रिपब्लिकन सांसद एना पॉलिना लूना (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

चीनी छात्रों के वीजा रद्द करने की उठी माँग,अमेरिकी सांसद के पत्र से बढ़ा नया विवाद

वाशिंगटन,21 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक,आर्थिक और रणनीतिक तनाव के बीच अब शिक्षा और छात्र वीजा का मुद्दा भी दोनों देशों के संबंधों में नया विवाद बनकर उभरता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की रिपब्लिकन सांसद एना पॉलिना लूना ने चीन के नागरिकों को जारी किए गए छात्र वीजा को तत्काल निलंबित या रद्द करने की माँग करते हुए विदेश मंत्री मार्को रूबियो को एक पत्र लिखा है। सांसद का दावा है कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए व्यापक स्तर पर साइबर गतिविधियां संचालित की थीं। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे चीनी छात्रों के सभी एफ-1 और जे-1 छात्र वीजा की तत्काल समीक्षा कर उन्हें रद्द करने और भविष्य में नए वीजा जारी करने की प्रक्रिया रोकने की मांग की है।

यह माँग ऐसे समय सामने आई है,जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार,प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले ही गंभीर मतभेद बने हुए हैं। अब छात्र वीजा को लेकर उठी यह माँग दोनों देशों के संबंधों में तनाव का एक नया कारण बन सकती है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हर वर्ष बड़ी संख्या में चीनी छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं और वे विज्ञान,प्रौद्योगिकी,इंजीनियरिंग,चिकित्सा तथा शोध जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में यदि छात्र वीजा को लेकर कोई कठोर नीति अपनाई जाती है,तो इसका प्रभाव केवल शिक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि दोनों देशों के शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग पर भी पड़ सकता है।

रिपब्लिकन सांसद एना पॉलिना लूना ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को लिखे अपने पत्र में कहा कि हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेज बेहद गंभीर हैं और इनसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। उनके अनुसार दस्तावेजों में दावा किया गया है कि वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले चीन ने बड़े पैमाने पर साइबर जासूसी अभियान चलाकर अमेरिकी चुनावी प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की। सांसद ने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।

पत्र में एना पॉलिना लूना ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने हालिया संबोधन में ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं,जिनमें कथित तौर पर चीन द्वारा अमेरिकी चुनावी आँकड़ों को निशाना बनाए जाने का उल्लेख है। उनके अनुसार इन दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि यह अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े साइबर जासूसी अभियानों में से एक था। सांसद ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास नहीं हैं,बल्कि वे अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती हैं।

लूना ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कथित साइबर हमलों के दौरान अमेरिकी मतदाताओं से जुड़ी बड़ी मात्रा में संवेदनशील जानकारी हासिल की गई। उन्होंने दावा किया कि इसमें मतदाताओं के नाम,पते,मोबाइल नंबर,राजनीतिक संबद्धता और मतदाता पंजीकरण से संबंधित अन्य सूचनाएँ शामिल थीं। सांसद के अनुसार यदि इस प्रकार का डेटा किसी विदेशी शक्ति के हाथ लग जाता है,तो उसका उपयोग भविष्य में चुनावों को प्रभावित करने,दुष्प्रचार फैलाने या अन्य रणनीतिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

रिपब्लिकन सांसद का कहना है कि इन खुलासों के बाद केवल जाँच करना पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि सरकार को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा संबंधी कदम भी उठाने चाहिए। उन्होंने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि अमेरिका में पढ़ रहे सभी चीनी छात्रों के सक्रिय एफ-1 और जे-1 छात्र वीजा की समीक्षा की जाए और आवश्यकता होने पर उन्हें रद्द किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी माँग की कि जब तक सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता,तब तक चीन के नागरिकों को नए छात्र वीजा जारी करने की प्रक्रिया रोक दी जाए।

अपने पत्र में एना पॉलिना लूना ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अमेरिकी विश्वविद्यालय विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए संभावित प्रवेश बिंदु रहे हैं। उनके अनुसार शोध संस्थानों,विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यक्रमों तथा विश्वविद्यालय परिसरों के माध्यम से संवेदनशील सूचनाओं तक पहुँचने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में वर्णित गतिविधियां सही हैं,तो अमेरिका अब मौजूदा छात्र वीजा प्रणाली को किसी भी संभावित विदेशी प्रभाव अभियान का माध्यम नहीं बनने दे सकता।

सांसद ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह माँग उठाई थी कि प्रत्येक चीनी छात्र वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। उनके अनुसार अमेरिकी चुनावों की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए यह कदम आवश्यक और उचित होगा। उन्होंने विदेश मंत्री से आग्रह किया कि वे इस विषय पर तत्काल कार्रवाई करें और संबंधित सभी एजेंसियों के साथ मिलकर व्यापक समीक्षा शुरू करें।

एना पॉलिना लूना ने अपने पत्र में केवल वीजा रद्द करने की माँग ही नहीं की,बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के प्रवेश,जाँच और सत्यापन प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करने का भी आग्रह किया। उनका कहना है कि वर्तमान प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए,ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के संभावित सुरक्षा जोखिम को समय रहते रोका जा सके।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस से प्रसारित अपने टेलीविजन संबोधन में ट्रंप ने चुनावी सुरक्षा से जुड़े कई खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की घोषणा की थी। उन्होंने दावा किया था कि इन दस्तावेजों में अमेरिकी चुनावी प्रणाली की कई गंभीर कमजोरियों का उल्लेख है और साथ ही चीन द्वारा वर्षों से अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करने के कथित प्रयासों का भी विवरण मौजूद है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने अमेरिकी चुनावी आँकड़ों में अब तक की सबसे बड़ी सेंधमारी को अंजाम दिया। उनके अनुसार इस कथित साइबर अभियान के दौरान चीन ने लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलों तक अवैध पहुँच हासिल कर ली। ट्रंप ने इसे अमेरिकी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि देश को अपनी चुनावी प्रणाली और साइबर सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

हालाँकि,इन आरोपों पर चीन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है, लेकिन इससे पहले भी चीन कई बार अमेरिका के ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है। बीजिंग का कहना रहा है कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और साइबर हमलों के आरोप अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों से लगाए जाते हैं। दूसरी ओर अमेरिका लगातार चीन पर साइबर जासूसी,बौद्धिक संपदा की चोरी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े आरोप लगाता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी सरकार चीनी छात्रों के वीजा को लेकर कोई व्यापक प्रतिबंध लागू करती है,तो इसका असर हजारों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में चीनी छात्र अध्ययन और शोध कर रहे हैं। इनमें से अनेक छात्र विज्ञान,चिकित्सा,इंजीनियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध कार्य से जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी कठोर नीति का प्रभाव उच्च शिक्षा,अनुसंधान और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग पर भी पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा आने वाले समय में अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण स्थान ले सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा,चुनावी पारदर्शिता और विदेशी प्रभाव जैसे विषय पहले से ही अमेरिकी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। ऐसे में चीनी छात्रों के वीजा को लेकर उठी माँग इन बहसों को और तेज कर सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो या अमेरिकी विदेश मंत्रालय इस माँग पर क्या निर्णय लेते हैं। हालाँकि,इतना तय है कि एना पॉलिना लूना का यह पत्र अमेरिका और चीन के बीच पहले से मौजूद तनाव में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। यदि इस दिशा में कोई आधिकारिक कदम उठाया जाता है,तो उसका असर केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक शिक्षा,शोध सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय छात्र आदान-प्रदान व्यवस्था पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।