तेहरान,17 जून (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच वर्षों से चले आ रहे तनाव, टकराव और सैन्य संघर्ष के बाद अब दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आता दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले दोनों देशों ने युद्ध समाप्ति और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच अंतिम शांति समझौते को लेकर बातचीत का नया और निर्णायक दौर शुक्रवार से शुरू होगा। इस घोषणा को मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ आयोजित एक विशेष बैठक में सैयद अब्बास अराघची ने इस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कई सप्ताह तक चली गहन वार्ताओं के बाद ईरान और अमेरिका युद्ध समाप्ति संबंधी एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। इस समझौते पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है,जिसके बाद दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
अराघची ने कहा कि हाल के महीनों में क्षेत्रीय हालात काफी जटिल हो गए थे। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों तथा उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को गंभीर संकट की स्थिति में पहुँचा दिया था। ऐसे हालात में बातचीत की राह आसान नहीं थी,लेकिन सभी पक्षों ने संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी समाधान तलाशने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे।
ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार,दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता को दो अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण का उद्देश्य तत्काल युद्धविराम और संघर्ष से जुड़े प्रमुख मुद्दों का समाधान निकालना है। इसी चरण के अंतर्गत युद्ध समाप्ति से संबंधित समझौता ज्ञापन तैयार किया गया है। इस समझौते में कई संवेदनशील और रणनीतिक विषयों को शामिल किया गया है,जिनका सीधा संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से है।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी,विदेशों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों की वापसी तथा युद्ध के कारण हुए नुकसान के पुनर्निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाई गई है। इन विषयों पर समझौता होना दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अराघची ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युद्ध समाप्ति की औपचारिक घोषणा है। उनके अनुसार,समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सोमवार सुबह युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी गई थी। हालाँकि,समझौता ज्ञापन शुक्रवार से औपचारिक रूप से लागू होगा और उसी दिन इसके कानूनी तथा राजनीतिक प्रभाव पूरी तरह से प्रभावी हो जाएँगे।
दूसरे चरण की बातचीत और भी अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस चरण में अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों और ईरान पर लगाए गए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने जैसे जटिल विषयों पर चर्चा की जाएगी। लंबे समय से ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ उसके विवाद का प्रमुख कारण रहा है। ऐसे में इन मुद्दों पर प्रगति होने से दोनों देशों के रिश्तों में व्यापक सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि दूसरे चरण की वार्ता केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होगी,बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले हफ्तों में सकारात्मक परिणाम सामने आएँगे और दोनों पक्ष पारस्परिक सम्मान तथा समानता के आधार पर आगे बढ़ेंगे।
इस शांति प्रक्रिया में लेबनान का मुद्दा भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अराघची ने स्पष्ट किया कि समझौते में लेबनान की स्थिति को भी शामिल किया गया है। उनके अनुसार,लेबनान में संघर्ष की समाप्ति और वहां से इजरायली सेना की वापसी इस व्यापक शांति प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब तक कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों से इजरायली सैनिक पूरी तरह वापस नहीं लौटते,तब तक युद्ध की समाप्ति को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में लेबनान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या वहां इजरायली सैन्य उपस्थिति बनाए रखना शांति समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। यह बयान संकेत देता है कि ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है और वह केवल अपने तथा अमेरिका के बीच संबंध सुधारने तक सीमित नहीं रहना चाहता।
जानकारों का मानना है कि इस समझौते की सफलता पूरे मध्य पूर्व में तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पिछले कई वर्षों से यह क्षेत्र युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी समझौता होता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव ऊर्जा बाजारों,वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका,पाकिस्तान और ईरान ने सोमवार को कई सप्ताह तक चली वार्ताओं के बाद युद्ध समाप्ति संबंधी समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। इस प्रक्रिया में विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की तैयारी चल रही है।
गौरतलब है कि इसी वर्ष 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान सहित कई ईरानी शहरों पर संयुक्त सैन्य हमले किए थे। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था। जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और गहरा गया था तथा व्यापक युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी।
हालाँकि,अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। कूटनीतिक प्रयासों और निरंतर वार्ताओं के परिणामस्वरूप संघर्ष की जगह संवाद ने ले ली है। शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर केवल एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर भर नहीं होंगे,बल्कि उन्हें मध्य पूर्व में शांति, स्थिरता और नए राजनीतिक समीकरणों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में दशकों पुराने तनाव को स्थायी रूप से समाप्त करने का रास्ता खुल पाता है।
