तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

महिला कल्याण योजनाओं पर कायम रही विजय सरकार,’कलैगनार महिला अधिकार योजना’ जारी,जून की किस्त जारी होने से लाखों महिलाओं को मिली राहत

चेन्नई,15 जून (युआईटीवी)- तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने महिलाओं के कल्याण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ‘कलैगनार महिला अधिकार अनुदान योजना’ को जारी रखा है। सोमवार को राज्यभर की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में जून महीने की एक हजार रुपये की किस्त जमा कर दी गई। इस कदम से लाखों लाभार्थी महिलाओं को आर्थिक राहत मिली है और उन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है,जो नई सरकार के गठन के बाद इस योजना के भविष्य को लेकर सामने आ रही थीं।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री विजय और उनकी पार्टी ने कई महत्वाकांक्षी कल्याणकारी घोषणाएँ की थीं। इनमें सबसे अधिक चर्चा महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने के वादे को लेकर हुई थी। इसके अलावा बेरोजगार स्नातक युवाओं के लिए 4,000 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता और राज्यभर में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं ने भी मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया था। चुनाव प्रचार के दौरान इन वादों को सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में बड़े कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

जब चुनाव परिणामों में विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिला और उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली,तब बड़ी संख्या में लोगों को उम्मीद थी कि सरकार जल्द ही महिलाओं के लिए घोषित 2,500 रुपये मासिक सहायता योजना लागू कर देगी। हालाँकि,सत्ता सँभालने के बाद सरकार ने यह संकेत दिया कि सभी चुनावी वादों को एक साथ लागू करना संभव नहीं होगा और इसके लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री विजय ने पदभार ग्रहण करने के बाद जिन प्रमुख फाइलों पर हस्ताक्षर किए,उनमें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण योजना भी शामिल थी। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि जनता से किए गए सभी वादों को पूरा किया जाएगा,लेकिन इसके लिए वित्तीय संतुलन और प्रशासनिक तैयारी को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसी कारण महिलाओं को 2,500 रुपये की सहायता देने वाली नई योजना के क्रियान्वयन में कुछ समय लगने की बात कही गई।

नई सहायता योजना में हो रही देरी के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई ‘कलैगनार महिला अधिकार अनुदान योजना’ का भविष्य क्या होगा। यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा बन चुकी है। कई परिवारों में यह राशि घरेलू खर्च,बच्चों की शिक्षा,स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और अन्य दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में योजना के बंद होने या इसमें देरी की आशंका ने लाभार्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी थी।

यह मुद्दा तमिलनाडु विधानसभा तक भी पहुँचा। विपक्षी दलों ने सरकार से स्पष्ट जवाब माँगा कि क्या नई सरकार इस योजना को जारी रखेगी या नहीं। विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान विपक्ष ने कहा कि लाखों महिलाएँ इस सहायता पर निर्भर हैं और सरकार को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री विजय ने सदन को भरोसा दिलाया कि महिलाओं के हितों से जुड़ी किसी भी योजना को अचानक समाप्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार जनता के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और जो योजनाएँ सीधे तौर पर महिलाओं तथा कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाती हैं,उन्हें जारी रखा जाएगा। उनके इस बयान से राज्यभर में लाभार्थियों के बीच राहत की भावना देखने को मिली। कई महिलाओं ने इसे सरकार की सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का संकेत बताया।

इस बीच मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें भी कीं। इन बैठकों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की वित्तीय स्थिति,भविष्य की योजनाओं और संसाधनों के प्रबंधन पर चर्चा हुई। सरकार द्वारा कुछ वित्तीय प्रतिबद्धताओं की समीक्षा किए जाने की खबरों के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि महिला अनुदान योजना की किस्तों में देरी हो सकती है। हालाँकि,सरकार ने इन आशंकाओं को गलत साबित करते हुए भुगतान प्रक्रिया को नियमित बनाए रखा।

मई महीने की किस्त निर्धारित समय पर लाभार्थियों के खातों में पहुँचा दी गई थी। अब जून महीने की किस्त भी तय कार्यक्रम के अनुसार 15 तारीख को ट्रांसफर कर दी गई है। यह विजय सरकार के सत्ता सँभालने के बाद लगातार दूसरी बार है,जब इस योजना के तहत समय पर भुगतान किया गया है। इससे यह संकेत मिला है कि सरकार फिलहाल मौजूदा योजना को पूरी तरह जारी रखने के पक्ष में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सरकार के लिए चुनावी वादों और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होती है। तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में जहाँ सामाजिक कल्याण योजनाओं का व्यापक नेटवर्क मौजूद है,वहाँ नई योजनाओं को लागू करने के साथ-साथ पुरानी योजनाओं को बनाए रखना वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है। ऐसे में विजय सरकार की रणनीति यह दिखाई देती है कि पहले मौजूदा लाभार्थियों को प्रभावित किए बिना नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाए।

राज्यभर में इस योजना का लाभ उठा रही महिलाओं ने जून की किस्त समय पर मिलने का स्वागत किया है। कई लाभार्थियों का कहना है कि यह सहायता राशि उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं,बल्कि वित्तीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। बढ़ती महँगाई और घरेलू खर्चों के बीच यह राशि उनके परिवारों को सहारा प्रदान करती है और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए इस योजना का महत्व और भी अधिक है। वहाँ रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण मासिक सहायता राशि परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है। शहरी क्षेत्रों में भी कई महिलाएँ इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई,चिकित्सा खर्च और घरेलू जरूरतों के लिए करती हैं।

फिलहाल जून की किस्त के समय पर जारी होने से यह संदेश गया है कि राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण संबंधी कार्यक्रमों को लेकर गंभीर है। हालाँकि,जनता की नजरें अब उन बड़े चुनावी वादों पर भी टिकी हुई हैं,जिनमें महिलाओं के लिए 2,500 रुपये मासिक सहायता और अन्य सामाजिक योजनाएँ शामिल हैं। आने वाले महीनों में सरकार इन वादों को किस तरह लागू करती है,यह राज्य की राजनीति और सामाजिक कल्याण व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ‘कलैगनार महिला अधिकार अनुदान योजना’ जारी है और लाखों महिलाओं को इसका लाभ मिलता रहेगा। जून की किस्त का समय पर हस्तांतरण न केवल आर्थिक राहत लेकर आया है,बल्कि इसने लाभार्थियों के बीच विश्वास भी मजबूत किया है कि सरकार उनकी जरूरतों और अपेक्षाओं को समझते हुए आगे बढ़ रही है।