ईरान पर अमेरिका के नए हवाई हमले (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास धमाकों से बढ़ी हलचल,ईरान ने शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों से मुठभेड़ का किया दावा,समुद्री मार्ग खुलने की उम्मीद भी जगी

तेहरान,7 अगस्त (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। गुरुवार रात ईरान के दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत स्थित केश्म द्वीप के पास दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई देने से पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार,ये धमाके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रवेश द्वार के निकट ईरानी सशस्त्र बलों और कथित “शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों” के बीच हुई भिड़ंत के दौरान हुए। हालाँकि,ईरानी अधिकारियों ने इस संबंध में सीमित जानकारी साझा की है और घटना की विस्तृत जाँच जारी होने की बात कही है।

तस्नीम समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि धमाकों की आवाज स्थानीय समयानुसार रात लगभग 9 बजकर 40 मिनट पर सुनाई दी। एजेंसी का दावा है कि ईरानी नौसेना ने इस संघर्ष के दौरान महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है और इसके बारे में विस्तृत जानकारी आने वाले घंटों में जारी की जा सकती है। हालाँकि,घटना के समय किसी जहाज,सैन्य ठिकाने या अन्य प्रतिष्ठान को हुए नुकसान के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

होर्मोजगान प्रांत के राजनीतिक,सुरक्षा और सामाजिक मामलों के उप-गवर्नर अहमद नफीसी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केश्म द्वीप और प्रांतीय राजधानी बंदर अब्बास पर किसी हमले या किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्थिति सामान्य है और स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियां धमाकों के वास्तविक कारणों की जाँच कर रही हैं। उनके अनुसार,किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा।

केश्म द्वीप और बंदर अब्बास क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह इलाका विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक,होर्मुज जलडमरूमध्य, के निकट स्थित है। इस जलमार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस समुद्री रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि या सुरक्षा संबंधी घटना का प्रभाव केवल क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

धमाकों की घटना ऐसे समय में सामने आई है,जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल की खबरें भी सामने आ रही हैं। सऊदी अरब के समाचार चैनल अल हदथ और अल अरबिया ने उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए दोबारा खोलने की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। हालाँकि,इस समझौते को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।

रिपोर्टों के अनुसार,प्रस्तावित समझौते को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्वीकृति मिलनी शेष है। यदि परिषद इसकी मंजूरी दे देती है,तो आने वाले कुछ दिनों में इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समुद्री यातायात को सामान्य बनाना और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को फिर से सुनिश्चित करना है।

सूत्रों के मुताबिक,प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले जहाज ईरान के निकट स्थित समुद्री मार्ग का उपयोग करेंगे,जबकि बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की ओर वाले मार्ग से गुजरेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है,ताकि किसी भी प्रकार के टकराव या भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।

समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी बताई जा रही है कि जहाजों से किसी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क या अतिरिक्त सेवा शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा संबंधित पक्ष समुद्री क्षेत्र में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाने और तकनीकी प्रक्रियाओं में भी सहयोग करेंगे। यदि यह व्यवस्था लागू होती है,तो इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुचारु हो सकती है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि समझौते को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका और ईरान अपने शांति संबंधी समझौता ज्ञापन पर फिर से आगे बढ़ सकते हैं। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और सुरक्षित नौवहन से जुड़े प्रावधानों को दोबारा लागू किया जाएगा। इसे क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष बातचीत भले नहीं हो रही हो,लेकिन मध्यस्थ देशों के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क लगातार बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह संवाद अब अंतिम चरण में पहुँच चुका है और यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं तो निकट भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएँ की जा सकती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा स्थिति की पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण है। ईरान ने 28 फरवरी को इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली थी। इसके बाद ईरानी क्षेत्र पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों की घटनाओं के बाद ईरान ने अमेरिका,इजरायल और उनसे जुड़े जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस निर्णय के कारण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएँ बढ़ गई थीं।

होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र रहा है। यह केवल ईरान और ओमान के बीच स्थित एक समुद्री मार्ग नहीं है,बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से एशिया,यूरोप और अन्य क्षेत्रों तक पहुँचती है। इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या नौवहन में व्यवधान वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार को भी स्थिरता मिलेगी। हालाँकि,इसके लिए सभी संबंधित पक्षों की सहमति और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक होगा।

फिलहाल केश्म द्वीप के पास हुए धमाकों की वास्तविक प्रकृति और उससे जुड़े घटनाक्रम की जाँच जारी है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की संभावित योजना ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई उम्मीदें भी जगाई हैं। अब सभी की नजर ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के निर्णय,प्रस्तावित समझौते की औपचारिक घोषणा और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर बनी हुई है,क्योंकि इन घटनाओं का प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।