राँची,5 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की माँग को लेकर राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र पिछले कई दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन के तहत आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बुधवार को अपने अनशन के चौथे दिन जल ग्रहण किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता और आग्रह के कारण उठाया गया कदम है तथा उनका आमरण अनशन और सत्याग्रह आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि देश के प्रख्यात नवप्रवर्तक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ उनकी वीडियो कॉल पर बातचीत हुई। इस दौरान सोनम वांगचुक ने उनसे स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की और पानी पीने का आग्रह किया। उनके अनुरोध का सम्मान करते हुए उन्होंने जल ग्रहण किया,लेकिन यह भी दोहराया कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता,तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा या एक भर्ती प्रक्रिया की नहीं है,बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता स्थापित करने की लड़ाई है।
देवेंद्र नाथ महतो ने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक ने आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और छात्रों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की सलाह दी। छात्र नेता ने सोनम वांगचुक से आग्रह किया कि यदि संभव हो तो वे राँची आकर आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करें और उनका मनोबल बढ़ाएँ। उनका कहना था कि ऐसे व्यक्तित्व का समर्थन युवाओं को नई ऊर्जा और विश्वास प्रदान करेगा।
राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा यह आंदोलन अब राज्यव्यापी स्वरूप ले चुका है। विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में शामिल हो रहे हैं और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि कई भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव रहा है और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच नहीं होती, तब तक योग्य अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल पाएगा।
आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पहली बार इस पूरे मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार छात्रों की भावनाओं और उनकी चिंताओं को पूरी गंभीरता से समझती है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार संवेदनशील है और किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जाँच जारी है और जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट मिलने के बाद संवैधानिक और कानूनी दायरे में उचित निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार किसी भी समस्या को अधूरा नहीं छोड़ती और जिस मुद्दे को हाथ में लेती है, उसका समाधान करने का पूरा प्रयास करती है।
हालाँकि,मुख्यमंत्री के इस बयान के बावजूद आंदोलनरत छात्र फिलहाल आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। छात्रों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।
छात्र पिछले बारह दिनों से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना,झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जाँच कराना,ओएमआर शीट और मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिक करना तथा दोनों भर्ती आयोगों में व्यापक संस्थागत सुधार लागू करना शामिल है। छात्रों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनेगी,तब तक युवाओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा।
आंदोलनकारी छात्रों के एक गुट ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया,तो 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन होगा,जिसका उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने अपील की है कि राज्य के अधिक से अधिक युवा इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
इस बीच,कथित परीक्षा अनियमितताओं की जाँच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जाँच एजेंसी ने राज्य के विभिन्न जिलों में कई स्थानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार,जाँच के दौरान लैपटॉप,मोबाइल फोन,बैंक से जुड़े दस्तावेज,ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियाँ तथा अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जाँच की जा रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि हुई थी या नहीं।
जाँच एजेंसियों का कहना है कि सभी साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जा रहा है और यदि किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है,तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जाँच जारी है और एजेंसियाँ किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर निशाना साध रहा है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जाँच कराने,दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और छात्रों की मांगों को शीघ्र स्वीकार करने की माँग की है। विपक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए,तो युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होगा।
दूसरी ओर,सरकार का कहना है कि वह किसी भी मामले में जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय तथ्यों और जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी। सरकार का दावा है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है,तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएँगे।
फिलहाल राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के जल ग्रहण करने के बावजूद उनका आमरण अनशन समाप्त नहीं हुआ है और आंदोलन पहले की तरह जारी है। अब सभी की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई,जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट और आंदोलनकारियों द्वारा घोषित विधानसभा घेराव कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच संवाद से समाधान निकलता है या फिर यह आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।
