मुंबई,5 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महँगाई दर का नया अनुमान जारी करते हुए इसे 5 प्रतिशत रहने का आकलन किया है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही यह भी आगाह किया है कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बनी अनिश्चितता के कारण निकट भविष्य में महँगाई पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है,लेकिन महँगाई के मोर्चे पर सतर्क रहने की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी जोखिम,वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले समय में महँगाई को प्रभावित कर सकते हैं।
संजय मल्होत्रा ने बताया कि पिछले 16 महीनों तक खुदरा महँगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी रही थी,लेकिन जून महीने में इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 4.4 प्रतिशत तक पहुँच गई। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहली तिमाही के दौरान महँगाई दर केंद्रीय बैंक के पहले के अनुमान से 30 आधार अंक कम रही। इससे यह संकेत मिलता है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का प्रभाव अभी सीमित स्तर पर रहा है और व्यापक स्तर पर मूल्य दबाव अपेक्षाकृत नियंत्रित बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिली है,लेकिन इसके बावजूद कोर महँगाई स्थिर बनी हुई है। कोर महँगाई वह होती है,जिसमें खाद्य और ईंधन जैसी अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता। मई और जून के दौरान यह दर 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही। यदि इसमें कीमती धातुओं को भी शामिल न किया जाए,तो कोर महँगाई 2.3 से 2.5 प्रतिशत के बीच रही,जो इस बात का संकेत है कि माँग आधारित महँगाई का दबाव अभी भी सीमित है।
गवर्नर ने कहा कि कोर महँगाई का नियंत्रित रहना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता माँग में अत्यधिक तेजी नहीं आई है और बाजार में कीमतों पर व्यापक दबाव नहीं बन रहा है। हालाँकि,खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कुल महँगाई दर पर दिखाई दे रहा है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए तिमाहीवार महँगाई के अनुमान भी जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार दूसरी तिमाही में खुदरा महँगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसके बाद तीसरी तिमाही में इसमें तेजी आने का अनुमान है और यह 5.9 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। चौथी तिमाही में महँगाई दर के कुछ कम होकर 5.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। वहीं,वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए महँगाई का अनुमान 5.3 प्रतिशत रखा गया है। इन अनुमानों से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में महँगाई पूरी तरह नियंत्रण में रहने की बजाय कुछ उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ सकती है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि महँगाई के अनुमान के साथ कई प्रकार के जोखिम भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अल-नीनो के संभावित प्रभाव का उल्लेख किया,जो मानसून और कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। यदि वर्षा सामान्य से कम होती है,तो खाद्य उत्पादन पर असर पड़ सकता है,जिससे फल,सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका रहती है। भारत जैसे देश में,जहाँ खाद्य वस्तुओं का महँगाई दर में बड़ा योगदान होता है,मानसून की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव पर भारतीय रिजर्व बैंक की नजर बनी हुई है। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं,तो इसका सीधा असर परिवहन लागत,ईंधन की कीमतों और कई अन्य वस्तुओं के उत्पादन खर्च पर पड़ सकता है। इससे महँगाई दर में और वृद्धि होने की संभावना रहती है।
भू-राजनीतिक तनाव को भी महँगाई के लिए एक प्रमुख जोखिम बताया गया है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। यदि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान आता है या आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होती है,तो उसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालाँकि,इन जोखिमों के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को मजबूत बताया है। गवर्नर ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि को घरेलू माँग का लगातार समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ भी मजबूत बनी हुई हैं। निजी और सार्वजनिक निवेश में सुधार देखने को मिल रहा है तथा निर्यात क्षेत्र भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इन सभी कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक का उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी समर्थन देना है। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए मौद्रिक नीति के निर्णय लिए जा रहे हैं। केंद्रीय बैंक आने वाले समय में घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर उपयुक्त कदम उठाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा अनुमान यह संकेत देता है कि महँगाई फिलहाल नियंत्रण से बाहर नहीं है,लेकिन आने वाले महीनों में कई बाहरी और आंतरिक कारकों के कारण इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों के लिए खाद्य आपूर्ति,ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि, नियंत्रित माँग आधारित महँगाई और बेहतर निवेश माहौल के सहारे आगे बढ़ रही है। हालाँकि,मौसम,अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक तनाव जैसे कारक आने वाले समय में महँगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह बदलती परिस्थितियों के अनुसार सतर्कता बनाए रखेगा,ताकि महँगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।
