मुंबई,1 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आँकडों में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक के अनुसार,24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर बढ़कर 682.2354 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इससे पहले 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 1.08 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी। लगातार दो सप्ताह तक हुए इस इजाफे को भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति,वित्तीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार,विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस वृद्धि का सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी से आया है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है,क्योंकि इसके माध्यम से देश आयात भुगतान,विदेशी ऋणों के दायित्वों का निर्वहन और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
समीक्षा अवधि के दौरान देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। केंद्रीय बैंक के अनुसार,गोल्ड रिजर्व का मूल्य 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर हो गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों और आरबीआई द्वारा बनाए गए स्वर्ण भंडार के मूल्यांकन के कारण इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार होता है और यह विदेशी मुद्रा भंडार को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का होता है। इस सप्ताह इसमें भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार,विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर पर पहुँच गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मुख्य रूप से डॉलर के अलावा यूरो,ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के कुल मूल्य पर पड़ता है।
हालाँकि,इस अवधि में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। आँकड़ों के अनुसार,एसडीआर का मूल्य 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। एसडीआर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा सदस्य देशों को उपलब्ध कराया जाने वाला एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय आरक्षित संसाधन है,जिसका उपयोग वित्तीय जरूरतों के समय किया जा सकता है। हालाँकि,इसमें आई कमी का विदेशी मुद्रा भंडार की समग्र स्थिति पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं माना जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक के साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक के अनुसार,वर्ष की शुरुआत में वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ गिरावट देखने को मिली थी,लेकिन पिछले कुछ सप्ताहों से इसमें लगातार सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकेत देता है कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे फिर से मजबूत हो रही है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का विदेशी मुद्रा प्रबंधन संतुलित बना हुआ है।
गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया था। इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव,वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ते दबाव के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली। उस दौरान भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ गया था,जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने और विनिमय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से आरबीआई ने डॉलर की बिक्री की थी। इस हस्तक्षेप के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ कमी दर्ज की गई थी। हालाँकि,अब बाजार की स्थिति में सुधार के साथ विदेशी मुद्रा भंडार फिर से मजबूत होने लगा है। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक की नीतियां बाजार में संतुलन बनाए रखने में प्रभावी रही हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार पर लगातार नजर रखता है और केवल तब हस्तक्षेप करता है,जब बाजार में अत्यधिक अस्थिरता या अनावश्यक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं है,बल्कि बाजार में स्थिरता और संतुलन सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि समय-समय पर आवश्यकतानुसार विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की खरीद या बिक्री की जाती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे देश अपनी आयात आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम रहता है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भुगतान संबंधी दायित्वों को बिना किसी कठिनाई के निभा सकता है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक संकट,भू-राजनीतिक तनाव या वित्तीय बाजारों में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव निवेशकों के विश्वास पर भी पड़ता है। जब किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होता है,तो अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को उस देश की अर्थव्यवस्था पर अधिक भरोसा होता है। इससे विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी सहायता मिलती है और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहती है।
पिछले कुछ महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई अवसरों पर विदेशी मुद्रा बचाने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने देशवासियों से विदेशी मुद्रा के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील करते हुए विदेश यात्राओं को सीमित रखने,ईंधन की खपत कम करने और एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया है। उनका कहना रहा है कि यदि विदेशी मुद्रा का अनावश्यक उपयोग कम किया जाए,तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार और अधिक मजबूत हो सकता है तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ स्थिर रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह बना रहता है,तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुँच सकता है। साथ ही निर्यात में वृद्धि,सेवा क्षेत्र से होने वाली विदेशी मुद्रा आय और संतुलित आयात नीति भी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
लगातार दूसरे सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में हुई वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी ने देश की वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है। आने वाले समय में यदि यही रुझान जारी रहता है,तो भारत न केवल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का बेहतर ढंग से सामना कर सकेगा,बल्कि निवेश,व्यापार और वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में भी अपनी स्थिति और अधिक मजबूत बना सकेगा।
