डेनमार्क की प्रधानमंत्री बनीं मेटे फ्रेडरिक्सन,पीएम मोदी ने दी बधाई (तस्वीर क्रेडिट@yuvaswapan)

डेनमार्क की प्रधानमंत्री बनीं मेटे फ्रेडरिक्सन,पीएम मोदी ने दी बधाई; भारत-डेनमार्क साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली,4 जून (युआईटीवी)- डेनमार्क की राजनीति में एक बार फिर स्थिरता और निरंतरता का संदेश देते हुए मेटे फ्रेडरिक्सन ने लगातार तीसरी बार देश की प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया है। उनकी इस महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक तथा दीर्घकालिक संबंधों को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि भारत और डेनमार्क के बीच वर्षों से विकसित हुआ विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता और सतत विकास का साझा दृष्टिकोण आने वाले समय में दोनों देशों को और करीब लाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक मीडिया मंच पर जारी अपने संदेश में मेटे फ्रेडरिक्सन को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें अपनी मित्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत और डेनमार्क के बीच संबंध केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं,बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा विश्वास और साझा वैश्विक दृष्टिकोण भी मौजूद है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फ्रेडरिक्सन के नेतृत्व में दोनों देशों की साझेदारी नए आयाम स्थापित करेगी और इससे दोनों देशों के नागरिकों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

भारत और डेनमार्क के संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गति प्राप्त की है। विशेष रूप से हरित विकास,स्वच्छ ऊर्जा,जलवायु परिवर्तन,नवाचार,प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इन प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण आधार भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप रही है,जिसे दोनों देशों के बीच भविष्य की साझेदारी का प्रमुख स्तंभ माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इस ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल स्वच्छ ऊर्जा,हरित प्रौद्योगिकी,पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि भारत और डेनमार्क मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं,जो न केवल दोनों देशों,बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेटे फ्रेडरिक्सन के नेतृत्व में डेनमार्क ने हरित अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय नीतियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। दूसरी ओर भारत भी नवीकरणीय ऊर्जा,हरित हाइड्रोजन,सौर ऊर्जा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक स्तर पर हरित विकास के एक सफल मॉडल के रूप में उभर सकती है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेटे फ्रेडरिक्सन की मुलाकात नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हुई थी। यह मुलाकात तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहाँ दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण संकेत माना गया था।

विदेश मंत्रालय के अनुसार,दोनों नेताओं ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया था। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण,जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और हरित परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचार और आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।

ओस्लो में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क के प्रमुख पेंशन फंडों और निवेशकों को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण भी दिया था। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि,मजबूत बुनियादी ढाँचे और निवेश-अनुकूल नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत विदेशी निवेशकों के लिए व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी,जिसे गिफ्ट सिटी के नाम से जाना जाता है,में डेनमार्क की कंपनियों को अपनी उपस्थिति स्थापित करने का निमंत्रण दिया था।

दोनों नेताओं ने नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को भी प्राथमिकता दी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल संचार,उन्नत अनुसंधान,स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों का मानना है कि ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के इस दौर में तकनीकी सहयोग विकास का प्रमुख आधार बन सकता है।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग भी भारत और डेनमार्क के संबंधों का एक उभरता हुआ आयाम है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा,रक्षा तकनीक और रणनीतिक संवाद के क्षेत्र में संपर्क बढ़ाया है। विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत और डेनमार्क के बीच जल प्रबंधन और शहरी विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। डेनमार्क को जल संरक्षण और स्मार्ट शहरी नियोजन के क्षेत्र में अग्रणी देशों में गिना जाता है,जबकि भारत तेजी से शहरीकरण और जल संसाधन प्रबंधन की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच अनुभवों और तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान दोनों पक्षों के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।

मेटे फ्रेडरिक्सन का लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना डेनमार्क की राजनीति में उनके मजबूत जनाधार और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता है,जिन्होंने जलवायु परिवर्तन,सामाजिक कल्याण और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीतियाँ अपनाई हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उनके नए कार्यकाल में भारत और डेनमार्क के संबंधों को और अधिक गति मिल सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद विश्वास और सहयोग का मजबूत आधार भविष्य में आर्थिक,तकनीकी,पर्यावरणीय और रणनीतिक क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई शुभकामनाएँ केवल एक औपचारिक संदेश नहीं हैं,बल्कि यह उन गहरे और विकसित होते संबंधों का भी प्रतीक हैं,जो भारत और डेनमार्क के बीच पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं। आने वाले समय में ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप,निवेश, प्रौद्योगिकी,रक्षा और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में मेटे फ्रेडरिक्सन के तीसरे कार्यकाल को भारत-डेनमार्क संबंधों के लिए भी एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है।