नई दिल्ली,5 जून (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों,भू-राजनीतिक तनावों और वित्तीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 682.2 अरब डॉलर के अत्यंत सशक्त स्तर पर पहुँच चुका है,जो भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार का मौजूदा स्तर भारत की आर्थिक स्थिरता,मजबूत बाह्य क्षेत्र और संतुलित वित्तीय प्रबंधन का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि यह भंडार लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम है। इसके अलावा,यह भारत के कुल बाह्य ऋण का 89 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करता है। किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का यह स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे वैश्विक वित्तीय संकट या अचानक पूँजी निकासी जैसी परिस्थितियों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार केवल आँकड़ों का विषय नहीं है,बल्कि यह निवेशकों के विश्वास,अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में देश की साख और आर्थिक मजबूती का भी संकेतक होता है। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बाह्य स्थिति को लगातार मजबूत किया है और इसी का परिणाम है कि आज देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि कई देशों को मुद्रा संकट और विदेशी भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
गवर्नर ने विनिमय दर यानी रुपये की कीमत को लेकर भी रिजर्व बैंक की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक किसी विशेष विनिमय दर या रुपये के किसी निश्चित स्तर को लक्ष्य बनाकर काम नहीं करता। केंद्रीय बैंक की नीति यह है कि विनिमय दर को बाजार की शक्तियों के अनुसार तय होने दिया जाए। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं,वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और सट्टेबाजी के दबाव के कारण कभी-कभी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक का उद्देश्य बाजार आधारित उतार-चढ़ाव को रोकना नहीं होता,बल्कि अत्यधिक अस्थिरता और अव्यवस्थित गतिविधियों को नियंत्रित करना होता है। केंद्रीय बैंक इस बात पर विशेष ध्यान देता है कि बाजार में अनावश्यक घबराहट न फैले और वित्तीय प्रणाली सुचारु रूप से कार्य करती रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि आवश्यकता पड़ी,तो रिजर्व बैंक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उपलब्ध सभी साधनों का उपयोग करेगा।
मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान गवर्नर ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक संघर्षों और अंतर्राष्ट्रीय अनिश्चितताओं का असर विश्व भर के वित्तीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और निवेश प्रवाह पर दिखाई दे रहा है। इन परिस्थितियों का प्रभाव भारत की आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के अनुमानों पर भी पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और विकास की संभावनाएँ सकारात्मक दिखाई दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार घरेलू माँग,मजबूत बैंकिंग प्रणाली,बढ़ते निवेश और सरकार द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढाँचा विकास कार्य हैं। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र में सुधारों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिजर्व बैंक का मानना है कि इन कारकों के कारण भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर पा रहा है।
संजय मल्होत्रा ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक केवल मौजूदा परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है,बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए भी नीतियां तैयार कर रहा है। उनका कहना था कि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने,वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इससे भविष्य में आने वाली संभावित चुनौतियों का सामना करना आसान होगा।
विदेशी पूँजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक ने कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी की हैं। गवर्नर ने बताया कि फुली एक्सेसिबल रूट के दायरे का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत अब 15 वर्ष,30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे पहले इस व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य रूप से कम अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियाँ शामिल थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी पूँजी प्रवाह बढ़ेगा,बल्कि भारतीय ऋण बाजार की गहराई और तरलता में भी सुधार होगा। लंबे समय की प्रतिभूतियों को शामिल किए जाने से वैश्विक निवेशकों के लिए भारत का बॉन्ड बाजार और अधिक आकर्षक बन सकता है।
इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भी एक महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की गई है। रिजर्व बैंक ने कहा कि बाहरी वाणिज्यिक उधार को प्रोत्साहित करने के लिए 13 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों से कम लागत पर वित्त जुटाने में सहायता प्रदान करना है। माना जा रहा है कि इससे बड़ी परियोजनाओं के लिए पूँजी उपलब्ध कराने में आसानी होगी और निवेश गतिविधियों को गति मिलेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार,विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा से कंपनियों के लिए मुद्रा जोखिम कम होगा और उन्हें विदेशी बाजारों से धन जुटाने में अधिक सुविधा मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव बुनियादी ढाँचा,ऊर्जा,परिवहन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
मौद्रिक नीति के तहत सबसे अधिक ध्यान ब्याज दरों पर भी था। जैसा कि बाजार को पहले से उम्मीद थी, भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और उन्हें यथावत बनाए रखा। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना तटस्थ रुख भी बरकरार रखा है। यह संकेत देता है कि रिजर्व बैंक फिलहाल आर्थिक वृद्धि और महँगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला घरेलू माँग और आर्थिक विकास को लेकर रिजर्व बैंक के विश्वास को दर्शाता है। हालाँकि,केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और भविष्य में आवश्यकतानुसार नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं। इसलिए आने वाले महीनों में महँगाई, वैश्विक ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।
कुल मिलाकर,भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा मौद्रिक नीति ने यह संकेत दिया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है। रिकॉर्ड स्तर का विदेशी मुद्रा भंडार,स्थिर वित्तीय प्रणाली, मजबूत घरेलू माँग और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए नए कदम भारत की आर्थिक संभावनाओं को और मजबूत बनाते हैं। रिजर्व बैंक का मानना है कि सतर्क नीतियों और मजबूत आर्थिक बुनियाद के सहारे भारत आने वाले समय में भी वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम रहेगा।
