कोलकाता तारातला हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

कोलकाता तारातला हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 16, तीसरे दिन भी जारी राहत अभियान; निर्माण सामग्री पर उठे गंभीर सवाल

कोलकाता,27 जून (युआईटीवी)- कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से हुए भीषण हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार को कोलकाता पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल में उपचार के दौरान एक और घायल मजदूर ने दम तोड़ दिया,जिसके बाद मृतकों की संख्या 16 तक पहुँच गई। हादसे के तीन दिन बाद भी बचाव अभियान लगातार जारी है और राहत दल मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि मलबे के नीचे कितने लोग फँसे हो सकते हैं,क्योंकि निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों का कोई आधिकारिक उपस्थिति रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

बुधवार को तारातला क्षेत्र में निर्माणाधीन वेयरहाउस की छत अचानक भरभराकर गिर गई थी। हादसे के समय बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। छत गिरते ही भारी कंक्रीट,लोहे के बीम और निर्माण सामग्री के नीचे कई मजदूर दब गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन,पुलिस और आपदा राहत एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया। हालाँकि,मलबा काफी भारी होने और संरचना पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

शुक्रवार रात तक मृतकों की संख्या 15 बताई गई थी,लेकिन गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई। फिलहाल 14 घायल दक्षिण कोलकाता स्थित सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार कई घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों की टीम सभी घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में जुटी हुई है।

हादसे के तीसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान पूरी गति से जारी रहा। मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए विभिन्न एजेंसियाँ समन्वय के साथ काम कर रही हैं। रेलवे की तकनीकी टीम भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल है। भारतीय सेना,राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के विशेषज्ञ राहत अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। सभी एजेंसियाँ आधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों की मदद से मलबे को हटाने का प्रयास कर रही हैं,ताकि यदि कोई व्यक्ति अभी भी जीवित अवस्था में फंसा हो तो उसे जल्द-से-जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

राहत अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक प्लाज्मा कटिंग और ऑक्सी-कटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन मशीनों की सहायता से भारी लोहे के बीम और स्टील की संरचनाओं को काटकर हटाया जा रहा है,जिससे बचाव दल मलबे के भीतर तक पहुँच सके। इसके अलावा खोज अभियान में स्निफर डॉग्स और इन्फ्रारेड विक्टिम लोकेटर कैमरों का भी उपयोग किया जा रहा है। ये उपकरण मलबे के नीचे दबे लोगों की मौजूदगी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस बीच हादसे की जाँच भी तेजी से आगे बढ़ रही है। कोलकाता पुलिस की विशेष जाँच टीम ने शुरुआती जाँच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया है। प्रारंभिक जाँच के अनुसार निर्माणाधीन वेयरहाउस की छत गिरने के पीछे खराब गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री और गलत कास्टिंग पैटर्न प्रमुख कारण हो सकते हैं। जाँच अधिकारियों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया होता,तो संभवतः इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

जाँच एजेंसियाँ अब निर्माण कार्य से जुड़े सभी दस्तावेज,स्वीकृतियाँ,निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रियाओं की विस्तार से जाँच कर रही हैं। विशेषज्ञों की टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है,तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस जाँच के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण स्थल पर कार्यरत मजदूरों की वास्तविक संख्या का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि साइट के प्रबंधकों ने मजदूरों की उपस्थिति का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा था। पुलिस ने बताया कि जब प्रबंधन से उपस्थिति रजिस्टर या अन्य दस्तावेज मांगे गए तो वे उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसी वजह से यह अनुमान लगाना बेहद कठिन हो गया है कि हादसे के समय वहाँ कुल कितने मजदूर मौजूद थे और अभी भी मलबे के नीचे कितने लोगों के दबे होने की आशंका है।

इस हादसे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के मजदूर प्रकोष्ठ ने इस मामले में कोलकाता नगर निगम के पूर्व महापौर और पूर्व नगर मामलों एवं शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के दो पार्षद अनवर खान और शम्स इकबाल के खिलाफ तारातला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की अनदेखी की गई,जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। हालाँकि,इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जाँच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी पहलुओं की गहन जाँच होगी। यदि किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय होती है,तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस निर्माण एजेंसी, ठेकेदार,इंजीनियरों और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों से भी लगातार पूछताछ कर रही है।

तारातला का यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण के दौरान गुणवत्ता,तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए,तो ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर राहत अभियान और जाँच पर टिकी हुई है। मृतकों के परिजनों को न्याय दिलाने और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जाँच एजेंसियाँ लगातार काम कर रही हैं। वहीं मलबे में फँसे लोगों की तलाश तब तक जारी रहेगी,जब तक बचाव दल पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते कि घटनास्थल पर कोई और व्यक्ति फँसा हुआ नहीं है।