सीजेपी प्रदर्शन हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस की जाँच तेज (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

सीजेपी प्रदर्शन हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस की जाँच तेज,पाँच एफआईआर दर्ज कर जुटाए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य

नई दिल्ली,21 जुलाई (युआईटीवी)- राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी जाँच तेज कर दी है। पुलिस ने अब तक इस प्रकरण में कुल पाँच अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं और संकेत दिए हैं कि जाँच के दौरान यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो और भी मामले दर्ज किए जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान जिन स्थानों पर हिंसा,तोड़फोड़, सरकारी कार्य में बाधा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ हुईं,उन सभी मामलों की अलग-अलग जाँच की जा रही है। इसके लिए घटनास्थलों के वीडियो फुटेज,सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है,जब संसद का मानसून सत्र जारी है और राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार,प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था भंग होने और कई स्थानों पर हिंसक घटनाओं की सूचना मिलने के बाद विभिन्न पुलिस थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना प्रमुख रूप से शामिल हैं,जबकि अन्य प्रभावित क्षेत्रों के संबंधित पुलिस थानों में भी मामले दर्ज किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जाँच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। विभिन्न स्थानों से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इस मामले की जाँच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। इसी कारण घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग,मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो,सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्य और अन्य तकनीकी प्रमाणों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार,प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग प्रकार की घटनाएँ सामने आईं। कहीं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की शिकायत मिली,तो कहीं सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की तथा हमले के आरोप सामने आए। इसी वजह से प्रत्येक घटना को उसके स्थान और प्रकृति के अनुसार अलग-अलग प्राथमिकी में दर्ज किया गया है,ताकि हर मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जा सके।

जाँच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संसद सत्र के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में भी एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि संसद परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है और यहाँ बिना अनुमति किसी भी प्रकार की ड्रोन गतिविधि सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है। इस मामले की भी अलग से जाँच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ड्रोन उड़ाने के पीछे क्या उद्देश्य था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

इसके अतिरिक्त पुलिस ने एक अन्य एफआईआर उस कथित साजिश को लेकर भी दर्ज की है,जिसके तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा की योजना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार,जाँच के दौरान कुछ ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं,जिनके आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कुछ गतिविधियाँ पूर्व नियोजित हो सकती हैं। हालाँकि,पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जाँच जारी है और अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने,पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों से जुड़े मामलों में भी दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्य के निर्वहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। साथ ही कई स्थानों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ भी सामने आईं,जिनकी विस्तृत जाँच की जा रही है।

पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार,इन धाराओं में सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा डालना,लोक सेवकों पर हमला करना,हिंसक और गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनना,दंगा करना,सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना,गंभीर क्षति पहुँचाना,लोगों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना,साझा आपराधिक मंशा के तहत अपराध करना,आपराधिक साजिश रचना,बिना वैध अनुमति हथियारों से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करना तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों में कानून के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए जाँच की जा रही है। प्रत्येक घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी,उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने गैरकानूनी तरीके से भीड़ एकत्रित कर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित किया। आरोप है कि इस दौरान सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न की गई,हिंसक गतिविधियों में भाग लिया गया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन घटनाओं में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका रही।

जाँच एजेंसियाँ डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही हैं। घटनास्थलों के वीडियो फुटेज की फ्रेम-दर-फ्रेम जाँच की जा रही है,ताकि प्रदर्शन में शामिल लोगों की सही पहचान हो सके। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों का भी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आधुनिक तकनीक की मदद से आरोपियों की पहचान अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जाँच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या किसी अन्य स्थान पर हुई घटनाओं के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं,तो अतिरिक्त एफआईआर भी दर्ज की जा सकती हैं। पुलिस का कहना है कि जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों तथा जाँच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को हिंसा,तोड़फोड़ या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है,लेकिन यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा होती है या सरकारी कार्य में बाधा पहुँचती है,तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की विभिन्न टीमें इस पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जाँच कर रही हैं। वीडियो फुटेज,सीसीटीवी रिकॉर्डिंग,इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जाँच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के दायरे में रहकर की जाएगी तथा जिन लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होगी,उनके खिलाफ विधि सम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।