तेहरान,8 जून (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों और हाल के मिसाइल हमलों के बाद ईरान और इजरायल के बीच बयानबाजी और टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में ईरान के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दुल्लाही ने इजरायल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी उपनगर दाहियेह में अपने हमलों का विस्तार किया या ईरान की सैन्य कार्रवाई का जवाब देने की कोशिश की,तो उसे पहले से कहीं अधिक गंभीर और विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी द्वारा जारी बयान में अली अब्दुल्लाही ने कहा कि इजरायल को तुरंत दक्षिणी लेबनान और दाहियेह क्षेत्र में अपने सैन्य हमले बंद कर देने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार लेबनानी नागरिकों के खिलाफ आक्रामक और विनाशकारी अभियान चला रहा है,जिससे आम लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार यदि यह सिलसिला नहीं रुका,तो ईरान और उसके सहयोगी ऐसे जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे,जिनका प्रभाव इजरायल के लिए बेहद गंभीर साबित हो सकता है।
अब्दुल्लाही ने कहा कि पिछले कई महीनों से लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों में इजरायली सैन्य अभियान जारी हैं और इनमें बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है,जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक संस्थाएं इस मामले में प्रभावी भूमिका निभाने में विफल रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है और युद्ध के दौरान ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है,जिनको लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
ईरानी कमांडर के अनुसार,तेहरान ने पहले भी कई बार चेतावनी दी थी कि यदि लेबनान में हमले नहीं रुके तो क्षेत्रीय हालात और अधिक विस्फोटक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि चेतावनियों के बावजूद इजरायल ने न केवल दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखे,बल्कि बेरूत के दक्षिणी इलाकों को भी निशाना बनाया। यही कारण है कि अब ईरान और उसके सहयोगी समूह पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार हैं।
तनाव उस समय और बढ़ गया,जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने घोषणा की कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने उत्तरी इजरायल में स्थित रमत डेविड एयर बेस को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ईरानी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई लेबनान में इजरायल द्वारा की जा रही व्यापक सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई है। ईरान का कहना है कि इन कार्रवाइयों के कारण लेबनान में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और कई नागरिकों की जान गई है।
आईआरजीसी के बयान में कहा गया कि रमत डेविड एयर बेस उन प्रमुख सैन्य ठिकानों में शामिल है,जहाँ से लेबनान के खिलाफ अभियानों को अंजाम दिया जाता रहा है। इसलिए इसे जवाबी कार्रवाई के लिए चुना गया। ईरान ने दावा किया कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल चेतावनी स्वरूप थी और इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि यदि लेबनान में हमले जारी रहे तो भविष्य में और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम को उन्होंने इस उम्मीद के साथ स्वीकार किया था कि क्षेत्र में सभी पक्ष सैन्य गतिविधियाँ रोक देंगे और शांति बहाल करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे,लेकिन तेहरान का आरोप है कि युद्धविराम लागू होने के बाद भी लेबनान में संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियाँ जारी रहीं। ईरान का कहना है कि इसी कारण क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ने लगा।
ईरानी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केवल लेबनान ही नहीं,बल्कि समुद्री क्षेत्रों में भी तनावपूर्ण गतिविधियाँ जारी रहीं। बयान में कहा गया कि होर्मुज की खाड़ी,ओमान सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में ईरानी हितों को निशाना बनाने की कोशिशें की गईं। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है,लेकिन ईरान इन्हें क्षेत्रीय अस्थिरता का हिस्सा मान रहा है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि हालिया मिसाइल हमला एक चेतावनी भर है। संगठन ने कहा कि यदि भविष्य में लेबनान या ईरान के हितों पर इसी प्रकार की कार्रवाइयाँ जारी रहीं,तो जवाबी कार्रवाई का दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है। संगठन ने यह भी संकेत दिया कि पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकाने संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल हो सकते हैं।
इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने भी कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि वह लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन या वहाँ के लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार हालिया जवाबी कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा थी।
मोहसेन रेजाई ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता तभी संभव है,जब सभी पक्ष युद्धविराम समझौतों का सम्मान करें और सैन्य अभियानों को रोकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा हालात जारी रहे,तो भविष्य में जवाब और भी अधिक कठोर हो सकता है। उनके अनुसार प्रत्येक नई कार्रवाई का उत्तर पहले से अधिक प्रभावशाली और नुकसानदेह तरीके से दिया जाएगा।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर नागरिक उड्डयन पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान की नागरिक उड्डयन संस्था ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए देश के पश्चिमी हिस्से के हवाई क्षेत्र को अगली सूचना तक बंद करने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और इसलिए यह कदम उठाया गया है। हवाई क्षेत्र बंद होने से कई उड़ानों के संचालन पर असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अप्रैल में लागू युद्धविराम के बाद क्षेत्र में अपेक्षाकृत शांति का माहौल बनने की उम्मीद थी। आठ अप्रैल को लागू हुए संघर्षविराम ने लगभग चालीस दिनों तक चली भीषण लड़ाई को समाप्त किया था। यह संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और इसके दौरान पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई थी। युद्धविराम के बाद कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास शुरू किए थे।
पिछले कुछ सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच भी कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान होने की खबरें सामने आई थीं। दोनों पक्ष किसी ऐसे समझौते पर पहुँचने की कोशिश कर रहे थे,जिससे संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके। हालाँकि,हालिया घटनाओं ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है और अब यह स्पष्ट नहीं है कि शांति वार्ताएँ किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता इस बात को लेकर बढ़ रही है कि यदि मौजूदा तनाव और अधिक बढ़ता है,तो इसका प्रभाव केवल ईरान,इजरायल और लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक क्षेत्रों में से एक है और यहाँ किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
फिलहाल क्षेत्र की निगाहें इजरायल की संभावित प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक एवं सैन्य गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। दोनों पक्षों के कड़े बयानों ने यह संकेत दिया है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से काफी दूर है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और कूटनीतिक प्रयास आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि तनाव को नियंत्रित नहीं किया गया,तो पश्चिम एशिया एक बार फिर व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ सकता है,जिसके परिणाम पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए गंभीर हो सकते हैं।
