टाटा संस की एजीएम पहली बार स्थगित (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

टाटा संस की एजीएम पहली बार स्थगित,कोरम की कमी बनी वजह; चेयरमैन पद के उत्तराधिकार पर बढ़ी नजर

मुंबई,19 अगस्त (युआईटीवी)- टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस की प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम मंगलवार को स्थगित कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार,कंपनी के इतिहास में यह पहली बार है,जब टाटा संस की वार्षिक आम बैठक को टालना पड़ा है। बैठक स्थगित किए जाने की वजह कोरम की कमी बताई जा रही है। कोरम का मतलब बैठक में मौजूद सदस्यों की वह न्यूनतम संख्या है,जिसकी मौजूदगी के बिना कंपनी किसी बैठक में वैध रूप से निर्णय नहीं ले सकती।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एजीएम के दौरान आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका,जिसके चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक,यह घटनाक्रम सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ी एक पाबंदी के संदर्भ में सामने आया। हालाँकि,बैठक स्थगित होने और ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रम के बीच संबंध को लेकर कंपनी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

टाटा संस की एजीएम ऐसे समय में स्थगित हुई है,जब कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा इस पद पर नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय के बाद टाटा समूह के अगले चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि इन ट्रस्ट्स के पास सामूहिक रूप से टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश ऐसे समय में शुरू हुई है,जब टाटा समूह अपने पारंपरिक कारोबार के साथ-साथ कई नए और पूँजी-गहन क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स,विमानन और अन्य नए कारोबारों में समूह ने बड़े निवेश किए हैं। इन क्षेत्रों की विकास संभावनाओं के साथ-साथ पूँजी की जरूरत और कारोबार की लाभप्रदता भी समूह के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस में बड़ा स्वामित्व होने के कारण चेयरमैन पद के उत्तराधिकारी को लेकर उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालाँकि,अंतिम नियुक्ति सीधे किसी एक व्यक्ति के निर्णय से नहीं होगी। टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में निर्धारित औपचारिक समिति तंत्र के माध्यम से नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

टाटा संस के नेतृत्व में बदलाव की पृष्ठभूमि मई में हुई कंपनी की बोर्ड बैठक से भी जुड़ी बताई जा रही है। उस बैठक में एन. चंद्रशेखरन ने टाटा समूह के नए कारोबारों की स्थिति, उनके प्रदर्शन,विकास की संभावनाओं और भविष्य में आवश्यक पूँजी को लेकर बोर्ड के सामने जानकारी रखी थी। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और विमानन जैसे कारोबार प्रमुख थे। इन क्षेत्रों में समूह ने हाल के वर्षों में बड़े स्तर पर निवेश किया है और इनके विस्तार के लिए आगे भी पर्याप्त पूँजी की जरूरत पड़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार,इसी चर्चा के दौरान नोएल टाटा ने समूह के कुछ कारोबारों में हो रहे नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की थी। टाटा समूह के नए कारोबारों को लेकर यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि समूह लंबे समय से अपने कारोबार का विस्तार कर रहा है। हालाँकि,नए क्षेत्रों में शुरुआती वर्षों में भारी निवेश और नुकसान असामान्य नहीं माना जाता,लेकिन बड़े पूँजीगत निवेश के बीच कारोबार की दीर्घकालिक लाभप्रदता पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

एन. चंद्रशेखरन ने टाटा समूह की कमान सँभालने के दौरान समूह को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विस्तार की दिशा में आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने विमानन क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और बाद में विमानन कारोबार के पुनर्गठन की दिशा में भी कदम उठाए। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी समूह ने महत्वाकांक्षी योजनाएँ आगे बढ़ाईं।

चंद्रशेखरन का टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने समूह के साथ करीब चार दशक बिताए हैं। अगस्त में उन्होंने अपने वर्तमान कार्यकाल के 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का निर्णय लिया। उन्होंने टाटा समूह की कमान सँभालने के अपने कार्यकाल को सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी वाला अनुभव बताया था।

उनके फैसले के बाद अब टाटा समूह के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नए चेयरमैन के सामने समूह के मौजूदा कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में किए गए बड़े निवेश को लाभदायक बनाने की चुनौती होगी। साथ ही समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच तालमेल और दीर्घकालिक रणनीति को भी बनाए रखना होगा।

उत्तराधिकार की प्रक्रिया में नोएल टाटा की भूमिका ऐसे समय में चर्चा में आई है,जब वह खुद टाटा समूह की कई कंपनियों के बोर्ड में बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार,गैर-कार्यकारी निदेशकों के लिए लागू सेवानिवृत्ति नियमों के तहत 70 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद नवंबर में वह टाटा समूह की छह कंपनियों के बोर्ड से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में उनके आगामी निर्णय और टाटा संस के नए चेयरमैन के चयन में उनकी भूमिका पर कारोबारी जगत की नजर रहेगी।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच संबंध समूह के प्रशासनिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी के कारण समूह के शीर्ष स्तर पर होने वाले प्रमुख फैसलों में ट्रस्ट्स की भूमिका को विशेष महत्व मिलता है। हालाँकि,टाटा संस का संचालन एक निर्धारित कॉरपोरेट ढाँचे और बोर्ड प्रक्रियाओं के तहत होता है। इसलिए चेयरमैन के उत्तराधिकारी का चयन भी औपचारिक प्रक्रिया के जरिए ही किया जाएगा।

मंगलवार को एजीएम का स्थगित होना इस पूरी पृष्ठभूमि में और महत्वपूर्ण हो गया है। कंपनी के इतिहास में पहली बार वार्षिक बैठक का टलना अपने आप में असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है। हालाँकि,बैठक स्थगित होने का तत्काल कारण कोरम की कमी बताया गया है और इसके पीछे की विस्तृत परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक तौर पर अधिक जानकारी सामने आना बाकी है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि स्थगित एजीएम की अगली तारीख कब तय होती है और बैठक में कंपनी के शेयरधारकों के सामने कौन से महत्वपूर्ण मुद्दे आते हैं। इसके साथ ही टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश भी आने वाले महीनों में समूह की सबसे महत्वपूर्ण कॉरपोरेट प्रक्रियाओं में शामिल रहेगी।

एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल के समाप्त होने से पहले टाटा समूह को अपने अगले नेतृत्व का फैसला करना होगा। नए चेयरमैन के सामने एक ओर टाटा समूह की स्थापित कंपनियों की मजबूती बनाए रखने की चुनौती होगी,वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक्स, विमानन और अन्य उभरते कारोबारों में किए जा रहे निवेश से अपेक्षित परिणाम हासिल करना भी महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में टाटा संस की एजीएम का स्थगित होना भले ही तत्काल तौर पर कोरम से जुड़ा मामला हो,लेकिन यह घटनाक्रम समूह में चल रही व्यापक नेतृत्व और रणनीतिक बदलाव की पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है।