सोल,2 जून (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के रक्षा उद्योग को सोमवार को एक बड़ा झटका लगा,जब देश की प्रमुख रक्षा कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के डेजॉन स्थित संयंत्र में हुए भीषण विस्फोट और आग की घटना में पाँच कर्मचारियों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए। इस गंभीर हादसे के बाद कंपनी ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने अपने डेजॉन प्लांट में आंशिक रूप से उत्पादन रोक दिया है। वहीं दक्षिण कोरिया के श्रम अधिकारियों ने सुरक्षा कानूनों के तहत प्रभावित इकाई में कामकाज बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इस घटना ने न केवल देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को प्रभावित किया है,बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हनव्हा एयरोस्पेस ने एक नियामकीय फाइलिंग में बताया कि श्रम विभाग के निर्देशों के अनुपालन में संयंत्र के कुछ हिस्सों में उत्पादन गतिविधियाँ रोक दी गई हैं। कंपनी ने कहा कि वह अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए चल रही जाँच में आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। कंपनी का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।
यह हादसा दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से लगभग 140 किलोमीटर दक्षिण में स्थित डेजॉन शहर के निकट स्थित रक्षा उत्पादन केंद्र में हुआ। यह संयंत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता है और इसे विशेष सुरक्षा श्रेणी में रखा गया है। यहां कई उन्नत हथियार प्रणालियों और मिसाइलों का निर्माण किया जाता है,जिनका उपयोग दक्षिण कोरिया की सैन्य क्षमता को मजबूत बनाने में किया जाता है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार,विस्फोट उस समय हुआ जब कुछ कर्मचारी उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की सफाई कर रहे थे। बताया गया है कि इन उपकरणों में प्रोपेलेंट पाउडर के अवशेष मौजूद थे। प्रोपेलेंट पाउडर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होता है और इसका उपयोग रॉकेट तथा मिसाइल प्रणालियों में ईंधन के रूप में किया जाता है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर आग और विस्फोट की शुरुआत कैसे हुई तथा क्या ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और उपयोग से संबंधित सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त जाँच दल का गठन किया है। यह टीम तकनीकी,फोरेंसिक और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं की जाँच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
इस हादसे के बाद दक्षिण कोरिया की रक्षा खरीद एजेंसी,डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन ने भी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। एजेंसी ने घोषणा की है कि वह जाँच प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी और इसके लिए अपने विशेषज्ञ संस्थानों को भी शामिल करेगी। एजेंसी ने स्थिति की निगरानी और समन्वय के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है,जो जाँच एजेंसियों और रक्षा उद्योग से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन के प्रवक्ता किम जू-चुल ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि यदि जाँच के दौरान आवश्यकता महसूस हुई,तो एजेंसी अपने विशेषज्ञों और तकनीकी संसाधनों को उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान और विकास से जुड़े संस्थान तथा तकनीकी गुणवत्ता मूल्यांकन एजेंसियाँ भी जाँच प्रक्रिया में सहयोग कर सकती हैं। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
डेजॉन स्थित यह संयंत्र दक्षिण कोरिया के रक्षा उत्पादन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ ‘चुनमू’ मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली और लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली एल-सैम मिसाइल जैसी उन्नत हथियार प्रणालियों का निर्माण किया जाता है। इन हथियारों को दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि इस संयंत्र में उत्पादन रुकने की खबर ने रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।
कंपनी के वित्तीय आँकड़ों के अनुसार,जिस उत्पादन लाइन पर यह हादसा हुआ,उसने पिछले वर्ष लगभग 1.32 ट्रिलियन वॉन का राजस्व अर्जित किया था। यह कंपनी की कुल आय का लगभग पाँच प्रतिशत हिस्सा था। ऐसे में उत्पादन में आई रुकावट का आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालाँकि,कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उत्पादन पूरी तरह सामान्य होने में कितना समय लगेगा।
दक्षिण कोरिया में रक्षा उद्योग को अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। यहाँ संचालित अधिकांश उत्पादन इकाइयों में उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू होती है। इसके बावजूद इस तरह की दुर्घटना ने सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक पदार्थों के साथ काम करने वाली इकाइयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा और उन्नयन अत्यंत आवश्यक है।
हालाँकि,अधिकारियों का कहना है कि रक्षा उद्योग से जुड़ी फैक्ट्रियों में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा जाँच की जाती है। डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार,मौजूदा कानूनों के तहत हर वर्ष इन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जाता है,ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। फिर भी इस दुर्घटना ने यह संकेत दिया है कि जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और सतर्कता बनाए रखना अनिवार्य है।
विस्फोट में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के प्रति पूरे देश में संवेदना व्यक्त की जा रही है। सरकार और कंपनी दोनों ने मृतकों के परिवारों को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। वहीं घायल कर्मचारियों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले की जाँच जारी है और दक्षिण कोरिया की रक्षा तथा औद्योगिक सुरक्षा एजेंसियाँ इस दुर्घटना के प्रत्येक पहलू का गहन अध्ययन कर रही हैं। जाँच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे तकनीकी खामी,मानवीय भूल या सुरक्षा प्रबंधन में कोई कमी जिम्मेदार थी,लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने दक्षिण कोरिया के रक्षा उद्योग को झकझोर दिया है और भविष्य में सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
