वाशिंगटन,2 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत को लेकर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि दोहा में चल रही वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने की कोशिश की या अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार को निशाना बनाया,तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य बल का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। वेंस का यह बयान ऐसे समय आया है,जब हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत चल रही है और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास तेज हुए हैं।
वर्जीनिया स्थित नेवल एयर स्टेशन ओशियाना के दौरे के बाद बुधवार को एयर फोर्स टू से रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका,ईरान,कतर और अन्य संबंधित देशों के प्रतिनिधि अगले चरण की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी,लेकिन अब तक जो संकेत मिले हैं,वे उत्साहजनक हैं। उनके अनुसार,वार्ता में शामिल सभी पक्ष क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
वेंस ने कहा कि फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरने वाला व्यावसायिक समुद्री यातायात पूरी तरह सुरक्षित बना रहे। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है और यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में इस दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो रही है।
उन्होंने ऊर्जा बाजार का भी उल्लेख करते हुए कहा कि तेल की कीमतें लगभग अड़सठ डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं और गैस की कीमतों में भी गिरावट का रुझान दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार,यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है और समुद्री व्यापार बिना किसी बाधा के चलता रहता है,तो इसका सीधा लाभ वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका का ध्यान परमाणु मुद्दे पर केंद्रित होगा और इस संबंध में भी ईरान के साथ विस्तृत बातचीत शुरू की जाएगी।
उपराष्ट्रपति वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देती है और बातचीत के जरिए सभी विवादों का समाधान चाहती है। हालाँकि,उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की या अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले शुरू किए,तो अमेरिका की नीति तुरंत बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी सेना को केवल तब ही कार्रवाई का आदेश देंगे,जब ऐसा करना पूरी तरह आवश्यक होगा और उसके पीछे स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य होगा। लेकिन यदि ईरान ऐसे कदम उठाता है जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को खतरा पैदा होता है,तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई सहित सभी विकल्प खुले रहेंगे।
वेंस ने कहा कि अमेरिका किसी भी ऐसी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा,जिससे परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा बढ़े या समुद्री मार्गों की सुरक्षा प्रभावित हो। उनके अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भी यही अपेक्षा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पारदर्शिता बनाए रखे और ऐसे किसी कदम से बचे,जिससे क्षेत्र में नया संकट पैदा हो।
ईरान की आंतरिक राजनीति और वहां के नेतृत्व के भीतर मौजूद मतभेदों पर भी जेडी वेंस ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर अब ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है,जो पश्चिमी देशों और खाड़ी के अरब देशों के साथ संबंध सुधारने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों की नीतियों पर ईरान के भीतर भी गंभीर मंथन हो रहा है और कुछ प्रभावशाली वर्ग यह मानने लगे हैं कि लंबे समय तक टकराव की नीति से देश को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
वेंस के अनुसार,ईरान के भीतर एक ऐसा वर्ग मौजूद है जो अमेरिका,यूरोप और पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ नए सिरे से संबंध स्थापित करना चाहता है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग अब भी पुरानी नीतियों और टकराव वाले दृष्टिकोण को बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगता है कि सुधारवादी सोच रखने वाले लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है और इसी कारण वाशिंगटन कूटनीतिक प्रयासों को सफल बनाने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर देना चाहता है।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान वास्तव में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ता है,तो यह न केवल दोनों देशों के लिए,बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित होगा। उनका कहना था कि स्थायी शांति केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि विश्वास,संवाद और सहयोग से स्थापित की जा सकती है।
हालाँकि,वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को दोबारा शुरू किया या अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्थाओं को बाधित करने का प्रयास किया,तो अमेरिका उसकी गंभीर प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास ऐसे किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जाएगा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा समय में वाशिंगटन की रणनीति दबाव और संवाद दोनों को साथ लेकर चलने की है। एक ओर जहाँ अमेरिका आर्थिक और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान निकालना चाहता है,वहीं दूसरी ओर वह यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कोशिश है कि बातचीत के जरिए ऐसा समझौता हो,जिससे भविष्य में किसी प्रकार का सैन्य टकराव टाला जा सके।
घरेलू राजनीति से जुड़े एक सवाल के जवाब में वेंस ने वर्ष २०२८ के राष्ट्रपति चुनाव पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जब उनसे विपक्षी नेता एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया,तो उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान वर्तमान जिम्मेदारियों पर है। उन्होंने कहा कि अभी उनकी प्राथमिकता अमेरिकी जनता के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है। भविष्य के चुनावों के बारे में अभी से अटकलें लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना था कि यदि सरकार वर्तमान में अच्छा काम करती है,तो भविष्य अपने आप तय हो जाएगा।
वेंस ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े हालिया फैसले में न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट से गलती हुई है। उनके अनुसार,सर्वोच्च न्यायालय भी समय-समय पर गलत निर्णय दे सकता है और ऐसे मामलों में सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उन गलतियों को सुधारने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं और इन्हें संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सैमुअल अलिटो के संभावित सेवानिवृत्ति संबंधी अटकलों पर भी वेंस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी भी प्रकार की अटकल लगाना उचित नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह संबंधित न्यायाधीश का व्यक्तिगत निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करती और ऐसे सभी निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत ही लिए जाते हैं।
जेडी वेंस के ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है,लेकिन साथ ही उसने अपनी सुरक्षा नीति को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई है। एक ओर दोहा में चल रही बातचीत से उम्मीदें बढ़ी हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका ने यह संदेश भी दिया है कि यदि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम या समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया,तो उसका जवाब केवल कूटनीतिक नहीं,बल्कि सैन्य भी हो सकता है। आने वाले दिनों में दोहा वार्ता की दिशा और ईरान की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि दोनों देशों के संबंध सहयोग की ओर बढ़ते हैं या फिर एक बार फिर तनाव और टकराव की स्थिति पैदा होती है।
