वाशिंगटन,11 जून (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर नए सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं और साथ ही तेहरान पर परमाणु समझौते को लेकर दबाव भी बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि ईरान वाशिंगटन के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है,तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है, जबकि ईरान लगातार अमेरिकी कदमों का विरोध करता रहा है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई बुधवार को पूर्वी समयानुसार शाम 5 बजकर 15 मिनट पर शुरू की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड,जिसे सेंटकॉम के नाम से जाना जाता है,ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाकर अतिरिक्त हमले किए गए। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये हमले ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं और इनका उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी हितों तथा सहयोगी देशों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
इस सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक रूप से कड़े बयान दिए थे। फ्लोरिडा स्थित मैकडिल एयरफोर्स बेस पर सेंटकॉम के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात के बाद रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और राष्ट्रपति के निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि ईरान के पास एक बेहतर और व्यापक समझौता स्वीकार करने का अवसर है,लेकिन यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसके सामने गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका लंबे समय से ईरान को कूटनीतिक रास्ते के माध्यम से समझौते तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार,वाशिंगटन चाहता है कि ईरान उन प्रतिबद्धताओं को औपचारिक रूप से स्वीकार करे,जिनका वह पहले भी कई बार उल्लेख कर चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अभी भी समझौते के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ ही वह अपनी सैन्य तैयारियों को भी कमजोर नहीं होने देगा।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इसी तरह का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कई महीनों तक चली बातचीत के बावजूद ईरान ने वार्ता को आगे बढ़ाने में गंभीरता नहीं दिखाई। ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौता ईरान के लिए लाभदायक है और इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुँच गया था,लेकिन ईरान लगातार प्रक्रिया को टालता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान वार्ता को लंबा खींचकर समय हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार,अब अमेरिका के पास सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्प खुले हैं और वह दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है।
वर्तमान तनाव की पृष्ठभूमि में हाल ही में हुई एक गंभीर घटना भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को ईरान ने ओमान के निकट अमेरिकी सेना के एक एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया। हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार चालक दल को सुरक्षित बचा लिया गया,लेकिन इस घटना के बाद सैन्य प्रतिक्रिया लगभग तय मानी जा रही थी।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने इस घटना का जवाब पहले ही दे दिया है और आगे भी आवश्यक होने पर कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसे व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जाना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना उसके परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।
सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि हालिया हमले ईरान की लगातार और बिना उकसावे वाली गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व का दावा है कि पिछले कुछ समय से ईरान और उससे जुड़े समूह क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी हितों के खिलाफ गतिविधियाँ चला रहे हैं। इसी कारण अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति और अभियानों को और मजबूत किया है।
इसी दौरान समुद्री क्षेत्र में भी अमेरिका की गतिविधियाँ बढ़ी हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि उसने एक और तेल टैंकर को रोक दिया,जो कथित रूप से अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल लेकर जा रहा था। अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए उठाया गया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी सेट्टेबेल्लो के चालक दल ने कई बार दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई जहाज को रोकने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए की गई थी।
होर्मुज स्ट्रेट के आसपास चल रहे अभियानों को लेकर रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि यह क्षेत्र अमेरिकी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मिलकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। उनके अनुसार,इस अभियान के तहत करोड़ों बैरल तेल सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुका है।
हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि तेल,गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज स्ट्रेट का महत्व अत्यधिक है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इसलिए अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि हाल के अभियानों के कारण ईरान की कई सैन्य क्षमताएँ कमजोर हुई हैं। हालाँकि,उन्होंने इन अभियानों के विस्तृत परिणामों का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह संकेत अवश्य दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अमेरिका आगे भी नए हमले कर सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अभी भी समझौते का रास्ता खुला है और उसके लिए यही सबसे उचित विकल्प होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की वर्तमान रणनीति दोहरे दबाव पर आधारित है। एक ओर वह सैन्य कार्रवाई के माध्यम से ईरान को संदेश देना चाहता है कि उसकी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा गया है। इस रणनीति का उद्देश्य ईरान को ऐसे समझौते के लिए तैयार करना है,जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर कठोर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि लगातार सैन्य दबाव और हमले क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं। पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। ऊर्जा बाजारों पर इसका असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है,क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस बढ़ते दबाव का जवाब किस तरह देता है। यदि दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो तनाव कम हो सकता है,लेकिन यदि सैन्य कार्रवाई और जवाबी कदमों का सिलसिला जारी रहा,तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कोई भी कदम उठाने नहीं देंगे।
ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका का उद्देश्य केवल इतना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। उन्होंने कहा कि समाधान बेहद सरल है और इसके लिए केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी ओर सैन्य अभियान जारी रहने से यह भी स्पष्ट हो गया है कि वाशिंगटन अब कूटनीति और सैन्य शक्ति दोनों का इस्तेमाल एक साथ करते हुए तेहरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। आने वाले दिनों में यही रणनीति पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय कर सकती है।
