नई दिल्ली,5 जून (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद शुक्रवार को देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत निर्धारित किया है। हालाँकि,केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं,आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान,अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को आने वाले समय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में लगातार बदलाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पहले वित्त वर्ष के लिए 6.9 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था,लेकिन वर्तमान वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.6 प्रतिशत,दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत,तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। उनका कहना था कि आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता बनी हुई है और कई प्रमुख संकेतक यह दर्शाते हैं कि देश की विकास यात्रा अभी भी मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के क्रय प्रबंधक सूचकांक के आँकड़े यह संकेत देते हैं कि दोनों प्रमुख क्षेत्र मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उद्योग जगत का भरोसा सकारात्मक बना हुआ है और विभिन्न क्षेत्रों में माँग की स्थिति भी संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि कारोबारी गतिविधियों में निरंतरता दिखाई दे रही है,जिससे आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल रहा है।
रिजर्व बैंक के अनुसार,देश में निजी खपत आर्थिक विकास का एक प्रमुख आधार बनी हुई है। उपभोक्ताओं द्वारा खर्च में बढ़ोतरी के कारण माँग मजबूत बनी हुई है,जिसका सकारात्मक प्रभाव विभिन्न उद्योगों और सेवा क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। गवर्नर ने कहा कि घरेलू माँग की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच भी स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि लागत बढ़ने के बावजूद निजी और सरकारी निवेश गतिविधियों में अच्छी गति बनी हुई है। बुनियादी ढाँचा,विनिर्माण और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश का प्रवाह जारी है,जिससे रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि को बल मिल रहा है। निवेश गतिविधियों की यह निरंतरता आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
निर्यात क्षेत्र को लेकर भी रिजर्व बैंक ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। अप्रैल 2026 में माल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालाँकि,वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और बीमा लागत अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है,फिर भी भारतीय निर्यातकों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे देश के बाहरी क्षेत्र को मजबूती मिली है और विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि हुई है।
सेवा क्षेत्र के निर्यात को लेकर भी केंद्रीय बैंक ने आशावादी दृष्टिकोण व्यक्त किया है। रिजर्व बैंक का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी बदलावों को लेकर वैश्विक स्तर पर विभिन्न प्रकार की चिंताएँ मौजूद हैं,लेकिन इसके बावजूद भारतीय सेवाओं की अंतर्राष्ट्रीय माँग मजबूत बनी हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी,परामर्श सेवाएँ,वित्तीय सेवाएँ और अन्य क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त समर्थन प्रदान कर रही है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अब तक अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बढ़ती लागत और बाहरी दबावों का असर धीरे-धीरे विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। उनका कहना था कि यदि वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं,तो इसका प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ महँगाई को लेकर भी रिजर्व बैंक ने अपना आकलन प्रस्तुत किया। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महँगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत रखा है। यह अनुमान दर्शाता है कि महँगाई फिलहाल नियंत्रण में है,लेकिन आने वाले महीनों में इसमें कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
तिमाही आधार पर पहली तिमाही में महँगाई 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो सकती है,जबकि तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना जताई गई है। चौथी तिमाही में महँगाई दर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि वर्ष के मध्य में महँगाई का दबाव बढ़ सकता है।
रिजर्व बैंक का मानना है कि वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर अभी घरेलू बाजारों तक नहीं पहुँचा है। यही कारण है कि महँगाई आरबीआई के लक्ष्य स्तर के भीतर बनी हुई है। हालाँकि,यदि वैश्विक लागत दबाव बढ़ते हैं तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को इसका प्रभाव महसूस हो सकता है।
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर महँगाई का अनुमान 4.7 प्रतिशत लगाया है। कोर महँगाई में खाद्य और ईंधन जैसी अस्थिर वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता,इसलिए इसे महँगाई के दीर्घकालिक रुझानों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। रिजर्व बैंक का कहना है कि कोर महँगाई में स्थिरता अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है,लेकिन वैश्विक कारक इसे प्रभावित कर सकते हैं।
आरबीआई ने विशेष रूप से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंता व्यक्त की है। यदि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है,तो कच्चे माल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर भारतीय उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
इसके अलावा कमोडिटी कीमतों में संभावित तेजी को भी महँगाई के लिए एक बड़ा जोखिम माना गया है। तेल,धातु और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ सकती है,जिसका असर अंततः उपभोक्ता कीमतों पर दिखाई देगा। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक वैश्विक बाजारों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
मौसम संबंधी जोखिमों को भी रिजर्व बैंक ने गंभीरता से लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो की संभावना कृषि उत्पादन तथा खाद्य महँगाई के लिए चिंता का विषय हो सकती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून की स्थिति का सीधा प्रभाव ग्रामीण आय,खाद्य उत्पादन और महंगाई पर पड़ता है।
हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और जलाशयों में जल स्तर संतोषजनक बना हुआ है। इससे संभावित जोखिमों को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार और विभिन्न एजेंसियां भी खाद्य आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
रिजर्व बैंक का समग्र आकलन यह है कि वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और लचीली बनी हुई है। मजबूत घरेलू माँग,निवेश गतिविधियों में निरंतरता,सेवा क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन और निर्यात की स्थिर स्थिति देश की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हालाँकि,केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में महँगाई,वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों,भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और मौसम संबंधी कारकों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि परिस्थितियों में बड़ा बदलाव होता है,तो आरबीआई आवश्यक नीतिगत कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि चुनौतियों के बावजूद विकास की गति बरकरार है और देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
