टेलीग्राम (तस्वीर क्रेडिट@singhkaptan291)

नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर शिकंजा,गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया ऐप,एप्पल ऐप स्टोर पर अब भी उपलब्ध

नई दिल्ली,17 जून (युआईटीवी)- नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सरकार के अस्थायी प्रतिबंध के फैसले के बाद लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को भारत में गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। इसके चलते एंड्रॉएड स्मार्टफोन उपयोगकर्ता फिलहाल गूगल के आधिकारिक ऐप स्टोर के माध्यम से टेलीग्राम डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है,जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और अन्य सरकारी एजेंसियाँ परीक्षा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े,गलत सूचना फैलाने वाले नेटवर्क और नकल से जुड़े संगठित गिरोहों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 पुनर्परीक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हाल के दिनों में कई ऐसे टेलीग्राम चैनल,समूह और स्वचालित बॉट सामने आए थे,जिन पर परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे थे। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इनमें से बड़ी संख्या में दावे भ्रामक थे और छात्रों को आर्थिक रूप से ठगने के उद्देश्य से किए जा रहे थे।

हालाँकि,टेलीग्राम को गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है,लेकिन यह अभी भी एप्पल के ऐप स्टोर पर उपलब्ध है। इससे संकेत मिलता है कि यह कदम फिलहाल सीमित और अस्थायी प्रकृति का है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी लोकप्रिय संचार मंच को स्थायी रूप से बंद करना नहीं,बल्कि परीक्षा के दौरान होने वाली संभावित गड़बड़ियों को रोकना है।

यह घटनाक्रम उस निर्णय के बाद सामने आया है,जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार,यह अवधि परीक्षा के दिन और उसके तुरंत बाद तक लागू रहेगी,ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह,भ्रामक सूचना या नकल से जुड़े प्रयासों को रोका जा सके।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का कहना है कि हाल के महीनों में कुछ टेलीग्राम चैनलों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावे किए थे। कई मामलों में छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम लेकर कथित पेपर लीक उपलब्ध कराने का लालच दिया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार,जाँच में पाया गया कि ऐसे अधिकांश दावे झूठे और धोखाधड़ी से जुड़े थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इन दावों से प्रभावित हो रहे थे,जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता था।

सरकार और एजेंसियों की चिंता का एक बड़ा कारण टेलीग्राम का संदेश संपादन फीचर भी बना। अधिकारियों के अनुसार,इस सुविधा का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया था। जाँच में पाया गया कि कुछ लोग पुराने संदेशों को बाद में संपादित कर उनमें नई फाइलें जोड़ देते थे,जबकि मूल संदेश का समय वही बना रहता था। इससे ऐसा भ्रम पैदा किया जा सकता था कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या उससे संबंधित सामग्री साझा की गई थी। इसी वजह से टेलीग्राम को भारत में 30 जून तक अपने संदेश संपादन फीचर को बंद रखने का निर्देश भी दिया गया है।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि नीट (यूजी) 2026 का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। एजेंसी का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे पूरी तरह भ्रामक थे और उनका उद्देश्य छात्रों को गुमराह करना था। अधिकारियों के अनुसार,जब केवल कुछ चैनलों या समूहों को हटाने जैसी सीमित कार्रवाई पर्याप्त नहीं लगी,तब व्यापक और अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।

इस पूरे अभियान में गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एजेंसी ने राज्य पुलिस बलों,साइबर विशेषज्ञों और अन्य केंद्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर उन नेटवर्कों की पहचान की,जो कथित रूप से परीक्षा से जुड़े फर्जीवाड़े में शामिल थे। विभिन्न राज्यों में कई संदिग्ध चैनलों,समूहों और ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी की गई तथा उनके खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की गई।

देश के कई हिस्सों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित कथित परीक्षा घोटालों की स्वतंत्र जाँच भी शुरू की है। कुछ मामलों में ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया है,जो छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने या परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के नाम पर पैसे माँग रहे थे। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इस प्रकार के संगठित नेटवर्क केवल आर्थिक ठगी ही नहीं करते,बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करते हैं।

इस बीच,टेलीग्राम के अस्थायी प्रतिबंध को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं। बड़ी संख्या में छात्र और पेशेवर लोग इस मंच का उपयोग पढ़ाई,कामकाज और व्यक्तिगत संवाद के लिए करते हैं। ऐसे उपयोगकर्ताओं को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि,सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी कारण यह कदम उठाना आवश्यक समझा गया।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट,चैनल या समूह द्वारा किए जा रहे प्रश्नपत्र लीक अथवा परीक्षा से संबंधित अन्य दावों के झांसे में न आएँ। एजेंसी ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है,तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए।

नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। सरकार का कहना है कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में आयोजित की जाएगी और इसके लिए सभी आवश्यक तकनीकी तथा सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। ऐसे में टेलीग्राम पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।