मुंबई,7 अगस्त (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी और आर्थिक मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। चेक बाउंस मामले में पहले से कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे अभिनेता के खिलाफ अब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। बैंक ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित उनकी दो संपत्तियों को नीलामी के लिए चिह्नित करते हुए वहाँ आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया है। बैंक का कहना है कि अभिनेता पर करोड़ों रुपये का बकाया ऋण है,जिसकी वसूली के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजपाल यादव की आर्थिक स्थिति और उनकी फिल्म निर्माण से जुड़े पुराने वित्तीय विवादों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार,सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई शाखा ने शाहजहांपुर स्थित राजपाल यादव की संपत्तियों पर नीलामी संबंधी नोटिस जारी किया है। बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक अभिनेता पर कुल 16 करोड़ 61 लाख 64 हजार रुपये का ऋण बकाया है। बैंक का दावा है कि लंबे समय से ऋण का भुगतान नहीं होने के कारण उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरवी रखी गई संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर उनकी नीलामी की कार्रवाई शुरू करनी पड़ी है। बैंक का उद्देश्य बकाया राशि की वसूली करना है और इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं।
बैंक द्वारा जिन संपत्तियों को नीलामी के लिए सूचीबद्ध किया गया है,उनमें शाहजहांपुर शहर में स्थित एक संपत्ति के साथ-साथ गाँव में स्थित खेत और मकान भी शामिल हैं। बैंक ने इन दोनों संपत्तियों का आरक्षित मूल्य 3 करोड़ 19 लाख 26 हजार रुपये निर्धारित किया है। बैंक की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार इन संपत्तियों की ई-नीलामी 9 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। यदि नीलामी प्रक्रिया सफल रहती है तो प्राप्त राशि का उपयोग अभिनेता के बकाया ऋण की आंशिक वसूली के लिए किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला उस ऋण से जुड़ा है,जो राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिया था। फिल्म निर्माण के दौरान उन्होंने बैंक से आर्थिक सहायता प्राप्त की थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी,जिसके कारण निवेश की भरपाई नहीं हो पाई। फिल्म के व्यावसायिक रूप से असफल रहने के बाद ऋण की किस्तों का नियमित भुगतान प्रभावित हुआ और समय के साथ ब्याज बढ़ने के कारण बकाया राशि लगातार बढ़ती चली गई। अब यह राशि 16 करोड़ रुपये से अधिक पहुँच चुकी है।
बैंक के दस्तावेजों के अनुसार,ऋण लेते समय राजपाल यादव ने अपनी पत्नी राधा यादव और अपनी मां गोदावरी यादव की संपत्तियों को भी गारंटर के रूप में गिरवी रखा था। यही कारण है कि बैंक अब उन संपत्तियों पर भी अपने अधिकार का उपयोग करते हुए कानूनी कार्रवाई कर रहा है। बैंक का कहना है कि ऋण अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि समय पर भुगतान नहीं किया जाता है,तो गिरवी रखी गई संपत्तियों की नीलामी की जा सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत शाहजहांपुर की संपत्तियों को नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है।
सूत्रों के अनुसार,केवल शाहजहांपुर ही नहीं,बल्कि मुंबई स्थित राजपाल यादव की कुछ अन्य संपत्तियों को लेकर भी बैंक की वसूली प्रक्रिया जारी है। हालाँकि,उन संपत्तियों के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बैंक फिलहाल अपने बकाया ऋण की वसूली के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई कर रहा है। यदि बकाया राशि का भुगतान निर्धारित समय में नहीं किया जाता है,तो अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजपाल यादव लंबे समय से हिंदी फिल्म उद्योग के लोकप्रिय हास्य अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने अभिनय के दम पर अनेक फिल्मों में अलग पहचान बनाई और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। हालाँकि,अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उनका कदम अपेक्षित सफलता नहीं दिला सका। ‘अता पता लापता’ उनके महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक थी,लेकिन फिल्म को दर्शकों का वैसा समर्थन नहीं मिला जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसका सीधा असर फिल्म की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और ऋण चुकाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई।
राजपाल यादव का नाम इससे पहले भी कानूनी मामलों में चर्चा में रहा है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन महीने की कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद अभिनेता पहले से ही कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे थे। अब बैंक की ओर से संपत्तियों की नीलामी की कार्रवाई शुरू होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दोनों मामलों का स्वरूप अलग-अलग है, लेकिन लगातार सामने आ रही कानूनी और वित्तीय परेशानियों ने अभिनेता को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति या संस्था बैंक से ऋण लेकर अपनी संपत्ति गिरवी रखती है और निर्धारित समय तक भुगतान नहीं कर पाती,तो बैंक को कानून के तहत गिरवी संपत्तियों को जब्त कर उनकी नीलामी करने का अधिकार प्राप्त होता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बैंक की बकाया राशि की वसूली करना होता है। यदि नीलामी से प्राप्त राशि पूरी देनदारी को पूरा नहीं कर पाती,तो बैंक शेष राशि की वसूली के लिए अन्य कानूनी विकल्प भी अपना सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक राजपाल यादव या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अभिनेता बैंक के साथ किसी समझौते की दिशा में प्रयास कर रहे हैं या नहीं। यदि निर्धारित तिथि से पहले बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाता है या कोई वैधानिक समाधान निकलता है,तो नीलामी प्रक्रिया में बदलाव संभव हो सकता है। फिलहाल बैंक ने अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कार्रवाई जारी रखी है।
फिल्म उद्योग में आर्थिक जोखिम कोई नई बात नहीं है। कई निर्माता और कलाकार फिल्मों में निवेश के लिए बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण लेते हैं। यदि फिल्म सफल होती है तो ऋण का भुगतान आसानी से हो जाता है,लेकिन फिल्म के असफल होने पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। राजपाल यादव का मामला भी इसी प्रकार का उदाहरण माना जा रहा है,जहाँ एक महत्वाकांक्षी फिल्म परियोजना की व्यावसायिक असफलता ने उन्हें गंभीर वित्तीय संकट में डाल दिया।
फिलहाल सभी की नजरें 9 सितंबर 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी पर टिकी हैं। यदि उससे पहले कोई समाधान नहीं निकलता है,तो शाहजहांपुर स्थित उनकी संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं,बैंक की वसूली कार्रवाई और अन्य कानूनी मामलों के बीच यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि अभिनेता अपनी वित्तीय और कानूनी चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।
