क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई। जुलाई 2024 में उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार सँभाला। अब सर्वोच्च न्यायालय में उनकी नियुक्ति उनके लंबे न्यायिक अनुभव की मान्यता के रूप में देखी जा रही है।

इसी प्रकार न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर ने भी न्यायपालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें जनवरी 2013 में झारखंड उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय दिए और न्यायिक प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। जनवरी 2025 में उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अब सर्वोच्च न्यायालय में उनकी पदोन्नति न्यायिक क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा और अनुभव को दर्शाती है।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा का नाम भी देश के प्रमुख न्यायविदों में शामिल किया जाता है। उन्हें अप्रैल 2013 में दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। मार्च 2015 में वे स्थायी न्यायाधीश बने और उसके बाद कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। जुलाई 2025 में उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। उनके न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए कॉलेजियम ने उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के लिए उपयुक्त माना।

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली ने भी अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। दिसंबर 2013 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संवैधानिक,प्रशासनिक और दीवानी मामलों में महत्वपूर्ण फैसले दिए। अप्रैल 2025 में उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अब सर्वोच्च न्यायालय में उनकी नियुक्ति न्यायिक क्षेत्र में उनके योगदान की स्वाभाविक प्रगति मानी जा रही है।

इन चार न्यायाधीशों के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति भी विशेष महत्व रखती है। वह लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही हैं और संवैधानिक,दीवानी तथा सेवा कानून से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मामलों में अपनी विशेषज्ञता का परिचय दे चुकी हैं। एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उन्होंने न्यायिक विमर्श को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत है कि सर्वोच्च न्यायालय में केवल न्यायिक सेवा से आने वाले ही नहीं,बल्कि उत्कृष्ट विधिक विशेषज्ञता रखने वाले अधिवक्ताओं को भी अवसर दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को न्यायिक प्रणाली के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय न केवल संवैधानिक मामलों का अंतिम निर्णायक मंच है,बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा का भी प्रमुख संस्थान है। ऐसे में अनुभवी और योग्य न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को और मजबूत बनाती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के निस्तारण की गति बढ़ाने में सहायता मिलेगी। देश की सर्वोच्च अदालत में प्रतिवर्ष हजारों नए मामले दाखिल होते हैं और न्यायिक बोझ लगातार बढ़ता रहता है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और तेज गति से हो सकेगी।

यह नियुक्तियाँ भारतीय न्यायपालिका में अनुभव, विविधता और विशेषज्ञता के समावेश का भी उदाहरण हैं। विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में वी. मोहना की मौजूदगी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक दृष्टिकोण को और व्यापक बनाएगी। न्यायपालिका के समक्ष बदलती सामाजिक,आर्थिक और संवैधानिक चुनौतियों के बीच यह नया न्यायिक नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।

पाँच नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक नए अध्याय की शुरुआत की है। न्यायिक समुदाय और देशवासियों को उम्मीद है कि ये सभी न्यायाधीश संविधान की मूल भावना,न्याय के सिद्धांतों और कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे तथा भारतीय न्यायपालिका की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएँगे।