सिया गोयल और चेतन (तस्वीर क्रेडिट@HateDetectors)

केतन अग्रवाल हत्याकांड में आज कोर्ट में पेश होंगे दोनों आरोपी,पुलिस दोबारा रिमांड की कर सकती है माँग

पुणे,29 जून (युआईटीवी)- पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जाँच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस बहुचर्चित मामले में गिरफ्तार आरोपी सिया गोयल और चेतन को सोमवार को वडगांव की अदालत में पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, जाँच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं तक पहुँचनी बाकी है,इसलिए पुलिस दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड दोबारा बढ़ाने की माँग कर सकती है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि मामले से जुड़े कई अहम तथ्य अभी सामने आने बाकी हैं और इसके लिए आरोपियों से और पूछताछ आवश्यक है।

फिलहाल दोनों आरोपियों को वडगांव पुलिस स्टेशन के लॉकअप में रखा गया है। पुलिस की ओर से पूछताछ के लिए उन्हें समय-समय पर लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन ले जाया जाता है, जहाँ जाँच अधिकारी उनसे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों को फिर वडगांव पुलिस स्टेशन के लॉकअप में वापस लाया जाता है। सोमवार को उनकी मौजूदा पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ आगे की हिरासत को लेकर फैसला होगा।

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पुलिस अभी तक जुटाए गए साक्ष्यों का मिलान आरोपियों के बयानों से कर रही है। इसी कारण पुलिस का प्रयास होगा कि अदालत से कुछ और दिनों की पुलिस रिमांड हासिल की जाए,ताकि जाँच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों,कॉल रिकॉर्ड,इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और घटनास्थल से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की जाँच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

दूसरी ओर,सिया गोयल की ओर से उनके अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने पुलिस रिमांड बढ़ाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल ने जाँच में पूरा सहयोग किया है और पुलिस द्वारा पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए हैं। उनका कहना है कि पुलिस को पर्याप्त समय मिल चुका है और अब आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए।

आशुतोष श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी प्राथमिक कोशिश यही रहेगी कि अदालत पुलिस हिरासत को आगे न बढ़ाए। उनके अनुसार,आरोपी ने जाँच में किसी भी स्तर पर सहयोग करने से इनकार नहीं किया है। परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं और पुलिस को आवश्यक पूछताछ का पर्याप्त अवसर मिल चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मुवक्किल की उम्र केवल 20 वर्ष है और अदालत इस मानवीय पहलू पर भी विचार करेगी। उनका विश्वास है कि न्यायालय अब पुलिस हिरासत बढ़ाने के बजाय न्यायिक हिरासत का विकल्प चुन सकता है।

बचाव पक्ष का यह भी कहना है कि अब तक सामने आए तथ्यों से हत्या के आरोप की सीधी पुष्टि नहीं होती। अधिवक्ता के अनुसार,जाँच में अभी तक ऐसा कोई ठोस बयान या प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है,जो प्रथम दृष्टया हत्या की साजिश या अपराध में उनकी मुवक्किल की भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करता हो। उन्होंने कहा कि फिलहाल संदेह के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं,जबकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले निष्पक्ष जाँच और विधिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

सिया गोयल के वकील ने एक और महत्वपूर्ण तर्क देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार,यदि कोई व्यक्ति वास्तव में किसी की हत्या की योजना बना रहा हो,तो यह तर्कसंगत नहीं लगता कि वह कथित पीड़ित को एक ही स्थान पर बार-बार लेकर जाए। उन्होंने कहा कि यह परिस्थितियाँ अभियोजन पक्ष के दावों पर संदेह पैदा करती हैं और इन्हें अदालत में विस्तार से रखा जाएगा।

हालाँकि,जाँच एजेंसियों का दावा इससे अलग है। सूत्रों के अनुसार,पुलिस ने अब तक कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें मोबाइल फोन,इलेक्ट्रॉनिक डाटा, डिजिटल संचार और अन्य तकनीकी जानकारियाँ शामिल हैं,जिनकी फोरेंसिक जाँच की जा रही है। जाँच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि घटना से पहले,घटना के दौरान और उसके बाद आरोपियों की गतिविधियाँ क्या थीं तथा क्या उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य अभियोजन के दावों की पुष्टि करते हैं।

जाँच के दौरान पुलिस ने उस स्थान पर घटनाक्रम का सीन रिक्रिएशन भी कराया है, जहाँ केतन अग्रवाल की हत्या हुई थी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य घटना के क्रम,आरोपियों की गतिविधियों और उपलब्ध साक्ष्यों का आपसी मिलान करना था। अधिकारियों का मानना है कि घटनास्थल पर किए गए पुनर्निर्माण से जाँच को कई महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं,जिनका विश्लेषण अभी जारी है।

यह मामला सामने आने के बाद से ही लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक प्रमुख कारोबारी की हत्या और उससे जुड़े घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस इस मामले को केवल प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर नहीं,बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी जाँच के जरिए भी आगे बढ़ा रही है,ताकि अदालत में मजबूत और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

जाँच एजेंसियों का कहना है कि वे मामले के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जाँच कर रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। वहीं बचाव पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि आरोपों को अभी तक प्रमाणित नहीं किया जा सका है और जाँच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

अब इस मामले में सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि पुलिस को आगे पूछताछ के लिए दोनों आरोपियों की रिमांड दोबारा दी जाए या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। इस फैसले का असर न केवल जाँच की दिशा पर पड़ेगा,बल्कि आगे की कानूनी प्रक्रिया भी उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।