केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी (तस्वीर क्रेडिट@IndianInfoGuid)

केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपये से समुद्री तेल-गैस खोज को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली,1 अगस्त (युआईटीवी)- देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल एवं प्राकृतिक गैस उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ यानी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू करने के लिए 84,084 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि यह योजना भारत के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद विशाल तेल और गैस संसाधनों की खोज को नई गति देगी और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि ‘समुद्र मंथन’ योजना केवल तेल और गैस की खोज तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र के पूरे तंत्र को आधुनिक तकनीक,उन्नत अवसंरचना और वैश्विक स्तर की कार्यप्रणाली से मजबूत बनाना है। मंत्रालय के अनुसार,यह योजना देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने, आयात पर निर्भरता कम करने,निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक व्यापक पहल है।

सरकार ने बताया कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रस्तुत किए गए उस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है,जिसमें उन्होंने भारत की विशाल समुद्री ऊर्जा क्षमता का उपयोग करने के लिए आधुनिक युग के ‘समुद्र मंथन’ की आवश्यकता पर बल दिया था। सरकार का कहना है कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार मौजूद हैं, जिनका वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों की सहायता से दोहन किया जा सकता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए यह राष्ट्रीय योजना तैयार की गई है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, ‘समुद्र मंथन’ योजना के अंतर्गत अपतटीय ऊर्जा खोज से जुड़े पूरे मूल्य श्रृंखला तंत्र को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय आँकड़ों का संग्रह,उनका वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रसंस्करण किया जाएगा,जिससे समुद्र के भीतर मौजूद संभावित तेल और गैस भंडारों की अधिक सटीक पहचान संभव हो सकेगी। आधुनिक डेटा तकनीकों का उपयोग कर खोज कार्य को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जाएगा।

योजना के अंतर्गत गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोजी ड्रिलिंग को भी तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के कई समुद्री क्षेत्रों में अभी तक व्यापक स्तर पर अन्वेषण नहीं हुआ है। नई योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से वैज्ञानिक तरीके से ड्रिलिंग की जाएगी,जिससे नए ऊर्जा संसाधनों की खोज की संभावनाएं बढ़ेंगी।

इसके अलावा फ्रंटियर बेसिनों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ये वे क्षेत्र हैं,जहाँ अभी तक तेल और गैस की खोज सीमित रही है,लेकिन भू-वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर वहाँ ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों को भी व्यवस्थित रूप से विकसित करना है,ताकि देश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू साझा अपतटीय उत्पादन और परिवहन अवसंरचना का विकास है। सरकार का मानना है कि यदि विभिन्न परियोजनाओं के लिए साझा सुविधाएँ विकसित की जाती हैं,तो लागत में कमी आएगी,परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। इसके साथ ही एकीकृत तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र विकसित करने की भी योजना बनाई गई है,जिससे घरेलू उद्योगों को नई संभावनाएँ मिलेंगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘समुद्र मंथन’ योजना में केवल भौतिक अवसंरचना ही नहीं,बल्कि डिजिटल प्रबंधन प्रणाली,क्षमता निर्माण,आधुनिक तकनीकों को अपनाने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। इसका उद्देश्य भारत में अपतटीय तेल और गैस क्षेत्र के लिए एक आधुनिक,पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है,जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो।

सरकार का अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से लगभग 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट से अधिक नए तेल और गैस भंडारों की खोज की जा सकती है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है,तो भारत के घरेलू ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है,जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार का मानना है कि इस योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इससे रोजगार के व्यापक अवसर भी पैदा होंगे। अपतटीय अन्वेषण, ड्रिलिंग,इंजीनियरिंग,विनिर्माण,लॉजिस्टिक्स, समुद्री सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे स्थानीय उद्योगों और सेवा क्षेत्रों को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।

‘समुद्र मंथन’ योजना को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से भी जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आधुनिक तकनीकों के विकास में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। इससे भारत केवल ऊर्जा उत्पादन में ही नहीं,बल्कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी मशीनरी,उपकरणों और सेवाओं के निर्माण में भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

मंत्रालय के अनुसार,इस योजना से तेल एवं गैस खोज और उत्पादन से जुड़े पूरे मूल्य श्रृंखला तंत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होने की संभावना है। इससे उद्योगों का विस्तार होगा,अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और देश की आर्थिक वृद्धि को दीर्घकालिक आधार प्राप्त होगा। निजी क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से नई तकनीकों और विशेषज्ञता का लाभ भी भारत को मिलेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में अपस्ट्रीम ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इनमें लगभग पूरे अपतटीय क्षेत्र को अन्वेषण के लिए खोलना,कानूनी और अनुबंध संबंधी ढाँचे का आधुनिकीकरण तथा राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को मजबूत करना जैसे कदम शामिल हैं। इन सुधारों के कारण ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का वातावरण पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुआ है और अब ‘समुद्र मंथन’ योजना इन सुधारों को अगले स्तर तक ले जाने का कार्य करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में यदि भारत अपने समुद्री क्षेत्रों में उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में सफल रहता है,तो इससे न केवल ऊर्जा आयात पर होने वाला खर्च कम होगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में देश की स्थिति भी मजबूत होगी। साथ ही स्वच्छ,आधुनिक और तकनीक आधारित ऊर्जा अवसंरचना के विकास से भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी।

केंद्र सरकार का विश्वास है कि ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत में अपतटीय तेल एवं गैस खोज के नए युग की शुरुआत करेगी। रणनीतिक सरकारी निवेश,अत्याधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय अवसंरचना और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से यह योजना देश को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ औद्योगिक विकास,रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी। यही कारण है कि इस योजना को भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है।