मेटा (तस्वीर क्रेडिट@IndianInfoGuid)

मेटा के एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन पर सरकार की सख्त नजर,जवाबदेही और नियमों के अनुपालन पर होगी विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली,7 अगस्त (युआईटीवी)- भारत सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार आने वाले दिनों में सोशल मीडिया कंपनी मेटा के साथ अपनी बातचीत को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इस दौरान कंपनी के कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म, कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और भारतीय कानूनों के अनुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पारदर्शी तरीके से काम करें,उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और भारतीय नियमों का पूरी तरह पालन करें।

सरकारी सूत्रों के अनुसार,आगामी बैठकों में विशेष रूप से इस बात पर विचार किया जाएगा कि मेटा के एल्गोरिद्म किस आधार पर उपयोगकर्ताओं को विभिन्न प्रकार का कंटेंट दिखाते हैं। सरकार यह समझना चाहती है कि प्लेटफॉर्म पर कौन-सी तकनीकी प्रक्रियाएँ तय करती हैं कि किसी उपयोगकर्ता तक कौन-सा कंटेंट पहुँचेगा और किसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही यह भी जाँचा जाएगा कि कंपनी की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली भारतीय कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका तेजी से बढ़ी है। करोड़ों लोग समाचार,मनोरंजन,सामाजिक संवाद और अन्य जानकारियों के लिए इन मंचों का उपयोग करते हैं। ऐसे में कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म का प्रभाव भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही एल्गोरिद्म यह तय करते हैं कि किसी उपयोगकर्ता को कौन-सी पोस्ट,वीडियो या अन्य सामग्री दिखाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है,ताकि किसी प्रकार की भ्रामक, हानिकारक या कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री का अनावश्यक प्रसार न हो।

यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है,जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर हानिकारक सामग्री, डीपफेक और बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री के प्रसार को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता लगातार बढ़ रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ डीपफेक सामग्री का निर्माण पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। इससे गलत सूचना फैलने,किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुँचाने और सामाजिक भ्रम पैदा होने का खतरा भी बढ़ा है। इसी प्रकार बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को रोकना भी सरकार और तकनीकी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारत सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ इन मुद्दों पर अधिक प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था अपनाएं।

सूत्रों के मुताबिक,मेटा की वैश्विक टीम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में रहेगी। दोनों पक्ष तकनीकी और नियामकीय स्तर पर उन प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगे,जिनके माध्यम से प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहुंच और उसका वितरण तय होता है। सरकार इस बात पर भी जोर दे रही है कि यदि किसी प्रकार की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री सामने आती है,तो उसके खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जानकारी के अनुसार,केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मेटा के प्रतिनिधियों के साथ एक और बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली,एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा,कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है,जिसमें तकनीकी नवाचार और उपयोगकर्ता सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।

सरकार और मेटा के बीच जारी यह संवाद केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने और ऑनलाइन सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि देश में संचालित सभी डिजिटल मंचों को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ अपने प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़ाएँ और यह स्पष्ट करें कि उनकी तकनीकी प्रणालियाँ किस प्रकार काम करती हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के मामले में सार्वजनिक रूप से माफी माँगी है। इस घटना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली और उनकी आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। मेटा ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री की पोस्ट पर लगाई गई रोक कंपनी की गलती थी और इसे तकनीकी त्रुटि के रूप में देखा गया।

मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने इस मामले में सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि कंपनी इस गलती के लिए खेद व्यक्त करती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से संपर्क कर इस त्रुटि के लिए माफी माँगी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पोस्ट पर लगाया गया प्रतिबंध कंपनी की ओर से हुई गलती थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएँगे।

बुधवार को मेटा के एक वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ कमियों और तकनीकी त्रुटियों को स्वीकार किया। दोनों पक्षों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी,नियामकीय अनुपालन और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद आगे की विस्तृत वार्ताओं की रूपरेखा तैयार की गई।

मंत्री से मुलाकात से पहले मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के साथ भी अलग बैठक की थी। इस दौरान तकनीकी पहलुओं,प्लेटफॉर्म संचालन, नियामकीय अपेक्षाओं और भारतीय कानूनों के अनुरूप आवश्यक सुधारों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार,सरकार ने कंपनी के समक्ष अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से रखा और कहा कि भारतीय कानूनों का पूर्ण अनुपालन किसी भी डिजिटल मंच के लिए अनिवार्य है।

डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ऑनलाइन मंच सुरक्षित,पारदर्शी और जवाबदेह बने रहें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रभाव अब केवल संचार तक सीमित नहीं है,बल्कि वे जनमत,सामाजिक व्यवहार और सूचना के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए सरकार का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के संचालन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं और निर्णयों में अधिक पारदर्शिता आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच निरंतर संवाद से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है,जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,तकनीकी नवाचार और उपयोगकर्ता सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे। साथ ही कंपनियों के लिए यह भी आवश्यक होगा कि वे स्थानीय कानूनों और नियामकीय मानकों का सम्मान करें तथा आपत्तिजनक और अवैध सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करें।

फिलहाल केंद्र सरकार और मेटा के बीच प्रस्तावित बैठकों पर सभी की नजर बनी हुई है। इन बैठकों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता,कंटेंट मॉडरेशन और डिजिटल जवाबदेही के क्षेत्र में आगे किस प्रकार के सुधारात्मक कदम उठाए जाएँगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मेटा भारतीय कानूनों और सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रणालियों में क्या बदलाव करता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा तथा पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में किस प्रकार आगे बढ़ता है।