माया जॉइंट ने सेरेना विलियम्स की वापसी का सफर पहले ही दौर में रोका (तस्वीर क्रेडिट@HarZizn)

विंबलडन में बड़ा उलटफेर,माया जॉइंट ने सेरेना विलियम्स की वापसी का सफर पहले ही दौर में रोका

लंदन,1 जुलाई (युआईटीवी)- विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला,जब ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी माया जॉइंट ने दिग्गज अमेरिकी टेनिस स्टार और सात बार की विंबलडन चैंपियन सेरेना विलियम्स को रोमांचक मुकाबले में हराकर महिला एकल प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। सेंटर कोर्ट पर खेले गए इस मुकाबले में माया जॉइंट ने शानदार संयम,आक्रामक खेल और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए सेरेना को 6-3, 6-7 (6), 6-3 से मात दी। इस जीत के साथ उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता हासिल की और विंबलडन के दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया,जहाँ उनका सामना एलेक्जेंड्रा एला से होगा।

यह मुकाबला कई मायनों में खास था। एक ओर टेनिस इतिहास की महानतम खिलाड़ियों में गिनी जाने वाली सेरेना विलियम्स करीब चार साल बाद ग्रैंड स्लैम एकल मुकाबले में वापसी कर रही थीं,तो दूसरी ओर माया जॉइंट अपने करियर के सबसे बड़े मंच पर खुद को साबित करने उतरी थीं। अनुभव और उपलब्धियों के लिहाज से दोनों खिलाड़ियों के बीच बहुत बड़ा अंतर था,लेकिन कोर्ट पर युवा जोश ने अनुभव को चुनौती दी और अंततः जीत भी हासिल की।

माया जॉइंट इस साल जनवरी से लगातार 11 टूर स्तर के मुकाबले हारने के बाद विंबलडन खेलने पहुंची थीं। ऐसे समय में उनसे बहुत अधिक उम्मीदें नहीं लगाई जा रही थीं,लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। शुरुआत से ही उन्होंने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए सेरेना पर दबाव बनाया। पहले सेट में उनकी सर्विस और आक्रामक रिटर्न ने सेरेना को लय बनाने का मौका नहीं दिया। लगातार बेहतरीन शॉट्स की बदौलत उन्होंने पहला सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया।

दूसरे सेट में मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। सेरेना विलियम्स ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए जोरदार वापसी की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखा और टाई-ब्रेक तक पहुँचे इस सेट में पहला मैच प्वाइंट भी बचाया। इसके बाद उन्होंने टाई-ब्रेक जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे सेट तक पहुँचा दिया। दूसरे सेट में उनकी वापसी ने दर्शकों को उम्मीद दी कि वह अपने पुराने अंदाज में फिर से जीत दर्ज कर सकती हैं।

निर्णायक सेट की शुरुआत में भी सेरेना ने शानदार खेल दिखाया और एक ब्रेक की बढ़त हासिल कर ली। ऐसा लग रहा था कि अब अनुभव युवा खिलाड़ी पर भारी पड़ जाएगा। लेकिन माया जॉइंट ने हार नहीं मानी। उन्होंने जबरदस्त मानसिक मजबूती दिखाई और लगातार आक्रामक खेल के जरिए वापसी की। उन्होंने सेरेना की मशहूर सर्विस को पूरे मैच में पांच बार ब्रेक किया,जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने पूरे मुकाबले में 10 ऐस लगाकर यह भी साबित किया कि उनकी सर्विस विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को चुनौती देने में सक्षम है।

माया जॉइंट ने निर्णायक क्षणों में अपने खेल का स्तर और ऊँचा किया। उन्होंने लंबी रैलियों में धैर्य बनाए रखा और मौके मिलने पर आक्रामक शॉट्स लगाकर अंक हासिल किए। अंततः उन्होंने तीसरा सेट 6-3 से जीतकर इतिहास रच दिया। जैसे ही अंतिम अंक उनके पक्ष में गया,पूरे सेंटर कोर्ट में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

