केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी

ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान,मामूली माइलेज कमी के बदले बेहतर इंजन प्रदर्शन और कम प्रदूषण का दावा

नई दिल्ली,10 जुलाई (युआईटीवी)- पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई20 ईंधन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि ई20 ईंधन से कुछ वाहनों के माइलेज में तीन से पाँच प्रतिशत तक की मामूली कमी आ सकती है,लेकिन इसे केवल माइलेज के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार,ई20 ईंधन कई ऐसे तकनीकी और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है जो इसे पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक प्रभावी और भविष्य के लिए उपयुक्त विकल्प बनाते हैं। सरकार का कहना है कि ई20 न केवल इंजन के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है,बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाने में सक्षम है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर परीक्षण, तकनीकी अध्ययन और उद्योग से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था। सरकार ने इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया,ताकि वाहन निर्माता कंपनियों,पुर्जा निर्माताओं,परीक्षण एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों की सभी तकनीकी चिंताओं का समाधान किया जा सके। मंत्रालय का कहना है कि ई20 को बाजार में उतारने से पहले हर पहलू का वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण किया गया और तभी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया।

सरकार ने याद दिलाया कि भारत ने जून 2022 में पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई10 का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच महीने पहले ही हासिल कर लिया था। यह उपलब्धि भारत की वैकल्पिक ईंधन नीति और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई थी। ई10 की सफलता के बाद ही सरकार ने अगले चरण के रूप में ई20 ईंधन को अपनाने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया।

मंत्रालय के अनुसार, ई20 के लिए अपनाई गई प्रक्रिया ई10 की तुलना में और अधिक व्यापक तथा सख्त रही। वर्ष 2021 से ही इस संबंध में स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक कर दिया गया था,ताकि वाहन उद्योग और अन्य संबंधित क्षेत्रों को पर्याप्त समय मिल सके। इस दौरान ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों,ऑटो कंपोनेंट उद्योग,परीक्षण एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ कई दौर की बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में ईंधन की गुणवत्ता,इंजन की कार्यक्षमता,सामग्री की अनुकूलता,ईंधन प्रणाली,इंजन कैलिब्रेशन, उत्सर्जन मानकों,वाहन की टिकाऊ क्षमता और ईंधन दक्षता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्रालय ने कहा कि यदि वाहन निर्माता कंपनियां ई20 ईंधन को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीं,तो वे कभी भी इस ईंधन का समर्थन नहीं करतीं और न ही अपने वाहनों के लिए वारंटी जारी रखतीं। सरकार के अनुसार,आज लगभग सभी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियाँ नई और पुरानी दोनों तरह की गाड़ियों के लिए ई20 ईंधन के उपयोग पर वारंटी प्रदान कर रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि उद्योग जगत इस ईंधन की तकनीकी विश्वसनीयता को स्वीकार कर चुका है।

ई20 को लेकर लोगों के बीच यह धारणा भी रही है कि इससे पुराने वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है या पुर्जों में जंग लगने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। मंत्रालय ने इन आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि वास्तविक अनुभव इसके विपरीत हैं। मंत्रालय ने उदाहरण देते हुए बताया कि देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे,जो पुराने थे और ई20 प्रमाणित नहीं थे। कंपनी के अनुभव के अनुसार ई20 ईंधन के उपयोग से किसी भी वाहन में जंग लगने, असामान्य घिसाव या इंजन के पुर्जों के खराब होने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई।

इसी प्रकार दोपहिया वाहन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपने फील्ड अनुभव के आधार पर बताया कि ई20 ईंधन के उपयोग से किसी प्रकार की असामान्य तकनीकी समस्या नहीं देखी गई। मंत्रालय ने कहा कि वास्तविक परिस्थितियों में लाखों वाहनों के संचालन से प्राप्त आँकड़े किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट दावों की तुलना में कहीं अधिक विश्वसनीय हैं।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन के साथ माइलेज में यदि तीन से पाँच प्रतिशत तक की कमी आती भी है,तो इसके बदले उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं। ई20 की ऑक्टेन रेटिंग सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक होती है,जिससे इंजन की कार्यक्षमता बेहतर होती है। इसके अलावा इसमें बेहतर एंटी-नॉक गुण मौजूद होते हैं,जो इंजन में अनियंत्रित दहन की संभावना को कम करते हैं। ई20 तेजी से जलता है,जिससे वाहन का पिकअप बेहतर होता है और एक्सेलरेशन अधिक सहज महसूस होता है। इसके साथ ही इंजन अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ रहता है,जिससे लंबे समय में इंजन के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरणीय दृष्टि से भी सरकार ने ई20 को महत्वपूर्ण बताया है। मंत्रालय के अनुसार इस ईंधन के उपयोग से बारीक कणों का उत्सर्जन कम होता है और पूरे जीवनचक्र के आधार पर कार्बन उत्सर्जन में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत द्वारा स्वच्छ ईंधन की दिशा में उठाया गया यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यदि समग्र रूप से देखा जाए तो ई20 शुद्ध पेट्रोल और ई10 दोनों की तुलना में अधिक स्वच्छ,बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है। सरकार का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा।

ई20 की तुलना प्रीमियम पेट्रोल से किए जाने पर भी मंत्रालय ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि दोनों की तुलना उचित नहीं है,क्योंकि प्रीमियम पेट्रोल विशेष प्रकार का उत्पाद होता है,जिसमें प्रदर्शन बढ़ाने वाले अतिरिक्त रासायनिक तत्व मिलाए जाते हैं और इसे सीमित मात्रा में अधिक कीमत पर बेचा जाता है। दूसरी ओर ई20 एक व्यापक राष्ट्रीय ईंधन नीति का हिस्सा है,जिसका उद्देश्य ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है।

सरकार ने यह भी कहा कि यदि देश में शुद्ध पेट्रोल,ई10 और ई20 के लिए अलग-अलग आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित की जाएँ,तो यह व्यवस्था अत्यंत जटिल और महँगी साबित होगी। इसलिए चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में ई20 को अपनाना अधिक व्यावहारिक और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी विकल्प माना गया है। इससे ईंधन वितरण प्रणाली को सरल बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने एथेनॉल उत्पादन के लिए किए गए निवेश का भी उल्लेख किया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकारी बैंकों ने एथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़े बुनियादी ढाँचे के विकास में हर वर्ष लगभग एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस निवेश के माध्यम से देश में नई डिस्टिलरी,एथेनॉल उत्पादन संयंत्र,भंडारण सुविधाएँ तथा आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत के एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और ईंधन आपूर्ति प्रणाली को मजबूत बनाना है।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ किसानों को भी मिलेगा। गन्ने,मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले एथेनॉल की बढ़ती माँग किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगी। साथ ही कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने से देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ईंधन की दिशा में भारत की यह पहल वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया के अनुरूप है। दुनिया के कई देश वैकल्पिक और हरित ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं,ऐसे में भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

मंत्रालय ने अंत में लोगों से अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील करते हुए कहा कि ई20 ईंधन को व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों,उद्योग जगत की सहमति और वास्तविक अनुभवों के आधार पर लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि ई20 केवल भविष्य का ईंधन नहीं,बल्कि एक स्वच्छ,टिकाऊ और आत्मनिर्भर भारत की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण आधार भी है।