वॉशिंगटन/तेहरान,19 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बार फिर बड़ा और विवादित दावा किया है। ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग का एक नक्शा पोस्ट किया और इसे “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है,जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ है और सामान्य रूप से काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री मार्ग में बिछाई गई सभी माइंस को हटा दिया गया है या नष्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह लागू और प्रभावी होने का दावा किया। हालाँकि, समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार,होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही अभी सामान्य स्तर तक नहीं पहुँची है।
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के प्रमुख तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस उत्पादक देशों के लिए इसका रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है। खाड़ी क्षेत्र से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक ऊर्जा संसाधनों की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है। इसलिए यहां लंबे समय तक तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर वैश्विक तेल और गैस कीमतों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब होर्मुज संकट के कारण ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर अमेरिका में भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से समुद्री मार्ग के सामान्य रूप से खुला होने का दावा किए जाने के बावजूद स्वतंत्र समुद्री निगरानी से जुड़ी रिपोर्टें अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। मंगलवार को भी होर्मुज स्ट्रेट में एक बल्क कैरियर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किए जाने की सूचना सामने आई। समुद्री घटनाओं पर नजर रखने वाले ब्रिटिश निगरानी तंत्र के अनुसार,जहाज को नुकसान पहुँचा और उसके चालक दल के सदस्य भी प्रभावित हुए।
इससे पहले सोमवार को भी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने क्षेत्र में इसी तरह की घटना की जानकारी दी थी। एजेंसी ने जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा कारोबार से जुड़े पक्षों के बीच चिंता बढ़ी हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री कासिम गरीबाबादी ने इससे पहले ट्रंप के स्ट्रेट पर कब्जे के दावे को काल्पनिक भ्रम करार दिया था। उनका कहना था कि किसी समुद्री मार्ग पर केवल सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नियंत्रण हासिल नहीं किया जा सकता। ईरान की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों और सैन्य गतिविधियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने भी कहा है कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं,तब तक स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का सवाल नहीं उठता। ईरानी पक्ष लगातार यह संकेत दे रहा है कि समुद्री मार्ग से जुड़ा कोई भी समाधान बातचीत और तय शर्तों के आधार पर ही संभव होगा।
इसी बीच अमेरिका और ओमान के बीच भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव की स्थिति सामने आई है। ट्रंप ने सोमवार को ओमान को चेतावनी दी थी कि यदि वह स्ट्रेट को लेकर अमेरिका की योजनाओं के रास्ते में आता है,तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। एक अमेरिकी समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कथित तौर पर ओमान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी तक दी। उनके इस बयान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर,ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए वह ओमान के साथ एक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। ईरानी पक्ष के मुताबिक,प्रस्तावित व्यवस्था में स्ट्रेट से जहाजों के आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए जा सकते हैं। इसके तहत प्रवेश का रास्ता ईरानी हिस्से से और बाहर निकलने का रास्ता दूसरे हिस्से से रखने की बात कही जा रही है। दोनों देश अपने-अपने हिस्से के मार्गों को नियंत्रित करेंगे।
हालाँकि,इस प्रस्तावित समझौते को लेकर अभी तक ऐसी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है,जिससे यह स्पष्ट हो सके कि दोनों पक्षों के बीच अंतिम सहमति बन चुकी है या नहीं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को लेकर है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है। यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है,तो इससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है और दुनिया के कई देशों में महँगाई का दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका की ओर से स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित बताए जाने तथा समुद्री निगरानी एजेंसियों की ओर से हमलों और सावधानी की सलाह दिए जाने के बीच स्पष्ट विरोधाभास भी दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्र में वास्तविक समुद्री यातायात किस स्तर तक सामान्य होता है और अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कोई कूटनीतिक रास्ता निकलता है या नहीं।
फिलहाल, ट्रंप के “नए अमेरिकी क्षेत्र” वाले नक्शे और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के दावे ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। ईरान की ओर से इसका विरोध और क्षेत्र में जारी समुद्री घटनाएँ संकेत दे रही हैं कि संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों को ही प्रभावित नहीं करेगी,बल्कि इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा,वैश्विक समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
