अलेक्जेंडर ज्वेरेव (तस्वीर क्रेडिट@navgill82)

फ्रेंच ओपन 2026: ज्वेरेव का सपना हुआ सच,पाँच सेटों के महायुद्ध में कोबोली को हराकर जीता पहला ग्रैंड स्लैम खिताब

नई दिल्ली,8 जून (युआईटीवी)- टेनिस जगत में वर्षों से जिस पल का इंतजार किया जा रहा था,वह आखिरकार पेरिस की लाल मिट्टी पर साकार हो गया। जर्मनी के स्टार खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए फ्रेंच ओपन 2026 का पुरुष एकल खिताब जीत लिया। रविवार को खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्होंने इटली के युवा खिलाड़ी फ्लेवियो कोबोली को पाँच सेटों तक चले संघर्षपूर्ण मुकाबले में 6-1, 4-6, 6-4,6-7 (5), 6-1 से हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किया।

चार घंटे और 20 मिनट तक चले इस यादगार मुकाबले में दर्शकों को टेनिस का उच्चतम स्तर देखने को मिला। कभी एक खिलाड़ी हावी दिखा तो कभी दूसरे ने शानदार वापसी की। अंत में अनुभव और धैर्य के दम पर ज्वेरेव ने जीत हासिल कर अपने लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया। यह केवल एक खिताब नहीं था,बल्कि उन तमाम निराशाओं,असफलताओं और अधूरे सपनों पर जीत थी,जो वर्षों से उनके साथ चल रहे थे।

ज्वेरेव का करियर लंबे समय से शानदार उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने एटीपी फाइनल्स में सफलता हासिल की,मास्टर्स 1000 स्तर के कई खिताब जीते और टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया। इसके बावजूद एक ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी की कमी हमेशा उनके करियर पर सवाल खड़े करती रही। कई बार उन्हें भविष्य का चैंपियन कहा गया,लेकिन जब भी ग्रैंड स्लैम फाइनल का दबाव आया,वह अंतिम कदम पार नहीं कर सके।

इससे पहले ज्वेरेव तीन बार ग्रैंड स्लैम फाइनल में हार का सामना कर चुके थे। वर्ष 2020 के अमेरिकी ओपन में वह खिताब के बेहद करीब पहुँचकर चूक गए थे। इसके बाद 2024 के फ्रेंच ओपन और 2025 के ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। हर हार के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या वह कभी ग्रैंड स्लैम जीत पाएँगे,लेकिन इस बार उन्होंने साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी वही होता है,जो असफलताओं से टूटने के बजाय उनसे सीखता है।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही ज्वेरेव बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने पहले सेट में शानदार सर्विस और सटीक ग्राउंडस्ट्रोक का प्रदर्शन किया। कोबोली शुरुआती दबाव को संभाल नहीं सके और कई गलतियाँ कर बैठे। ज्वेरेव ने इसका पूरा फायदा उठाया और केवल कुछ ही मिनटों में 6-1 से पहला सेट अपने नाम कर लिया। ऐसा लग रहा था कि अनुभवी जर्मन खिलाड़ी आसानी से जीत की ओर बढ़ रहे हैं।

हालाँकि,पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में खेलने उतरे फ्लेवियो कोबोली ने हार मानने से इनकार कर दिया। दूसरे सेट में उन्होंने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने आक्रामक शॉट्स लगाए,कोर्ट पर तेजी से मूवमेंट दिखाई और कई शानदार ड्रॉप शॉट्स के जरिए ज्वेरेव को परेशान किया। युवा इटैलियन खिलाड़ी का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया और उन्होंने दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।

तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हर अंक के लिए लंबी रैलियाँ हुईं और दोनों खिलाड़ियों ने बेहतरीन शॉट्स लगाए,लेकिन महत्वपूर्ण मौकों पर कोबोली कुछ अनावश्यक गलतियाँ कर बैठे। ज्वेरेव ने अनुभव का फायदा उठाते हुए एक अहम ब्रेक हासिल किया और तीसरा सेट 6-4 से जीतकर फिर बढ़त बना ली।

