वाशिंगटन,7 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में अवैध प्रवासन को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक का दावा करते हुए कहा है कि अब तक 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को देश से निर्वासित किया जा चुका है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक विस्तृत फैक्ट शीट में यह जानकारी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि सत्ता में वापसी के बाद शुरू किए गए कड़े आव्रजन अभियान के तहत सीमा सुरक्षा को मजबूत करने,अवैध प्रवास पर रोक लगाने और सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल पात्र लोगों तक सीमित रखने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। फैक्ट शीट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित दो नए कार्यकारी आदेशों के साथ जारी की गई,जिनमें जन्मसिद्ध नागरिकता के कुछ प्रावधानों को सीमित करने और तथाकथित बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाने के निर्देश शामिल हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार,ट्रंप प्रशासन ने अब तक 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर भेजा है। प्रशासन का दावा है कि इन निर्वासित लोगों में हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए हजारों लोग भी शामिल हैं। हालाँकि,सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन लोगों को किन देशों में वापस भेजा गया,निर्वासन किस समयावधि में हुआ और विभिन्न देशों के अनुसार इनकी संख्या कितनी थी। प्रशासन ने निर्वासन से जुड़े विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं,लेकिन इसे अमेरिका की सीमा सुरक्षा और आंतरिक कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक अभियान बताया है।
व्हाइट हाउस ने यह भी दावा किया कि पिछले लगातार 15 महीनों में किसी भी अवैध प्रवासी को अमेरिका में रिहा नहीं किया गया। प्रशासन के अनुसार,यह स्थिति राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में लौटने के पहले सप्ताह में लिए गए सख्त फैसलों का परिणाम है। उस समय राष्ट्रपति ने दक्षिणी सीमा पर बढ़ते अवैध प्रवासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश के तहत अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई,सीमा नियंत्रण को मजबूत करने और पूर्व प्रशासन की आव्रजन नीतियों में बदलाव के निर्देश दिए गए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि इन उपायों के कारण सीमा पर अवैध प्रवेश के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और आव्रजन कानूनों का अधिक प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित हुआ है।
प्रशासन ने अपने बयान में यह भी कहा कि 14 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को करदाताओं के पैसे से संचालित सार्वजनिक सहायता योजनाओं से बाहर कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि सरकारी सहायता केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए,जो कानूनी रूप से इसके पात्र हैं। इसके अलावा प्रशासन ने दावा किया कि अवैध प्रवासियों को करदाताओं द्वारा वित्तपोषित एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य योजनाओं से भी वंचित कर दिया गया है। हालाँकि,व्हाइट हाउस ने इन योजनाओं के नाम,संबंधित राज्यों या प्रभावित लोगों की विस्तृत संख्या साझा नहीं की है। इसके बावजूद प्रशासन का कहना है कि इन कदमों से सरकारी खर्च में कमी आएगी और सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित दो नए कार्यकारी आदेशों ने भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। इनमें से एक आदेश के तहत कुछ श्रेणियों के बच्चों के लिए जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की व्यवस्था की गई है। अमेरिकी संविधान के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांत रही है,लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने के लिए नए कदम आवश्यक हैं। दूसरे कार्यकारी आदेश में संघीय एजेंसियों को बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ विदेशी नागरिक केवल अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं और जन्म के बाद वापस लौट जाते हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाना राष्ट्रीय हित में है।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में वीजा प्रणाली को और अधिक सख्त बनाने का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन के अनुसार,वीजा आवेदनों की जाँच प्रक्रिया को पहले से अधिक कठोर बनाया जा रहा है,ताकि सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके। इसके साथ ही 75 देशों के लिए वीजा प्रोसेसिंग निलंबित करने का भी दावा किया गया है। हालाँकि,प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये देश कौन-कौन से हैं,यह निलंबन कितनी अवधि तक प्रभावी रहेगा और किन वीजा श्रेणियों पर इसका असर पड़ेगा। व्हाइट हाउस का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और उन विदेशी नागरिकों को हतोत्साहित करना है जो वीजा की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुक जाते हैं।
फैक्ट शीट में अमेरिकी नागरिकता से जुड़े मामलों पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रशासन ने कहा कि वह ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए व्यापक अभियान चला रहा है, जिनमें कथित रूप से धोखाधड़ी के माध्यम से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की गई। व्हाइट हाउस के अनुसार,अब तक 88 लोगों के खिलाफ दावे किए गए हैं,जिन्हें अयोग्य होने के बावजूद अमेरिकी नागरिकता मिल गई थी। हालाँकि,प्रशासन ने इन व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है और न ही यह बताया है कि उनके खिलाफ किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कथित उल्लंघनों की प्रकृति और मामलों की वर्तमान स्थिति के बारे में भी कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इसके साथ ही नागरिकता परीक्षा में बदलाव का भी ऐलान किया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि संशोधित नागरिकता परीक्षा पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगी और इसके माध्यम से आवेदकों के अमेरिकी इतिहास,शासन व्यवस्था,संवैधानिक मूल्यों और नागरिक दायित्वों की बेहतर समझ का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रशासन का तर्क है कि अमेरिकी नागरिक बनने वाले लोगों को देश के इतिहास,लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक सिद्धांतों की पर्याप्त जानकारी होना आवश्यक है। इसलिए परीक्षा में किए गए बदलाव नागरिकता प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सार्थक बनाएंगे।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि प्रशासन राज्यवार मतदाता सूचियों की समीक्षा कर रहा है ताकि उनमें शामिल अवैध प्रवासियों के नाम हटाए जा सकें। प्रशासन का दावा है कि इस दिशा में हजारों नामों की पहचान की जा रही है,लेकिन अभी तक यह नहीं बताया गया कि किन राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है और अब तक कितने नाम हटाए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
ट्रंप प्रशासन लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसकी आव्रजन नीति का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा को मजबूत करना,अवैध प्रवासन को रोकना और सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल पात्र नागरिकों और कानूनी निवासियों तक सीमित रखना है। प्रशासन का मानना है कि कठोर आव्रजन नीतियां न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं,बल्कि श्रम बाजार,स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक कल्याण योजनाओं पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करेंगी।
हालाँकि,इन नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। नागरिक अधिकार संगठनों और आव्रजन विशेषज्ञों का एक वर्ग पहले भी इस प्रकार के कठोर कदमों पर चिंता जताता रहा है। उनका कहना है कि आव्रजन संबंधी नीतियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक अधिकारों का भी संतुलन बनाए रखना जरूरी है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उसके सभी कदम अमेरिकी कानूनों के अनुरूप हैं और देश की सुरक्षा तथा नागरिकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
फिलहाल व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट में प्रस्तुत आँकड़ों और दावों ने एक बार फिर अमेरिका की आव्रजन नीति को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले समय में इन कार्यकारी आदेशों के प्रभाव,संभावित कानूनी चुनौतियों और उनके व्यावहारिक परिणामों पर सभी की नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ट्रंप प्रशासन अपने दावों के समर्थन में आगे और कितने विस्तृत आँकड़े तथा आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करता है और इन नीतियों का अमेरिका की आंतरिक राजनीति, न्यायिक व्यवस्था तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
