इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (तस्वीर क्रेडिट@Renardpaty)

अवैध प्रवास पर इटली का सख्त रुख,जॉर्जिया मेलोनी ने शेंगेन व्यवस्था निलंबित करने की चेतावनी दी,स्पेन से बढ़ा कूटनीतिक तनाव

रोम,1 अगस्त (युआईटीवी)- यूरोप में अवैध प्रवास का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने घोषणा की है कि उनकी सरकार देश की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असाधारण कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बनी रहती हैं,तो इटली स्पेन के साथ शेंगेन व्यवस्था के तहत मिलने वाली मुक्त आवाजाही को अस्थायी रूप से निलंबित करने जैसे कदम पर भी विचार कर सकता है। इस बयान के बाद इटली और स्पेन के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है,जबकि यूरोप में प्रवासन नीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि उत्तरी अफ्रीका से स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा पहुँचने की कोशिश कर रहे बड़ी संख्या में प्रवासियों की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। उनके अनुसार,यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि अनियंत्रित और अवैध प्रवासन यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि इटली इस स्थिति को केवल देखकर चुप नहीं बैठ सकता और सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।

मेलोनी ने बताया कि उन्होंने इटली के गृह मंत्री माटेओ पियांटेडोसी से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने कहा कि सरकार संबंधित विभागों की बैठक बुला रही है और इन बैठकों के बाद ऐसे विशेष कदम उठाए जाएँगे,जिनका उद्देश्य सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करना और नागरिकों की रक्षा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संभावित कदमों में स्पेन के साथ शेंगेन व्यवस्था को अस्थायी रूप से निलंबित करने का विकल्प भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में दोहराया कि उनकी सरकार अवैध प्रवासन के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि सीमा की रक्षा करना,मानव तस्करी के नेटवर्क को समाप्त करना और अवैध रूप से प्रवेश करने वालों की प्रभावी वापसी सुनिश्चित करना उनकी सरकार की प्राथमिक नीति है। उनके अनुसार,इटली की सुरक्षा और यूरोप की सीमाओं की रक्षा के लिए सख्त निर्णय लेने की आवश्यकता है।

इटली की सरकार के इस रुख को उप प्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी का भी समर्थन मिला। तजानी ने स्पेन सरकार के उस निर्णय की कड़ी आलोचना की,जिसके तहत बड़ी संख्या में अनियमित प्रवासियों को स्पेनिश और यूरोपीय नागरिकता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल गलत संदेश देता है,बल्कि मानव तस्करी को भी बढ़ावा दे सकता है।

एंटोनियो तजानी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह स्पेन के लिए शेंगेन व्यवस्था को बंद करने के पक्ष में हैं और उन्हें गृह मंत्री माटेओ पियांटेडोसी के प्रयासों पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि अनियमित और अनियंत्रित प्रवासन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उनके अनुसार,यदि बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की जाती है, तो इससे और अधिक लोग यूरोप में अवैध तरीके से प्रवेश करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

इटली के नेताओं की ये प्रतिक्रियाएँ उस समय सामने आई हैं,जब स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा में बड़ी संख्या में प्रवासी मोरक्को से समुद्र के रास्ते पहुँचने की कोशिश करते दिखाई दिए। जानकारी के अनुसार,सैकड़ों लोगों ने तैरकर या हवा से भरे उपकरणों की सहायता से समुद्र पार करने का प्रयास किया। इस घटना ने एक बार फिर यूरोप की सीमा सुरक्षा और प्रवासन नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सेउटा भौगोलिक रूप से उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन का एक स्वायत्त क्षेत्र है,जिसकी सीमा मोरक्को से लगती है। यही कारण है कि यह क्षेत्र लंबे समय से अफ्रीका से यूरोप पहुँचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। समय-समय पर यहाँ बड़ी संख्या में लोग समुद्र या सीमा बाड़ पार कर यूरोप में प्रवेश का प्रयास करते रहे हैं।

हालिया घटनाओं के बाद स्पेन सरकार ने भी सीमा सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। यूरोपीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार,स्पेन ने घोषणा की है कि सेउटा में अतिरिक्त सैनिकों और सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी,ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार,बड़ी संख्या में प्रवासियों के समुद्र के रास्ते पहुँचने की कोशिश के दौरान कई लोगों की जान भी चली गई। बताया जा रहा है कि इस प्रयास में लगभग नौ लोगों की मौत हुई है,हालाँकि राहत और बचाव अभियान जारी है।