चौथे सेट में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। इस दौरान ज्वेरेव के खेल में दबाव साफ दिखाई देने लगा। दूसरी ओर कोबोली लगातार आत्मविश्वास के साथ खेलते रहे। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी सर्विस बचाते हुए स्कोर 5-5 तक पहुँचा दिया। इसके बाद सेट टाई-ब्रेक में पहुँचा,जहाँ इटली के युवा खिलाड़ी ने असाधारण साहस का परिचय दिया।

टाई-ब्रेक में कोबोली एक समय 1-3 से पीछे चल रहे थे,लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की। उन्होंने दबाव में कुछ बेहतरीन विजेता शॉट लगाए और सेट पॉइंट पर शानदार फोरहैंड विनर के साथ टाई-ब्रेक जीत लिया। इसके साथ ही मैच निर्णायक पाँचवें सेट में पहुँच गया। उस समय स्टेडियम में मौजूद अधिकांश दर्शकों को लगने लगा था कि मुकाबले का रुख बदल चुका है और शायद ज्वेरेव एक बार फिर बड़े मंच पर लड़खड़ा सकते हैं।

लेकिन महान खिलाड़ी कठिन परिस्थितियों में ही अपनी असली पहचान दिखाते हैं। चौथे सेट की निराशा को पीछे छोड़ते हुए ज्वेरेव ने पाँचवें सेट में अपने करियर का शायद सबसे बेहतरीन टेनिस खेला। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और कोबोली को किसी भी तरह की वापसी का मौका नहीं दिया।

जर्मन खिलाड़ी की सर्विस निर्णायक सेट में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। उन्होंने अपनी पहली सर्विस पर 83 प्रतिशत अंक जीते और लगातार गहरे तथा सटीक ग्राउंडस्ट्रोक लगाकर इटैलियन खिलाड़ी को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया। ज्वेरेव ने शुरुआती चरण में ही कोबोली की सर्विस तोड़ दी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कोबोली ने वापसी की पूरी कोशिश की,लेकिन लगातार दबाव के कारण उनसे गलतियाँ होने लगीं। दूसरी ओर ज्वेरेव पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे नजर आए। उन्होंने अपने सामने आए सभी चार ब्रेक पॉइंट बचाए और हर महत्वपूर्ण मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया। अंततः 6-1 से पाँचवां सेट जीतते ही उन्होंने दोनों हाथ आसमान की ओर उठाए और भावुक होकर कोर्ट पर बैठ गए। वर्षों का संघर्ष,दर्द और इंतजार आखिरकार समाप्त हो चुका था।

इस जीत के साथ ज्वेरेव ने केवल अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब ही नहीं जीता,बल्कि जर्मन टेनिस इतिहास में भी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। वह 1937 में हेनर हेनकेल के बाद फ्रेंच ओपन जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा 1996 में बोरिस बेकर की ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत के बाद किसी भी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी भी बन गए हैं।

दूसरी ओर,भले ही फ्लेवियो कोबोली खिताब जीतने से चूक गए,लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुँचकर उन्होंने दुनिया को अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। जिस तरह से उन्होंने अनुभवी ज्वेरेव को पाँच सेटों तक चुनौती दी,उससे साफ है कि आने वाले वर्षों में वह टेनिस जगत के बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं।

फ्रेंच ओपन 2026 का यह फाइनल लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक ओर एक खिलाड़ी ने अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया,तो दूसरी ओर एक नए सितारे ने भविष्य की संभावनाओं की झलक दिखाई,लेकिन इस दिन की सबसे बड़ी कहानी अलेक्जेंडर ज्वेरेव की रही,जिन्होंने तमाम असफलताओं और आलोचनाओं के बाद आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया,जिसका सपना उन्होंने बचपन से देखा था। अब उनके नाम के आगे ग्रैंड स्लैम चैंपियन भी जुड़ चुका है और यही उपलब्धि उनके करियर को एक नए आयाम पर ले गई है।