मुंबई,5 अगस्त (युआईटीवी)- देशभर में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर बढ़ता छात्र असंतोष अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। दिल्ली से लेकर झारखंड तक हजारों छात्र पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और निष्पक्ष जाँच की माँग को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं। झारखंड में चल रहे आंदोलन को अब विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन मिलने लगा है। इसी क्रम में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और छात्रों के संघर्ष पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के प्रति संवेदना जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर देश के युवाओं को इस तरह की परिस्थितियों का सामना कब तक करना पड़ेगा।
सोनाक्षी सिन्हा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा करते हुए एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को इस तरह की स्थिति से गुजरते देखना बेहद दुखद है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “हमारे देश के छात्रों को ऐसी स्थिति से गुजरते हुए देखना बहुत दुखद है। यह सब कब रुकेगा?” अभिनेत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया और बड़ी संख्या में लोगों ने उनके इस बयान का समर्थन किया। कई युवाओं ने इसे छात्रों के पक्ष में उठी एक महत्वपूर्ण आवाज बताया।
झारखंड में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर व्यापक आंदोलन चल रहा है। राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव रहा है और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी तो लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा।
छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना,पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय से जाँच कराना,ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिक करना तथा भर्ती आयोगों में व्यापक सुधार लागू करना शामिल है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे,जब तक उनकी मांगों पर सरकार स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं लेती।
झारखंड में यह आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। शुरुआत में राज्य के विभिन्न जिलों में अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे थे। छात्र अपने-अपने जिलों में धरना देकर सरकार तक अपनी बात पहुँचाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन 29 जुलाई को आंदोलन ने नया मोड़ लिया,जब आयोजकों ने ‘महा आंदोलन’ और संविधान मार्च का आह्वान किया। इसके तहत राज्य के सभी जिलों के अभ्यर्थियों से राजधानी रांची पहुँचने की अपील की गई। इस आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला और लगभग पाँच हजार छात्र राँची पहुँचे। उन्होंने शांतिपूर्ण मार्च निकालते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग दोहराई।
आंदोलन के दौरान छात्रों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं,बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि भर्ती परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहेंगे तो मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का सरकारी व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाएगा। इसलिए वे चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
इस बीच, कथित परीक्षा अनियमितताओं की जाँच भी जारी है। जाँच एजेंसियाँ विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और कई स्थानों पर छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्यों की गहन जाँच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं,तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
छात्र आंदोलन को लगातार सामाजिक समर्थन भी मिल रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों,शिक्षाविदों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की है। अब अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के बयान के बाद यह मुद्दा मनोरंजन जगत में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालाँकि,उन्होंने किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन नहीं किया,लेकिन छात्रों की पीड़ा और उनके भविष्य को लेकर चिंता अवश्य व्यक्त की। उनके संदेश को कई लोगों ने युवाओं के संघर्ष के प्रति संवेदनशील प्रतिक्रिया के रूप में देखा है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बहस जारी है। बड़ी संख्या में युवा भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग करते हुए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठ जाएँ,तो उनका मनोबल टूट जाता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करे जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
दूसरी ओर,राज्य सरकार का कहना है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है,तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं आंदोलनकारी छात्र चाहते हैं कि केवल आश्वासन के बजाय जल्द-से-जल्द ठोस निर्णय लिया जाए,ताकि योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
सोनाक्षी सिन्हा के पेशेवर जीवन की बात करें तो वह हाल ही में फिल्म सिस्टम में दिखाई दी हैं। यह एक कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है,जिसमें उन्होंने नेहा राजवंश नाम की एक महत्वाकांक्षी सरकारी वकील की भूमिका निभाई है। फिल्म में उनके साथ ज्योतिका और आशुतोष गोवारिकर भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। इसके अलावा प्रीति अग्रवाल, आदिनाथ कोठारे,आश्रिया मिश्रा,गौरव पांडे और सयानदीप गुप्ता ने भी महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं। यह फिल्म 22 मई से ओटीटी मंच अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है और इसे दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन जारी है और छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर,समाज के विभिन्न वर्गों से उन्हें मिल रहा समर्थन इस आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला रहा है। ऐसे समय में सोनाक्षी सिन्हा जैसे चर्चित चेहरे का छात्रों के पक्ष में संवेदनशील प्रतिक्रिया देना इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रमुखता दिला सकता है। अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई, जाँच एजेंसियों की प्रगति और आंदोलन के आगामी चरण पर टिकी हुई है।
