ममता बनर्जी

8 जून की इंडिया ब्लॉक बैठक पर सबकी नजर,ममता बनर्जी की मौजूदगी होगी खास,अभिषेक बनर्जी भी रहेंगे मौजूद

कोलकाता,3 जून (युआईटीवी)- तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी आगामी 8 जून को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक रणनीति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि,इस बैठक से पहले एक नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है,जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उसी दिन अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) मुख्यालय में पूछताछ के लिए भी बुलाया गया है।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। एक ओर जहाँ विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है,वहीं दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी को भेजे गए नोटिस ने इस बैठक को और अधिक चर्चित बना दिया है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की भूमिका लगातार बढ़ रही है और इसी कारण उसकी गतिविधियाँ विशेष ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार,सीआईडी द्वारा अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जाँच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनकी उपस्थिति आवश्यक है। इससे पहले उन्हें 1 जून को पेश होने के लिए कहा गया था,लेकिन उन्होंने तत्काल उपस्थित होने में असमर्थता जताते हुए अतिरिक्त समय की माँग की थी।

अभिषेक बनर्जी ने अपने जवाब में कहा था कि 30 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में उन पर हुए कथित हमले के बाद उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं है। इसी कारण उन्होंने पूछताछ के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय माँगा था। हालाँकि,जाँच एजेंसी ने उनकी अपील पर विचार करने के बाद 1 जून की शाम एक नया नोटिस जारी किया और उन्हें 8 जून को उपस्थित होने का निर्देश दिया।

इस बीच,तृणमूल कांग्रेस के भीतर 8 जून की इंडिया ब्लॉक बैठक को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि यह बैठक केवल विपक्षी दलों के बीच समन्वय का मंच नहीं होगी,बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकती है। पार्टी के एक विधायक ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से ही ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक अभियान की तैयारी कर रही हैं।

विधायक के अनुसार,4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों में स्पष्ट संकेत दिया था कि भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा था कि यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जाएगा और इसमें इंडिया ब्लॉक के सभी सहयोगी दलों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली बैठक को इस रणनीति का पहला बड़ा चरण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि ममता बनर्जी की मौजूदगी इस बैठक को विशेष महत्व प्रदान करेगी। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने खुद को राष्ट्रीय विपक्ष की प्रमुख आवाजों में शामिल किया है। विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ उनका रुख लगातार मुखर रहा है और कई विपक्षी दल उन्हें एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता के रूप में देखते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू 30 मई को सोनारपुर में हुई घटना है। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि उस दिन अभिषेक बनर्जी पर हमला किया गया था,जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। पार्टी नेताओं के अनुसार,इंडिया ब्लॉक के लगभग सभी प्रमुख नेताओं ने इस घटना की निंदा की और सोशल मीडिया के माध्यम से अपना समर्थन व्यक्त किया।

समर्थन जताने वाले नेताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव,आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल थे। इन नेताओं ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया था।

अभिषेक बनर्जी ने भी विपक्षी नेताओं द्वारा व्यक्त किए गए समर्थन के लिए सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर कहा था कि कठिन समय में मिले सहयोग और समर्थन के लिए वह सभी नेताओं के प्रति कृतज्ञ हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस समर्थन ने विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और विश्वास को मजबूत किया है।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि संकट के समय विपक्षी दलों द्वारा दिखाई गई एकजुटता अब राजनीतिक सहयोग के रूप में और मजबूत हो सकती है। उनका मानना है कि 8 जून की बैठक में राष्ट्रीय स्तर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार की जाएगी और विपक्षी दलों के बीच तालमेल को नई दिशा मिलेगी।

हालाँकि,अभिषेक बनर्जी की सीआईडी पूछताछ को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं का आरोप है कि जाँच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है,जबकि दूसरी ओर सरकारी पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जाँच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है।

फिलहाल राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर 8 जून की तारीख बेहद महत्वपूर्ण बन गई है। एक ओर नई दिल्ली में विपक्षी एकता की परीक्षा होगी,वहीं दूसरी ओर कोलकाता में सीआईडी की पूछताछ पर भी सबकी नजरें टिकी रहेंगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इन दोनों घटनाक्रमों का पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है,लेकिन इतना तय है कि इस दिन होने वाली गतिविधियाँ राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहने वाली हैं।