डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख,कहा- बातचीत टूटने की चिंता नहीं,परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की तो ‘पूरी तरह तबाह कर दूँगा’

वाशिंगटन,2 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्हें इस बात की कोई विशेष चिंता नहीं है कि ईरान अमेरिका के साथ जारी बातचीत को समाप्त कर दे। उनका कहना है कि तेहरान ने बातचीत को जरूरत से ज्यादा लंबा खींचा है और अब उनकी प्राथमिकता केवल एक है—यह सुनिश्चित करना कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

एक टेलीफोनिक बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता समाप्त भी हो जाती है,तो इससे उनकी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। उनका मानना है कि ईरान लगातार समय लेने की रणनीति अपना रहा था और वास्तविक प्रगति के बजाय वार्ता को लंबा खींचने में अधिक रुचि दिखा रहा था। ट्रंप के इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा की है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में भी नई चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह समाप्त हो चुकी है,तो उन्होंने बेहद स्पष्ट और बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बातचीत जारी रहती है या नहीं। उनके अनुसार यदि बातचीत खत्म हो गई है,तो भी कोई समस्या नहीं है और यदि अभी जारी है तो भी यह बहुत अधिक समय ले चुकी है। ट्रंप ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया अब उन्हें उबाऊ लगने लगी थी और उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि ईरान लगातार समय बर्बाद कर रहा है।

राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर वार्ता को लंबा खींच रहा था,ताकि किसी ठोस निर्णय तक पहुँचने से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही लग रहा था कि ईरान बातचीत के जरिए अमेरिका को टालने की कोशिश कर रहा है। जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या ईरान वास्तव में समय बर्बाद कर रहा था,तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि उन्हें ऐसा ही प्रतीत होता है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ईरान को लेकर चिंताएँ तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में यह खबर सामने आई कि ईरान अब अमेरिका के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए इच्छुक नहीं है। इस खबर का सीधा असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ा और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार संभावित कूटनीतिक विफलता और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की आशंका ने निवेशकों को चिंतित कर दिया,जिसके परिणामस्वरूप तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली।

हालाँकि,ट्रंप ने बढ़ती तेल कीमतों को लेकर किसी प्रकार की चिंता व्यक्त नहीं की। उनका मानना है कि वर्तमान वृद्धि अस्थायी है और जल्द ही बाजार में स्थिरता लौट आएगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बड़ी मात्रा में तेल उपलब्ध है और बहुत जल्द यह आपूर्ति बाजार में पहुँचेगी,जिससे कीमतों पर दबाव कम होगा। ट्रंप ने दावा किया कि इस समय लगभग 1,700 जहाज तेल से भरे हुए हैं और जैसे ही यह तेल बाजार में पहुँचेगा,कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलेगी।

ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बावजूद ट्रंप ने भरोसा जताया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर तनाव जरूर है,लेकिन जहाजों की आवाजाही जारी है और व्यापारिक गतिविधियाँ पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। उनके अनुसार स्थिति उतनी गंभीर नहीं है,जितनी कुछ लोग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात के कारण ईरान को प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राष्ट्रपति के अनुसार प्रतिबंधों और समुद्री गतिविधियों पर पड़े प्रभाव के कारण ईरान को रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। उनका मानना है कि यह आर्थिक दबाव अंततः तेहरान को अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।

हालाँकि,ट्रंप के बयान का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित हिस्सा वह चेतावनी रही,जिसमें उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद कठोर भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि इस समय उनकी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न पहुँचे। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति बनने की अनुमति नहीं देगा।

राष्ट्रपति ने तेहरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता है,तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार बनाने का प्रयास किया,तो वह उसे पूरी तरह तबाह कर देंगे। ट्रंप की इस टिप्पणी को अमेरिका की पारंपरिक सुरक्षा नीति के सबसे आक्रामक बयानों में से एक माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के बयान एक ओर अमेरिकी प्रशासन के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं,वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरताओं का केंद्र रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की कूटनीतिक विफलता का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि ईंधन की कीमतों में कुछ समय के लिए वृद्धि होती है,तो लोगों को इसे व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण से देखना चाहिए। उनके अनुसार यदि दुनिया को ईरान के संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए कुछ आर्थिक कीमत चुकानी पड़ती है,तो यह स्वीकार्य है। उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे कभी-कभी आर्थिक हितों से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

राष्ट्रपति ने यूरोपीय देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मध्य पूर्व के समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा में यूरोप को अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि इस क्षेत्र के तेल और गैस संसाधनों पर यूरोपीय देशों की निर्भरता अमेरिका की तुलना में अधिक है,इसलिए उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों को नई दिशा दे सकता है। यदि वार्ता वास्तव में समाप्त हो जाती है,तो दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं यदि बातचीत किसी नए प्रारूप में फिर शुरू होती है,तो भी ट्रंप के हालिया बयान भविष्य की वार्ताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ती है। एक ओर ट्रंप स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है,वहीं दूसरी ओर तेहरान भी अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक उद्देश्यों को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले सप्ताह मध्य पूर्व की राजनीति,वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

ट्रंप के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देशों के बीच संवाद का कोई नया रास्ता निकलता है या फिर यह विवाद और अधिक टकरावपूर्ण चरण में प्रवेश करता है।