स्पेन सरकार का यह निर्णय सेउटा के क्षेत्रीय प्रशासन की अपील के बाद सामने आया। क्षेत्रीय अध्यक्ष ने बढ़ती प्रवासी संख्या को देखते हुए मैड्रिड से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने और अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि स्थानीय प्रशासन के लिए अकेले इस स्थिति से निपटना कठिन होता जा रहा है और केंद्र सरकार की तत्काल सहायता आवश्यक है।

इधर, इटली के बयानों पर स्पेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने एंटोनियो तजानी की टिप्पणियों को अनुचित और एक मित्र देश के लिए अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच एकजुटता और सहयोग की अपेक्षा की जाती है,न कि ऐसे सार्वजनिक बयान जो आपसी विश्वास को प्रभावित करें।

स्पेन के विदेश मंत्री ने यह भी घोषणा की कि उन्होंने इटली के राजदूत को तलब किया है ताकि इस मुद्दे पर स्पेन की आपत्ति औपचारिक रूप से दर्ज कराई जा सके। उन्होंने कहा कि जिस न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लेख इटली की ओर से किया जा रहा है,उसका हालिया सीमा घटनाओं से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनके अनुसार,इस प्रकार के सार्वजनिक बयान अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं और यूरोपीय सहयोग की भावना के अनुरूप नहीं हैं।

स्पेन का कहना है कि प्रवासन संकट केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है,बल्कि यह पूरे यूरोप के लिए साझा चुनौती है। इसलिए इसका समाधान भी सामूहिक प्रयासों और समन्वित नीतियों के माध्यम से ही संभव है। वहीं इटली का तर्क है कि यदि बाहरी सीमाओं की प्रभावी सुरक्षा नहीं होगी,तो पूरे यूरोप की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित होगी।

इस पूरे विवाद के बीच शेंगेन व्यवस्था को लेकर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शेंगेन व्यवस्था केवल इटली और स्पेन के बीच का कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं है। यह यूरोप के अनेक देशों के बीच लागू एक साझा व्यवस्था है,जिसके तहत सदस्य देशों के बीच सामान्य परिस्थितियों में सीमा जाँच नहीं की जाती और एक ही शेंगेन वीजा के आधार पर विभिन्न सदस्य देशों की यात्रा की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यूरोप के भीतर लोगों,व्यापार और पर्यटन की आसान आवाजाही सुनिश्चित करना है।

हालाँकि,शेंगेन नियमों के तहत किसी सदस्य देश को विशेष परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए अपनी आंतरिक सीमाओं पर अस्थायी जाँच बहाल करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसा कदम आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा,बड़े आयोजनों या गंभीर आपात स्थितियों के दौरान उठाया जाता है। इसलिए यदि इटली भविष्य में ऐसा निर्णय लेता है,तो उसका प्रभाव केवल स्पेन ही नहीं,बल्कि पूरे शेंगेन क्षेत्र की आवाजाही व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

यूरोप में पिछले कुछ वर्षों से अवैध प्रवासन सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में से एक बना हुआ है। भूमध्यसागर के रास्ते अफ्रीका और पश्चिम एशिया से आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या ने कई यूरोपीय देशों के सामने सुरक्षा,मानवीय सहायता और सीमा प्रबंधन जैसी चुनौतियाँ खड़ी की हैं। इटली लंबे समय से इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ से अधिक सहयोग और सख्त साझा नीति की माँग करता रहा है।

जॉर्जिया मेलोनी की सरकार पहले दिन से ही अवैध प्रवासन पर कठोर नीति अपनाने की पक्षधर रही है। उनकी सरकार का मानना है कि मानव तस्करी के नेटवर्क को समाप्त करने, समुद्री सीमाओं की निगरानी बढ़ाने और अवैध प्रवासियों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। दूसरी ओर,स्पेन का कहना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी समान रूप से आवश्यक हैं।

ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूरोप में प्रवासन का मुद्दा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह कूटनीतिक संबंधों,यूरोपीय एकजुटता और साझा नीतियों की भी परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इटली वास्तव में शेंगेन व्यवस्था के तहत सीमा नियंत्रण को अस्थायी रूप से लागू करता है या दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए कोई साझा समाधान निकाला जाता है। फिलहाल जॉर्जिया मेलोनी के सख्त बयान और स्पेन की तीखी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को यूरोपीय राजनीति के सबसे चर्चित विषयों में शामिल कर दिया है।