नई दिल्ली,25 जून (युआईटीवी)- दिल्ली से अमृतसर जा रही एयर इंडिया की एक उड़ान के कुछ समय के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की घटना ने विमानन क्षेत्र में चर्चा पैदा कर दी है। हालाँकि,भारत के नागरिक उड्डयन नियामक महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि पूरी स्थिति को स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सँभाला गया और पाकिस्तान के एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए विमान को सुरक्षित रूप से वापस भारत लाया गया। नियामक संस्था ने कहा है कि घटना के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही और विमान को बिना किसी जोखिम के दिल्ली में सुरक्षित उतार लिया गया।
यह मामला 22 जून का है,जब एयर इंडिया की उड़ान एआई-479 दिल्ली से अमृतसर के लिए रवाना हुई थी। उड़ान सामान्य रूप से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी और निर्धारित समय के अनुसार अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान अमृतसर हवाई अड्डे पर एक पक्षी के रनवे के आसपास टकराने की घटना सामने आई,जिसके बाद सुरक्षा कारणों से रनवे का निरीक्षण आवश्यक हो गया। विमान को तत्काल उतरने की अनुमति देने के बजाय कुछ समय तक हवा में चक्कर लगाने के लिए कहा गया,ताकि रनवे की स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहाँ विमान का उतरना पूरी तरह सुरक्षित हो।
महानिदेशालय द्वारा जारी बयान के अनुसार उड़ान का संचालन एयरबस ए-321 विमान द्वारा किया जा रहा था। जब विमान अमृतसर के ऊपर चक्कर लगा रहा था और उसे रडार की सहायता से दोबारा लैंडिंग के लिए निर्देशित किया जा रहा था,उसी दौरान वह कुछ समय के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति पूरी तरह नियंत्रित थी और इसकी जानकारी पाकिस्तान के एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों को दी गई थी। दोनों देशों के संबंधित नियंत्रण अधिकारियों के बीच आवश्यक समन्वय किया गया,जिसके कारण किसी प्रकार की सुरक्षा या परिचालन संबंधी समस्या उत्पन्न नहीं हुई।
बाद में परिस्थितियों का आकलन करने के बाद विमान को अमृतसर में उतारने के बजाय दिल्ली वापस लौटने का निर्देश दिया गया। चालक दल ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विमान को दिल्ली की ओर मोड़ा और विमान सुरक्षित रूप से राजधानी के हवाई अड्डे पर उतर गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की चोट या असुविधा की कोई गंभीर सूचना नहीं मिली।
एयर इंडिया ने भी इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी किया। एयरलाइन ने कहा कि अमृतसर में लैंडिंग के दौरान ‘गो-अराउंड’ प्रक्रिया अपनानी पड़ी थी। विमानन क्षेत्र में ‘गो-अराउंड’ उस स्थिति को कहा जाता है जब विमान अंतिम चरण में पहुँचने के बाद किसी कारणवश लैंडिंग रद्द कर देता है और दोबारा ऊँचाई लेकर नए निर्देशों का इंतजार करता है। एयर इंडिया ने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया के दौरान विमान थोड़ी दूरी तक पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में चला गया था।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि घटना की जानकारी नियामक अधिकारियों को दे दी गई है और इसकी आंतरिक जाँच शुरू कर दी गई है। कंपनी ने दोहराया कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी।
इस घटना ने इसलिए भी विशेष ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि वर्तमान में पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए बंद है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते पाकिस्तान ने भारतीय पंजीकरण वाले विमानों के अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध में नागरिक और सैन्य दोनों प्रकार के विमान शामिल हैं। तब से पाकिस्तान समय-समय पर इस प्रतिबंध की अवधि बढ़ाता रहा है।
भारत ने भी जवाबी कदम के रूप में पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग पर रोक लगा रखी है। दोनों देशों के बीच विमानन संबंधी यह प्रतिबंध क्षेत्रीय हवाई यातायात पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहा है। ऐसे माहौल में किसी भारतीय विमान का थोड़े समय के लिए भी पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया।
हाल ही में पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर लगाए गए प्रतिबंध को एक बार फिर बढ़ाते हुए 24 जुलाई तक लागू रखने की घोषणा की थी। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया था कि भारतीय नागरिक और सैन्य विमान निर्धारित अवधि तक पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इस निर्णय का सबसे अधिक असर भारतीय एयरलाइनों के अंतर्राष्ट्रीय परिचालन पर पड़ा है।
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण एयर इंडिया,इंडिगो और अन्य भारतीय एयरलाइनों को यूरोप,मध्य एशिया और उत्तरी अमेरिका के लिए अपनी उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े हैं। पहले जहाँ कई उड़ानें पाकिस्तान के ऊपर से होकर अपेक्षाकृत छोटे और सीधे मार्ग का उपयोग करती थीं,वहीं अब उन्हें लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। अधिकांश उड़ानों को अरब सागर के ऊपर से होकर संयुक्त अरब अमीरात,ओमान और अन्य क्षेत्रों के रास्ते आगे बढ़ना पड़ता है।
इन वैकल्पिक मार्गों के कारण उड़ानों की अवधि बढ़ गई है और एयरलाइनों की परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लंबी दूरी तय करने के लिए विमानों में अतिरिक्त ईंधन भरना पड़ता है,जिससे यात्रियों और कार्गो के लिए उपलब्ध क्षमता पर असर पड़ता है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन लागत बढ़ने से एयरलाइनों पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
इसके अलावा,लंबी उड़ान अवधि के कारण चालक दल के संचालन,विमान रखरखाव और समय-सारिणी प्रबंधन पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई मामलों में एयरलाइनों को उड़ानों के समय में बदलाव करना पड़ा है,जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित भी करना पड़ा। मध्य एशिया के कुछ गंतव्यों के लिए उड़ानों में कटौती इसी व्यापक परिचालन चुनौती का परिणाम मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने भी भारतीय एयरलाइनों की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। कुछ क्षेत्रों में हवाई मार्गों की उपलब्धता सीमित होने के कारण एयरलाइनों को लगातार अपने उड़ान मार्गों की समीक्षा करनी पड़ रही है। ऐसे समय में किसी भी असामान्य विमानन घटना को अत्यधिक गंभीरता से लिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया की इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि संबंधित अधिकारियों के बीच समय पर समन्वय स्थापित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार किसी भी हवाई क्षेत्र में प्रवेश या उसके निकट संचालन के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना आवश्यक होता है। इस मामले में भारतीय और पाकिस्तानी नियंत्रण अधिकारियों के बीच संवाद होने से स्थिति को बिना किसी जटिलता के संभाला जा सका।
फिलहाल महानिदेशालय और एयर इंडिया दोनों इस घटना की समीक्षा कर रहे हैं। जाँच के दौरान यह देखा जाएगा कि विमान के मार्ग,नियंत्रण निर्देशों और परिचालन प्रक्रियाओं में कौन-कौन से कारक शामिल थे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा और समन्वय के मानकों को और मजबूत बनाया जा सके।
हालाँकि,घटना ने कुछ समय के लिए चिंता जरूर पैदा की,लेकिन नियामक संस्था और एयरलाइन दोनों ने स्पष्ट किया है कि विमान,यात्री और चालक दल पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि जटिल और संवेदनशील परिस्थितियों में भी विमानन सुरक्षा प्रक्रियाएँ किस प्रकार प्रभावी ढंग से काम करती हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
