विक्टोरिया (सेशेल्स),30 जून (युआईटीवी)- भारत और सेशेल्स के संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा,सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में भारत की सक्रिय भूमिका को मान्यता देते हुए सेशेल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ प्रदान किया है। यह सम्मान पहली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय नेता को दिया गया है,जिससे इसकी विशेषता और महत्व और भी बढ़ जाता है। इस सम्मान को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने एक विशेष राजकीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदान किया। राष्ट्रपति कार्यालय ने इस अवसर को “प्रतीकात्मक और आत्मीय” बताते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति के योगदान का नहीं,बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच दशकों से चले आ रहे विश्वास,मित्रता और सहयोग का भी प्रतीक है।
यह सम्मान ऐसे समय प्रदान किया गया है जब भारत और सेशेल्स अपने राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इसी वर्ष सेशेल्स की आजादी के भी 50 वर्ष पूरे हुए हैं। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर दोनों देशों के बीच इस सम्मान का आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती और साझा भविष्य की दिशा में बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
सेशेल्स सरकार के अनुसार,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान उनके नेतृत्व में समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा,ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों तथा छोटे द्वीपीय देशों के हितों की लगातार वकालत करने के लिए दिया गया है। सरकार ने कहा कि भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सतत विकास के लिए जो दृष्टिकोण अपनाया है,उसने सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय देशों को नई आशा और भरोसा दिया है।
‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ केवल एक पारंपरिक पदक या अलंकरण नहीं है,बल्कि यह एक विशेष राष्ट्रपति सम्मान है। इसे उन व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है जिनके कार्यों ने समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग,पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस सम्मान का उद्देश्य ऐसे वैश्विक नेतृत्व को पहचान देना है,जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
सेशेल्स सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सम्मान प्रणाली हाल ही में किए गए महत्वपूर्ण विधायी सुधारों के बाद अस्तित्व में आई है। पाँच जून को प्रकाशित सेशेल्स नेशन की रिपोर्ट के अनुसार,इस वर्ष की शुरुआत में सेशेल्स की संसद ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्रणाली में व्यापक बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय पुरस्कार (निरसन) विधेयक 2026’ पारित किया। इस कानून के तहत पहले से लागू राष्ट्रीय पुरस्कार व्यवस्था और ‘मेडल ऑफ द रिपब्लिक’ को समाप्त कर दिया गया।
संसद में इस विधेयक के पक्ष में यूनाइटेड सेशेल्स के 17 सदस्यों ने मतदान किया,जबकि लिनीओन डेमोक्रेटिक सेसेल्वा के 14 सदस्यों ने इसका विरोध किया। मतदान के दौरान कोई भी सदस्य अनुपस्थित नहीं रहा। इस विधायी बदलाव के बाद देश ने नई सम्मान प्रणाली लागू की,जिसके अंतर्गत ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ को सर्वोच्च राष्ट्रपति सम्मान के रूप में स्थापित किया गया।
इससे पहले वर्ष 2022 में बनाई गई पुरस्कार प्रणाली के तहत राष्ट्रपति को स्वतः सम्मान देने का प्रावधान था। हालाँकि,समय के साथ इस व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता संबंधी सवाल उठने लगे थे। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुराने कानून को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की। हालाँकि,पहले दिए गए सभी राष्ट्रीय पुरस्कारों की वैधता को बरकरार रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस नई सम्मान प्रणाली के तहत पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्तकर्ता बनाया जाना भारत और सेशेल्स के बीच विशेष संबंधों को दर्शाता है। यह निर्णय इस बात का भी संकेत है कि सेशेल्स भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में देखता है।
सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं,बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत और सेशेल्स के बीच पिछले 50 वर्षों में विकसित हुए विश्वास,सहयोग और गहरी मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं,बल्कि साझा मूल्यों,समान समुद्री विरासत और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स दोनों का साझा घर है। इसकी सुरक्षा, समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समुद्र केवल व्यापार और संपर्क का माध्यम नहीं,बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका,जैव विविधता और वैश्विक पर्यावरणीय संतुलन का आधार भी है। इसलिए समुद्री संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग और उनका संरक्षण पूरी दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली को बढ़ावा देना है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना से जुड़ी पहलों का भी जिक्र किया और कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा,पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। भारत ने समुद्री सुरक्षा,मानवीय सहायता,आपदा राहत,समुद्री डकैती से निपटने,समुद्री निगरानी और छोटे द्वीपीय देशों की क्षमता निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया है। इसी कारण सेशेल्स सहित कई हिंद महासागर देशों ने भारत को अपना विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार माना है।
ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में भी भारत ने कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग,मत्स्य पालन का आधुनिकीकरण, समुद्री जैव विविधता का संरक्षण और तटीय क्षेत्रों का संतुलित विकास भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों को साथ लेकर चलना ही भविष्य का रास्ता है।
सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय देशों के लिए जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। समुद्र के बढ़ते जलस्तर,तटीय कटाव,समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते खतरे और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति इन देशों के सामने बड़ी समस्याएँ हैं। ऐसे समय में भारत द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को सेशेल्स ने विशेष महत्व दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें खाद्य और कृषि संगठन का एग्रीकोला मेडल,सोल शांति पुरस्कार और संयुक्त राष्ट्र का ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ सम्मान प्रमुख हैं। अब ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ उनके अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों की सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।
सेशेल्स सरकार ने अपने बयान में कहा कि यह सम्मान उनके लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन और समुद्री चुनौतियों का सबसे अधिक प्रभाव छोटे द्वीपीय देशों पर पड़ता है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े और जिम्मेदार साझेदार का सहयोग उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार ने विश्वास जताया कि भारत और सेशेल्स भविष्य में भी समुद्री सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण,ब्लू इकोनॉमी और सतत विकास के क्षेत्रों में मिलकर काम करते रहेंगे।
यह सम्मान केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं,बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका,पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और छोटे द्वीपीय देशों के साथ उसकी साझेदारी की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक भी माना जा रहा है। भारत और सेशेल्स के बीच 50 वर्षों की मित्रता के इस ऐतिहासिक अवसर पर दिया गया यह सम्मान दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ समुद्री सहयोग और जलवायु कार्रवाई के साझा एजेंडे को भी आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
