ग्लासगो,31 जुलाई (युआईटीवी)- भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से एक और शानदार खबर आई है। भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों की 110+ किलोग्राम भार वर्ग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात खेले गए इस मुकाबले में लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। वह स्वर्ण पदक से महज एक किलोग्राम पीछे रह गए। न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने कुल 389 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता,जबकि इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स ने 356 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। लवप्रीत का यह प्रदर्शन न केवल भारत के लिए गर्व का क्षण रहा,बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग लगातार विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है।
प्रतियोगिता की शुरुआत से ही लवप्रीत सिंह आत्मविश्वास से भरे नजर आए। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने बेहतरीन तकनीक और दमदार ताकत का प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक वजन उठाया। अपने पहले प्रयास में उन्होंने 168 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर शानदार शुरुआत की। इसके बाद दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम का वजन भी बिना किसी परेशानी के उठा लिया। तीसरे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार प्रदर्शन के बाद लवप्रीत स्नैच स्पर्धा में शीर्ष स्थान पर पहुँच गए और उन्होंने न्यूजीलैंड के डेविड लिटी पर 10 किलोग्राम की महत्वपूर्ण बढ़त बना ली थी।
स्नैच में मिली बढ़त ने भारतीय समर्थकों की उम्मीदें और बढ़ा दी थीं। ऐसा लग रहा था कि लवप्रीत स्वर्ण पदक जीतने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। हालाँकि,मुकाबले का असली फैसला क्लीन एंड जर्क स्पर्धा में होना था,जहाँ खिलाड़ियों की ताकत के साथ उनकी रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है। लवप्रीत ने यहाँ भी शानदार शुरुआत की और अपने पहले प्रयास में 205 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने 212 किलोग्राम वजन भी सफलतापूर्वक उठाकर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी।
प्रतियोगिता अपने अंतिम और सबसे रोमांचक चरण में पहुँच चुकी थी। लवप्रीत ने स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने के इरादे से तीसरे प्रयास में 217 किलोग्राम वजन उठाने का फैसला किया। यदि वह इस प्रयास में सफल हो जाते तो स्वर्ण पदक लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन अत्यधिक दबाव और कठिन चुनौती के बीच उनका अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। इसी अवसर का फायदा न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने उठाया। स्नैच में 166 किलोग्राम वजन उठाने वाले लिटी ने क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन करते हुए 223 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके साथ उनका कुल वजन 389 किलोग्राम पहुँच गया और उन्होंने महज एक किलोग्राम की बढ़त के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। लवप्रीत को 388 किलोग्राम के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा,जबकि इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स 356 किलोग्राम के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
हालाँकि,लवप्रीत स्वर्ण पदक से बेहद करीब पहुँचकर चूक गए,लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने जिस तरह स्नैच स्पर्धा में सभी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा और अंत तक स्वर्ण पदक के लिए संघर्ष किया,उसने भारतीय वेटलिफ्टिंग की बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने फिर से साबित कर दिया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि एक किलोग्राम का यह अंतर बताता है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों के बीच मुकाबला कितना कड़ा होता है,जहाँ एक छोटी सी चूक भी पदक का रंग बदल सकती है।
लवप्रीत सिंह की सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत,संघर्ष और अनुशासन की कहानी छिपी है। उनका जन्म 6 सितंबर 1997 को पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गाँव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने अपने आसपास के खिलाड़ियों को वेटलिफ्टिंग करते देखा और उसी से प्रेरित होकर इस खेल में अपना भविष्य बनाने का सपना देखा। वर्ष 2010 में मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण शुरू किया। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। लगातार मेहनत और नियमित अभ्यास ने उन्हें धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
लवप्रीत ने शुरुआती वर्षों में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हुए कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी मेहनत और लगातार बेहतर प्रदर्शन का ही परिणाम था कि वर्ष 2017 में उन्हें पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली। राष्ट्रीय शिविर में उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण,अनुभवी कोचों का मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएँ मिलीं,जिससे उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ।
अपने करियर की शुरुआत में लवप्रीत 105 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते थे। इस दौरान उन्होंने जूनियर कॉमनवेल्थ और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। बाद में अंतर्राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ द्वारा नई भार श्रेणियाँ लागू किए जाने के बाद वह 109 किलोग्राम वर्ग में चले गए। इस बदलाव के बावजूद उनके प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आई। वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। उसी वर्ष आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया और खुद को भारत के प्रमुख वेटलिफ्टरों में शामिल कर लिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह रजत पदक लवप्रीत सिंह के करियर की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस प्रदर्शन ने यह संकेत भी दिया है कि वह भविष्य की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं,विशेषकर विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भारत के लिए पदक जीतने की क्षमता रखते हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह अपनी तकनीक और क्लीन एंड जर्क स्पर्धा में थोड़ी और मजबूती हासिल करते हैं तो आने वाले वर्षों में विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
भारत के लिए यह रजत पदक केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह देश में वेटलिफ्टिंग के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का प्रमाण भी है। लवप्रीत सिंह ने अपने संघर्ष,समर्पण और शानदार प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियाँ भी मजबूत इरादों के सामने टिक नहीं सकतीं। स्वर्ण पदक भले ही इस बार उनसे एक किलोग्राम दूर रह गया,लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया और यह विश्वास भी जगाया कि आने वाले वर्षों में वह भारत के लिए और भी बड़ी सफलताएँ हासिल करेंगे।
