नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कार्गो संचालन शुरू (तस्वीर क्रेडिट@IndianTrendsHub)

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने रचा नया इतिहास,पहली कार्गो उड़ान के साथ उत्तर प्रदेश के विकास को मिली नई उड़ान,चेन्नई से पहली मालवाहक उड़ान पहुंची

ग्रेटर नोएडा,17 जून (युआईटीवी)- उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। घरेलू कार्गो संचालन की औपचारिक शुरुआत के साथ ही यह एयरपोर्ट अब केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहा,बल्कि देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चेन्नई से आई पहली मालवाहक उड़ान के जेवर स्थित एयरपोर्ट पर उतरते ही एक नए युग की शुरुआत का संकेत मिल गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विमान का पारंपरिक वाटर कैनन सैल्यूट के साथ स्वागत किया गया,जिसने इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया।

चेन्नई से उड़ान भरकर पहुँचा बोइंग 737-800 एफ विमान लगभग 20 टन मिश्रित कार्गो लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुँचा। इस कार्गो में मोबाइल फोन,इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद,ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स,खाद्य सामग्री और विभिन्न प्रकार के कंसोलिडेशन शिपमेंट शामिल थे। विमान के उतरते ही कार्गो अनलोडिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई और इसके साथ ही एयरपोर्ट पर लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का नया अध्याय भी आरंभ हो गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद विमान वापस चेन्नई के लिए रवाना होगा।

इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से राज्य को एक ऐसे आधुनिक कार्गो हब की आवश्यकता महसूस की जा रही थी,जो औद्योगिक उत्पादन और निर्यात गतिविधियों को नई गति प्रदान कर सके। अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक मजबूत आधार बनकर उभर रहा है।

एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यहाँ 87 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल विकसित किया गया है,जिसका संचालन एआईएसएटीएस द्वारा किया जाएगा। यह टर्मिनल आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है,जिससे माल की लोडिंग,अनलोडिंग और भंडारण की प्रक्रियाएँ अधिक तेज और प्रभावी बन सकेंगी। इससे कारोबारियों और उद्योगों को समय और लागत दोनों की बचत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं,बल्कि पूरे उत्तरी भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। फार्मास्यूटिकल्स,इलेक्ट्रॉनिक्स,कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। विशेष रूप से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए यह एयरपोर्ट नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि देश में बनने वाले लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन का उत्पादन नोएडा क्षेत्र में होता है। अब तक इन उत्पादों को विभिन्न हवाई अड्डों और परिवहन माध्यमों के जरिए निर्यात के लिए भेजा जाता था,जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते थे,लेकिन अब कार्गो हब की सुविधा मिलने से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुँचने में बड़ी सुविधा मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।

कार्गो संचालन की शुरुआत के साथ ही विभिन्न राज्यों से आने वाले उत्पादों की आवाजाही भी तेज हो गई है। उदाहरण के तौर पर पठानकोट से लाई गई ताजा लीची के साथ-साथ चिकित्सा उपकरण और ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़े मोबाइल उत्पादों को यहाँ से बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में भेजा जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि एयरपोर्ट केवल एक क्षेत्रीय सुविधा नहीं रहेगा,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर माल परिवहन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी एकीकृत कार्गो व्यवस्था है। यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट माना जा रहा है,जहाँ आयात और निर्यात दोनों प्रकार की सुविधाओं को आपस में जोड़ा गया है। इससे माल के आवागमन की प्रक्रिया अधिक सहज और तेज होगी। व्यापारिक संस्थानों को अलग-अलग व्यवस्थाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा,जिससे समय की बचत होगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

एयरपोर्ट को भविष्य में एक मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसका अर्थ है कि यह केवल हवाई परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि सड़क और रेल नेटवर्क से भी पूरी तरह जुड़ा होगा। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में यह देश का पहला ऐसा बड़ा कार्गो केंद्र बन सकता है,जहाँ रेलवे नेटवर्क की सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से माल को एयरपोर्ट तक पहुँचाना और अधिक आसान हो जाएगा।

कार्गो संचालन की शुरुआत को अंतर्राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में पहला कदम भी माना जा रहा है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले छह महीनों के भीतर यहाँ से अंतर्राष्ट्रीय कार्गो उड़ानें भी शुरू हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश के उत्पाद सीधे दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुँच सकेंगे,जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

एयरपोर्ट के आसपास विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक सिटी,एमएसएमई पार्क,हैंडीक्राफ्ट पार्क,टॉय पार्क, अपैरल क्लस्टर,मेडिकल पार्क और सेमीकंडक्टर पार्क जैसी परियोजनाएँ एयरपोर्ट से बेहद कम दूरी पर विकसित की जा रही हैं। इन सभी औद्योगिक केंद्रों को एयरपोर्ट की निकटता का सीधा फायदा मिलेगा और उत्पादन से लेकर निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।

करीब 39 हजार करोड़ रुपये के निवेश से विकसित की जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला चरण तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में एक रनवे संचालित है,जबकि दूसरा रनवे निर्माणाधीन है। भविष्य की योजना के तहत यहाँ कुल पाँच रनवे विकसित किए जाएँगे। परियोजना पूरी होने के बाद एयरपोर्ट की क्षमता बढ़कर प्रतिवर्ष 225 मिलियन यात्रियों तक पहुँचने की संभावना है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता लगभग 70 मिलियन यात्रियों की होगी।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना को भी इससे नई ताकत मिलेगी। खुर्जा की प्रसिद्ध पॉटरी,अलीगढ़ के ताले,नोएडा के वस्त्र उत्पाद और प्रदेश के अन्य पारंपरिक उत्पाद अब अधिक तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच सकेंगे।

कुल मिलाकर पहली कार्गो उड़ान का आगमन केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं है,बल्कि यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति,औद्योगिक विकास और वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट न केवल राज्य,बल्कि पूरे देश के लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्र की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।