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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर बढ़ा, स्वर्ण भंडार में जोरदार उछाल; आरबीआई के कदम से एनआरआई निवेश को मिलेगा बढ़ावा

मुंबई,27 जून (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 19 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुँच गया। पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट के बाद यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत की आर्थिक स्थिरता को मजबूती प्रदान करता है और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच देश की स्थिति को अधिक सुरक्षित बनाता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आँकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा योगदान स्वर्ण भंडार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का रहा। समीक्षा अवधि के दौरान देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.930 अरब डॉलर हो गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में बदलाव और स्वर्ण परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के कारण यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वर्ण भंडार में वृद्धि को विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है,क्योंकि यह देश की कुल आरक्षित संपत्तियों को और मजबूत बनाता है।

हालाँकि,इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स होल्डिंग में मामूली कमी दर्ज की गई। यह 5.2 करोड़ डॉलर घटकर 18.647 अरब डॉलर रह गई। इसके बावजूद कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ा और समग्र स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि दर्ज की गई।

इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली थी। उस समय अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा था। हालाँकि,ताजा आँकड़ों ने यह संकेत दिया है कि भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही है और पिछले सप्ताह की गिरावट की भरपाई काफी हद तक हो गई है।

हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडारों में शामिल बना हुआ है। हालाँकि,यह अभी भी 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में दर्ज किए गए 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे है। उस समय भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार दर्ज किया था। इसके बाद वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों,डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों के कारण भंडार में कुछ कमी देखने को मिली।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा। उस दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने और रुपए पर दबाव आने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने रुपए की अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री की,जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर कुछ दबाव पड़ा। हालाँकि,इस तरह का हस्तक्षेप किसी भी केंद्रीय बैंक की सामान्य रणनीति का हिस्सा माना जाता है,जिसका उद्देश्य मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना होता है।

इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमा से जुड़े परिचालन पहलुओं पर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय बैंक का यह कदम उन सवालों के जवाब में आया है,जो बैंकों की ओर से विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमा जुटाने और उससे संबंधित ऋण सुविधाओं को लेकर उठाए गए थे। इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य बैंकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना और विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।

रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक खाताधारकों को ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। इसके साथ ही इन जमाओं पर लियन यानी गिरवी अधिकार भी बनाया जा सकता है। इस फैसले से बैंकों को अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा जुटाने में अधिक परिचालन लचीलापन मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे बैंकिंग क्षेत्र को विदेशी मुद्रा संसाधन जुटाने में सुविधा होगी और अनिवासी भारतीयों का भरोसा भी मजबूत होगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बैंक विशेष योजना के तहत कम से कम तीन वर्ष की मूल अवधि वाली नई और पात्र विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमाएँ जुटाते हैं,तो उन्हें तीन वर्ष से कम अवधि वाले विदेशी मुद्रा स्वैप करने की भी अनुमति होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन में अधिक लचीलापन प्रदान करना है,ताकि वे बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बना सकें।

इस योजना के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों को साधारण खरीद-बिक्री आधारित विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह सुविधा केवल जमा की मूल राशि पर लागू होगी और इसमें ब्याज की राशि को शामिल नहीं किया जाएगा। इससे बैंकों को विदेशी मुद्रा जोखिम का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी और विदेशी मुद्रा संसाधनों के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी इन परिचालन स्पष्टताओं का सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में दिखाई दे सकता है। उनका कहना है कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमा पर बढ़ी हुई ब्याज दरें,स्वैप सुविधा और नियमों में स्पष्टता अनिवासी भारतीयों को भारत में अधिक विदेशी मुद्रा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने की संभावना है,जो विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इससे न केवल आयात भुगतान की क्षमता मजबूत होती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट या वित्तीय अस्थिरता के समय भी अर्थव्यवस्था को सुरक्षा मिलती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है और रुपए की स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है।

वर्तमान परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा भंडार में हुई बढ़ोतरी और भारतीय रिजर्व बैंक की नई परिचालन स्पष्टताओं को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आने वाले सप्ताहों में अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा में अपेक्षित वृद्धि होती है और वैश्विक परिस्थितियाँ अनुकूल रहती हैं,तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर नए उच्च स्तर की ओर बढ़ सकता है। इससे देश की वित्तीय स्थिरता,निवेशकों का विश्वास और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।