कोलकाता,25 जून (युआईटीवी)- कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन वेयरहाउस की छत गिरने से हुए भीषण हादसे ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर कर रख दिया है। पी2 ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित निर्माण स्थल पर हुई इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है,जबकि कई घायल मजदूर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हादसे के बाद से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है,लेकिन आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कुछ मजदूर मलबे के नीचे फँसे हो सकते हैं। प्रशासन,सेना,राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और अन्य एजेंसियाँ युद्धस्तर पर अभियान चला रही हैं,ताकि किसी भी फँसे हुए व्यक्ति को जल्द-से-जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार,दुर्घटना में घायल हुए बीस मजदूरों का इलाज कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि घायलों में से दो मजदूरों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अन्य घायलों को भी आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। अस्पताल परिसर में मजदूरों के परिजन बड़ी संख्या में मौजूद हैं और अपने प्रियजनों की स्थिति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
बचाव दलों का मानना है कि मलबे के नीचे अभी भी तीन से चार मजदूर दबे हो सकते हैं। इसी कारण घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान को और तेज कर दिया गया है। रडार प्रणाली,आधुनिक खोज उपकरणों और प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे के भीतर जीवन के संकेत तलाशे जा रहे हैं। राहतकर्मी लगातार भारी कंक्रीट और लोहे के ढाँचे को हटाने में जुटे हुए हैं। अभियान में भारतीय सेना,राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,राज्य अग्निशमन विभाग,कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन इकाई और कोलकाता नगर निगम की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।
यह हादसा बुधवार दोपहर उस समय हुआ जब निर्माणाधीन वेयरहाउस के अंदर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,अचानक जोरदार आवाज के साथ छत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। घटना इतनी अचानक हुई कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा परिसर धूल और मलबे से भर गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में फँसे मजदूरों को निकालने का प्रयास किया। बाद में पुलिस और राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुँचीं और संगठित बचाव अभियान शुरू किया गया।
दुर्घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। शुरुआती जाँच में निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े लोग,ठेकेदार,श्रमिक आपूर्ति से जुड़े व्यक्ति और निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया में कथित रूप से मध्यस्थता करने वाले लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच अभी शुरुआती चरण में है और यदि आगे की जाँच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है,तो अतिरिक्त गिरफ्तारियाँ भी की जा सकती हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने एक विशेष जाँच दल का गठन किया है। इस दल का नेतृत्व पुलिस के जासूसी विभाग के उप पुलिस आयुक्त कर रहे हैं। जाँच दल में कई वरिष्ठ अधिकारी और अनुभवी अन्वेषक शामिल किए गए हैं,जिन्हें निर्माण स्थल के तकनीकी पहलुओं,दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया की गहराई से जाँच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेष जाँच दल यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं तथा क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।
प्रारंभिक जाँच में कुछ गंभीर सवाल सामने आए हैं। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या निर्माणाधीन संरचना में निर्धारित मानकों से अलग सामग्री का उपयोग किया गया था। कुछ आरोप यह भी हैं कि कंक्रीट की छत के नीचे टिन की चादरों का इस्तेमाल किया गया था,जिससे पूरी संरचना की मजबूती प्रभावित हो सकती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह निर्माण क्षेत्र में गंभीर लापरवाही का मामला माना जाएगा।
दुर्घटना के बाद राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट माँगी और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री एसएसकेएम अस्पताल भी पहुँचे,जहाँ उन्होंने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी से निर्माण योजना और क्रियान्वयन में गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी साबित होती है,तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष और व्यापक जाँच सुनिश्चित करेगी,ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
इस दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय भी लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत चल रही सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं का काम 31 जुलाई तक रोक दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस अवधि के दौरान सभी परियोजनाओं की सुरक्षा और वैधता की जाँच की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थलों की बिल्डिंग योजना,साइट प्लान और वास्तविक स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञ टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक परियोजना का तकनीकी मूल्यांकन करें और यह सुनिश्चित करें कि निर्माण कार्य निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है। जिन परियोजनाओं के दस्तावेज और निर्माण प्रक्रिया सही पाई जाएगी,उन्हें 1 अगस्त से दोबारा काम शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। महानगरों में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों के बीच अक्सर श्रमिकों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। ऐसे मामलों में यदि नियमों की अनदेखी होती है,तो उसके परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं। तारातला की यह घटना इसी बात का उदाहरण बनकर सामने आई है।
इस हादसे ने मजदूरों की कार्य परिस्थितियों को लेकर भी बहस छेड़ दी है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूर अक्सर जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं और कई बार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए जाते। उन्होंने माँग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच के साथ-साथ भविष्य में श्रमिक सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएँ।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है,जबकि घायलों के परिजन अस्पतालों के बाहर उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं। राहत दलों की प्राथमिकता अभी भी मलबे में फँसे संभावित मजदूरों को ढूँढ़ना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी,यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक हादसे के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल पूरा राज्य उन मजदूरों के लिए प्रार्थना कर रहा है जो अभी भी जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन परिवारों के साथ खड़ा है,जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खो दिया है।
