रामपुर,5 जून (युआईटीवी)- फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। फिल्म के निर्माता अमित जानी और अभिनेता सलमान खान की कानूनी टीम के बीच बढ़ता टकराव अब नए मोड़ पर पहुँच गया है। हाल ही में सलमान खान की लीगल टीम द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद अमित जानी ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि नोटिस मिलने के बाद से उन्हें लगातार धमकी भरे संदेश और फोन कॉल प्राप्त हो रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म जगत के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
अमित जानी ने एक बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें सलमान खान की कानूनी टीम की ओर से भेजा गया नोटिस प्राप्त हुआ है और उनकी कानूनी टीम इस पर विचार कर रही है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस मिलने के बाद परिस्थितियाँ सामान्य नहीं रहीं। उनके अनुसार पिछले 36 घंटों के भीतर उन्हें दस हजार से अधिक धमकी भरे संदेश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न सोशल मीडिया मंचों,फोन कॉल,इंस्टाग्राम, फेसबुक और निजी संदेशों के माध्यम से उन्हें डराने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
फिल्म निर्माता का कहना है कि उन्हें लगातार ऐसे संदेश मिल रहे हैं,जिनमें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें मुंबई में न रहने देने और शारीरिक नुकसान पहुँचाने जैसी धमकियाँ भी दी हैं। अमित जानी ने कहा कि यदि किसी को उनके काम या फिल्म की विषयवस्तु पर आपत्ति है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी विवाद का जवाब धमकियों या डराने की कोशिशों के जरिए नहीं दिया जाना चाहिए।
अमित जानी ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें भारत की न्याय व्यवस्था और कानून पर पूरा भरोसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार के दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और अपनी फिल्म को लेकर कानूनी रूप से लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि यदि फिल्म के खिलाफ कोई आपत्ति है,तो अदालत में उसका समाधान निकाला जा सकता है,लेकिन धमकी और भय का माहौल बनाना स्वीकार्य नहीं है।
इस विवाद के दौरान अमित जानी का एक बयान विशेष रूप से चर्चा में आ गया है,जिसमें उन्होंने सलमान खान के कुछ समर्थकों और लॉरेंस बिश्नोई के समर्थकों के व्यवहार की तुलना की। उन्होंने दावा किया कि जब फिल्म का पोस्टर पहली बार जारी किया गया था,तब उन्हें लॉरेंस बिश्नोई के समर्थकों की ओर से भी कई फोन कॉल आए थे। हालाँकि,उनके अनुसार उन बातचीतों में किसी प्रकार की अभद्रता नहीं थी और सभी ने अपनी बात शालीनता से रखी थी। इसके विपरीत,हाल के दिनों में मिले कई संदेशों में कथित रूप से अपशब्दों और धमकियों का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संदेश ऐसे लोगों की ओर से भेजे गए बताए जा रहे हैं,जो स्वयं को डी-कंपनी से जुड़ा हुआ बता रहे हैं। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी अमित जानी का कहना है कि इन घटनाओं ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही धमकियों से वह डरने वाले नहीं हैं और अपने निर्णय पर कायम रहेंगे।
अमित जानी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने सलमान खान की कानूनी टीम द्वारा भेजे गए नोटिस को फाड़ दिया। उनके अनुसार यह कदम प्रतीकात्मक था और इसी के माध्यम से उन्होंने अपना जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं,बल्कि दबाव की राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने दोहराया कि उनकी टीम फिल्म पर काम जारी रखे हुए है और जल्द ही इसका टीजर भी जारी किया जाएगा।
निर्माता ने दावा किया कि नोटिस में फिल्म से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाने या संशोधित करने की माँग की गई थी,लेकिन उनकी टीम ने ऐसी किसी माँग को स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि फिल्म की मूल सामग्री में कोई बदलाव नहीं किया गया है और परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि फिल्म की कहानी और उसका उद्देश्य दर्शकों के सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
दरअसल पूरा विवाद फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ की विषयवस्तु को लेकर शुरू हुआ है। यह फिल्म कथित तौर पर वर्ष 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है। जैसे ही फिल्म का पोस्टर सार्वजनिक हुआ,विभिन्न वर्गों में इसकी कहानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों का मानना था कि फिल्म में उस विवादित मामले और उससे जुड़े सामाजिक तथा कानूनी पहलुओं को दिखाया जाएगा,जिसने वर्षों तक सुर्खियाँ बटोरी थीं।
फिल्म के पोस्टर और शुरुआती प्रचार सामग्री के बाद यह भी अटकलें लगाई जाने लगीं कि फिल्म में अभिनेता सलमान खान और बिश्नोई समाज से जुड़े विवाद को प्रमुखता से दिखाया जा सकता है। इसके बाद मामला तेजी से संवेदनशील होता चला गया। इसी क्रम में सलमान खान की कानूनी टीम ने हस्तक्षेप करते हुए फिल्म से जुड़े पक्षों को नोटिस भेजा।
सलमान खान की कानूनी टीम का तर्क है कि प्रस्तावित फिल्म अभिनेता की व्यक्तिगत छवि,प्रतिष्ठा और अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि काला हिरण शिकार मामला अभी भी राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में उस विषय पर आधारित किसी फिल्म का निर्माण और उसका प्रचार कानूनी दृष्टि से संवेदनशील माना जा सकता है।
कानूनी पक्ष का कहना है कि न्यायालय में लंबित मामलों पर आधारित सामग्री सार्वजनिक करने से कई तरह की जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसी कारण नोटिस में फिल्म के निर्माण और प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की माँग की गई है। यह भी कहा गया है कि संबंधित पक्षों को किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहिए,जिससे चल रही न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका पैदा हो।
फिलहाल यह मामला कानूनी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर अमित जानी अपनी फिल्म को लेकर दृढ़ रुख अपनाए हुए हैं,वहीं दूसरी ओर सलमान खान की कानूनी टीम अपने अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की रक्षा की बात कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच यह विवाद अदालत तक पहुँचता है या आपसी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से कोई समाधान निकलता है।
फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ अभी रिलीज से काफी दूर है,लेकिन इसके इर्द-गिर्द पैदा हुआ विवाद पहले ही इसे सुर्खियों में ला चुका है। अब सबकी निगाहें आगामी कानूनी घटनाक्रमों और फिल्म के टीजर पर टिकी हैं,जो इस पूरे मामले को नई दिशा दे सकता है।
