बारुईपुर हिंसा मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

बारुईपुर हिंसा मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 42 आरोपी गिरफ्तार; नाबालिग की हत्या के बाद भड़की थी हिंसा

दक्षिण 24 परगना,9 जुलाई (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर क्षेत्र में एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य पुलिस ने गुरुवार को बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान 22 और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में अब तक कुल 42 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर भीड़ द्वारा एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने,पुलिस पर हमला करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बारुईपुर में हुई हिंसा केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रही,बल्कि देखते ही देखते व्यापक उपद्रव में बदल गई। जांच में सामने आया है कि गुस्साई भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेते हुए न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि पुलिस बल पर भी हमला किया और कई सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। इसी कारण हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

यह पूरा मामला रविवार सुबह सामने आया था,जब बारुईपुर के सूर्यपुर इलाके में एक तालाब से 12 वर्षीय नाबालिग लड़की का शव बरामद हुआ। घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास एकत्र हो गए। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर लोगों ने लड़की के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की आशंका जताई,जिसके बाद भीड़ का गुस्सा हिंसक रूप ले बैठा।

आरोप है कि भीड़ ने 26 वर्षीय इंद्रजीत तांती को लड़की की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए पकड़ लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर रूप से घायल युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में पुलिस जाँच के दौरान यह बात सामने आई कि युवक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले थे। जाँच के आधार पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि इंद्रजीत तांती इस मामले में निर्दोष था और उसे संदेह के आधार पर भीड़ ने अपनी हिंसा का शिकार बना दिया।

युवक की मौत के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। भीड़ का गुस्सा लगातार बढ़ता गया और कई स्थानों पर हिंसा की घटनाएँ सामने आईं। उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की,रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुँचाया और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी क्षति पहुँचाई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई,जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार कुछ पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं,जिनका इलाज कराया गया।

घटना के बाद राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ हुए अपराध की निष्पक्ष और त्वरित जाँच की जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी कहा गया कि हिंसा,लिंचिंग और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों को भी किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिए कि हिंसा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पुलिस ने व्यापक जाँच अभियान शुरू किया। घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज,मोबाइल वीडियो,प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई। इसी क्रम में पहले कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और अब पिछले 24 घंटों में 22 और लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जाँच अभी जारी है और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों पर भारतीय कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें हत्या,दंगा,पुलिस पर हमला,सरकारी कार्य में बाधा डालना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि कानून हाथ में लेने की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी दोषियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम बुधवार को सामने आया,जब नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मुख्य आरोपी प्रवास मंडल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी को पकड़ने के दौरान हुई कार्रवाई में वह मारा गया। इस घटनाक्रम के बाद भी मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।

बारुईपुर की इस घटना ने एक बार फिर भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नाबालिग के साथ हुए जघन्य अपराध ने लोगों को झकझोर दिया,वहीं दूसरी ओर संदेह के आधार पर एक युवक की पीट-पीटकर हत्या और उसके बाद हुई हिंसा ने कानून-व्यवस्था की चुनौती को भी सामने ला दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अपराध में दोषियों को सजा दिलाने का अधिकार केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है और भीड़ द्वारा किया गया न्याय समाज और कानून दोनों के लिए खतरनाक है।

फिलहाल बारुईपुर में स्थिति पर पुलिस की लगातार नजर बनी हुई है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के साथ-साथ नाबालिग की हत्या और उसके बाद हुई हिंसा,दोनों मामलों की निष्पक्ष जाँच जारी रहेगी। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।