मुकाबले के बाद कोर्ट पर दिए गए अपने साक्षात्कार में माया जॉइंट ने इस जीत को अपने जीवन का सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा कि मैच की शुरुआत इतनी शानदार कैसे हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि सेरेना जैसी महान खिलाड़ी के सामने उतरना ही उनके लिए सबसे कठिन चुनौती थी।

माया ने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। मेरे पैर जैसे काम ही नहीं कर रहे थे। मुझे सच में समझ नहीं आ रहा कि मैंने इतनी अच्छी शुरुआत कैसे कर ली। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली है। वह एक महान खिलाड़ी हैं और इस कोर्ट पर कई दिग्गज खेल चुके हैं। बचपन से मैंने ऐसे ही किसी पल का सपना देखा था। इसलिए यह अनुभव मेरे लिए अविश्वसनीय है।”

उन्होंने आगे कहा कि मुकाबले की शुरुआत में वह काफी घबराई हुई थीं। उनके अनुसार सबसे मुश्किल काम कोर्ट पर उतरकर सेरेना के सामने खेलना था। उन्होंने कहा कि जब वह मैच खत्म करने की कोशिश कर रही थीं,तब सेरेना ने अपने खेल का स्तर और ऊँचा कर दिया था। उन्होंने स्वीकार किया कि सेरेना ने बेहद शानदार टेनिस खेला और अंत तक कड़ी चुनौती दी।

दूसरी ओर, 44 वर्षीय सेरेना विलियम्स की यह वापसी भी चर्चा का विषय रही। वह 2022 में अमेरिका ओपन के बाद पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम एकल मुकाबले में उतरी थीं। लगभग 1,397 दिनों के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने विंबलडन में वापसी की थी। इस उम्र में वह ओपन एरा में विंबलडन महिला एकल खेलने वाली दूसरी सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गईं। उनसे पहले यह उपलब्धि मार्टिना नवरातिलोवा के नाम थी,जिन्होंने 47 वर्ष की उम्र में विंबलडन महिला एकल में हिस्सा लिया था।

सेरेना ने अपने करियर में 23 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीते हैं और उन्हें टेनिस इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में गिना जाता है। विंबलडन में उनका रिकॉर्ड भी शानदार रहा है, जहाँ उन्होंने सात बार महिला एकल का खिताब अपने नाम किया। यही कारण था कि उनकी वापसी को लेकर दुनिया भर के टेनिस प्रशंसकों में भारी उत्साह था।

हालाँकि,इस हार के साथ उनका एकल अभियान समाप्त हो गया है,लेकिन वह अभी भी ऑल इंग्लैंड क्लब में बनी रहेंगी। अब वह अपनी बहन वीनस विलियम्स के साथ महिला युगल प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। टेनिस प्रशंसकों की निगाहें अब इस जोड़ी के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

मुकाबले के बाद सेरेना विलियम्स ने पत्रकारों से सीधे बातचीत नहीं की,लेकिन उन्होंने एक लिखित बयान जारी किया। अपने संदेश में उन्होंने विंबलडन में वापसी को भावुक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह दोबारा इस प्रतिष्ठित कोर्ट पर खेलने लौट पाएँगी। उन्होंने कहा कि यहाँ का माहौल शानदार था और सेंटर कोर्ट पर उतरना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने इस पल का भरपूर आनंद लिया और इस मंच पर लौटना उनके लिए यादगार रहा।

माया जॉइंट की यह जीत केवल एक मैच की सफलता नहीं है,बल्कि यह युवा प्रतिभा, आत्मविश्वास और संघर्ष की मिसाल भी है। लगातार हार के दौर से गुजरने के बाद विंबलडन जैसे बड़े मंच पर टेनिस की सबसे महान खिलाड़ियों में से एक को हराना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। वहीं सेरेना विलियम्स ने भले ही एकल मुकाबले में हार का सामना किया हो,लेकिन उनकी वापसी ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वह आज भी टेनिस जगत की सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शामिल हैं।