ग्लासगो,31 जुलाई (युआईटीवी)- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए एथलेटिक्स से एक और अच्छी खबर सामने आई है। पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के तीनों एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने कठिन परिस्थितियों में खेले गए क्वालीफाइंग राउंड को सफलतापूर्वक पार करते हुए पदक मुकाबले में प्रवेश किया। तेज हवाओं और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने संयम और अनुभव का परिचय दिया तथा शीर्ष-12 खिलाड़ियों में स्थान बनाकर भारत की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाए रखा।
गुरुवार को आयोजित क्वालीफाइंग राउंड ग्रुप-ए में मौसम खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना रहा। तेज हवाओं के कारण जैवलिन को सही दिशा और दूरी तक पहुँचाना आसान नहीं था। कई दिग्गज खिलाड़ियों को भी अपने प्रदर्शन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात में खिलाड़ियों के लिए लंबी दूरी हासिल करने से अधिक महत्वपूर्ण फाइनल में जगह बनाना था। भारतीय खिलाड़ियों ने इसी रणनीति के साथ मुकाबले में हिस्सा लिया और बिना अनावश्यक जोखिम उठाए सुरक्षित तरीके से क्वालीफिकेशन हासिल किया।
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने पूरे मुकाबले के दौरान अपना अनुभव और धैर्य दिखाया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया,जो उन्हें क्वालीफाइंग राउंड में पाँचवें स्थान तक ले जाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। फाइनल में स्थान लगभग सुनिश्चित होने के बाद नीरज ने अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में हिस्सा नहीं लिया। यह फैसला उनकी रणनीति का हिस्सा माना गया,ताकि फाइनल से पहले वह अपनी ऊर्जा बचाकर रख सकें और चोट के किसी भी खतरे से बचें।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला मुकाबला खेल रहे नीरज शुरुआत से ही आत्मविश्वास से भरे नजर आए। हालाँकि,उनका थ्रो उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी कम रहा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए जोखिम लेने के बजाय सुरक्षित प्रदर्शन को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि फाइनल में मौसम अनुकूल रहने पर नीरज कहीं अधिक लंबी दूरी तक भाला फेंक सकते हैं और स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदारों में बने रहेंगे।
भारत के दूसरे खिलाड़ी रोहित यादव ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 78.37 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। उन्होंने पूरे क्वालीफाइंग दौर में निरंतरता दिखाई और नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। रोहित ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखा और अपनी तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए शीर्ष-12 खिलाड़ियों में जगह बनाई। उनका यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वह फाइनल में भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।
यशवीर सिंह ने भी प्रभावित किया और 78.36 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ दसवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में प्रवेश किया। रोहित यादव और यशवीर सिंह के प्रदर्शन में मात्र एक सेंटीमीटर का अंतर रहा,जो इस स्पर्धा की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने साबित किया कि वे बड़े मंच पर दबाव झेलने और महत्वपूर्ण मौकों पर बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
भारत के तीनों खिलाड़ियों का एक साथ फाइनल में पहुँचना भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत के पास पदक जीतने के कई अवसर बन गए हैं। जहाँ नीरज चोपड़ा स्वर्ण पदक के मजबूत दावेदार हैं, वहीं रोहित यादव और यशवीर सिंह भी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से पदक की दौड़ में चुनौती पेश कर सकते हैं।
क्वालीफाइंग राउंड में श्रीलंका के रुमेश पथिराज ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 82.84 मीटर का शानदार थ्रो कर शीर्ष स्थान हासिल किया। चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार खुद को सबसे बेहतर ढंग से ढाला और सभी खिलाड़ियों में सबसे लंबी दूरी दर्ज की। उनके प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि फाइनल में भी वह पदक के प्रबल दावेदार होंगे।
ग्रेनाडा के दो बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स ने 81.29 मीटर का थ्रो कर दूसरा स्थान हासिल किया। विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले पीटर्स से फाइनल में भी कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। दक्षिण अफ्रीका के डौव स्मिट ने 80.64 मीटर के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया और उन्होंने भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
इंग्लैंड के बेन ईस्ट ने 80.38 मीटर का थ्रो कर चौथा स्थान हासिल किया और नीरज चोपड़ा से आगे रहे। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर ने 78.91 मीटर, पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 78.63 मीटर,बहामास के कीशॉन स्ट्रैचन ने 78.60 मीटर, त्रिनिदाद और टोबैगो के केशॉर्न वॉलकॉट ने 78.26 मीटर तथा नाइजीरिया के चिनेचेरेम न्नामदी ने 75.27 मीटर का थ्रो कर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।
इस क्वालीफाइंग राउंड की सबसे खास बात यह रही कि केवल चार खिलाड़ी ही 80 मीटर का आँकड़ा पार कर सके। प्रतियोगिता के लिए निर्धारित 84 मीटर के सीधे क्वालीफिकेशन मानक तक कोई भी खिलाड़ी नहीं पहुँच पाया। इससे साफ है कि तेज हवाओं और कठिन मौसम का असर लगभग सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहता,तो कई खिलाड़ी 84 मीटर के आँकड़े को पार कर सकते थे।
भारतीय दल के लिए यह प्रदर्शन काफी उत्साहजनक माना जा रहा है। नीरज चोपड़ा पहले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े खिताब जीत चुके हैं और उनके पास बड़े मुकाबलों का अनुभव है। वहीं रोहित यादव और यशवीर सिंह लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार कर रहे हैं। तीनों खिलाड़ियों का फाइनल में पहुँचना इस बात का संकेत है कि भारतीय जैवलिन थ्रो अब केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहा,बल्कि देश के पास मजबूत और प्रतिस्पर्धी एथलीटों की नई पीढ़ी भी तैयार हो चुकी है।
फाइनल मुकाबले में मुकाबला और भी कड़ा होने की संभावना है। यदि मौसम अनुकूल रहता है तो खिलाड़ियों के बीच 85 मीटर या उससे अधिक दूरी तक भाला फेंकने की प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। ऐसे में नीरज चोपड़ा के अनुभव,तकनीक और बड़े मंच पर दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें स्वर्ण पदक का प्रमुख दावेदार बनाती है। वहीं रोहित यादव और यशवीर सिंह भी अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब पहुँचकर भारत के लिए पदक की संभावनाओं को और मजबूत कर सकते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के एथलेटिक्स मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों का अब तक का प्रदर्शन उम्मीद जगाने वाला रहा है। पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा के फाइनल में तीन भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी न केवल देश के लिए गर्व की बात है,बल्कि यह भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का भी प्रमाण है। अब पूरे देश की निगाहें फाइनल मुकाबले पर होंगी,जहाँ भारतीय खिलाड़ी पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।
