कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (तस्वीर क्रेडिट@Anand_thunder)

राज्यसभा में गूँजा नीट और कथित पेपर लीक का मुद्दा,मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों के बीच हंगामे से कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली,20 जुलाई (युआईटीवी)- संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा में नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देशभर के छात्रों के भविष्य से जुड़े इस विषय को सदन में उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उनके संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई,जिसके चलते सदन का माहौल काफी गर्म हो गया। लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने संकेत दे दिया था कि वह सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र इस मामले से प्रभावित हुए हैं और उनकी चिंताओं को संसद में आवाज मिलनी चाहिए। खड़गे ने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद भवन के निकट जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप था कि इन छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं,लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

खड़गे ने सदन में कहा कि वह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं,बल्कि उन लाखों छात्रों की ओर से बोल रहे हैं,जिनका भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में यदि पारदर्शिता और विश्वास नहीं रहेगा,तो इसका असर देश के युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।

अपने भाषण के दौरान खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे विवाद को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को अनसुना करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने माँग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएँ,ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।

जैसे ही नेता प्रतिपक्ष ने अपने आरोपों को आगे बढ़ाया,सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी और कई सदस्य अपनी-अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। सदन में शोरगुल लगातार बढ़ता गया और कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो गया। इस दौरान सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कई बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा का सम्मान करने की अपील की,लेकिन हंगामा जारी रहा।

लगातार व्यवधान के कारण अंततः सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन की कार्यवाही बाधित होने से यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल सकती है।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया मंच “एक्स” पर एक विस्तृत संदेश जारी किया था। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस पार्टी और साझा विपक्ष संसद के भीतर जनता की आवाज बनकर सरकार से हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाब मांगेगा। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकार,जनता की आवाज और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए विपक्ष पूरी ताकत से संघर्ष करेगा। उनके अनुसार संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहाँ जनता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

अपने सोशल मीडिया संदेश में खड़गे ने श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चंदा अनियमितता के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ आर्थिक सहयोग दिया था और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी स्वतंत्र जाँच कराई जानी चाहिए। उन्होंने माँग की कि पूरे मामले का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।

इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से अब तक विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर 152 पेपर लीक की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों के कारण कई छात्रों ने मानसिक दबाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी सामने आईं। खड़गे ने इन आरोपों के आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की माँग करते हुए उन्हें पद से हटाने की बात भी कही।

हालाँकि,इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल सदन में विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के आरोपों का विरोध किया और कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हंगामे के कारण इस विषय पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने सोशल मीडिया संदेश में ई-20 ईंधन मिश्रण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों वाहन मालिकों पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन का प्रयोग बिना पर्याप्त तैयारी के थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसे एक प्रयोग मानती है तो जनता पर इसका बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस नीति पर भी स्पष्टीकरण देने की माँग की।

खड़गे ने यह भी कहा कि मानसून सत्र के दौरान केवल नीट या शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। उन्होंने कहा कि संसद में आने वाले कई विधेयक और नीतिगत फैसले सीधे तौर पर देश की जनता को प्रभावित करेंगे। ऐसे में विपक्ष का दायित्व है कि वह हर विषय पर सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करे और जनता के हितों की रक्षा करे।

मानसून सत्र के पहले दिन की घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी दिनों में संसद का माहौल काफी गर्म रहने वाला है। सरकार जहाँ अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है,वहीं विपक्ष शिक्षा,बेरोजगारी,आर्थिक नीतियों और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रमुख राजनीतिक विषय बना रह सकता है। लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को देखते हुए इस विषय पर सरकार से विस्तृत जवाब की माँग लगातार उठ रही है। वहीं सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के आधार पर जवाब दे और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी सदन को दे।

संसद का मानसून सत्र ऐसे समय में शुरू हुआ है,जब देश के सामने शिक्षा,रोजगार, अर्थव्यवस्था और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पहले ही दिन राज्यसभा में हुए हंगामे ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद गहरे हैं। हालाँकि,लोकतांत्रिक व्यवस्था की दृष्टि से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि आगामी बैठकों में दोनों पक्ष सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल पहले दिन की कार्यवाही ने मानसून सत्र के आगामी दिनों की राजनीतिक दिशा का स्पष्ट संकेत दे दिया है।