17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ का उद्घाटन(तस्वीर क्रेडिट@STnews1945)

17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ का उद्घाटन, 40 से अधिक देशों की कंपनियाँ होंगी शामिल

नई दिल्ली,19 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। तीन दिन तक चलने वाला यह कार्यक्रम 17 से 19 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस आयोजन से भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति मिलेगी और वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में देश की भूमिका और मजबूत होगी। इस बार सम्मेलन की थीम ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखी गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ का आयोजन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और वैश्विक उद्योग संगठन सेमी के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन और प्रदर्शनी में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े वैश्विक और भारतीय हितधारकों के एक बड़े समूह के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें नीति निर्माता,वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रतिनिधि,उद्योग जगत के अधिकारी,शोधकर्ता,शिक्षाविद,स्टार्ट-अप,निवेशक और विद्यार्थी एक मंच पर जुटेंगे।

इस आयोजन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला में हो रहे बदलावों, नई तकनीकों और भारत में इस क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर चर्चा करना है। सेमीकंडक्टर आज आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र का आधार बन चुके हैं। मोबाइल फोन,कंप्यूटर,वाहन,रक्षा उपकरण,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,दूरसंचार,अंतरिक्ष तकनीक और औद्योगिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों में चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में भारत सरकार देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने के लिए लगातार निवेश और नीतिगत समर्थन बढ़ा रही है।

सरकार ने हाल ही में देश की सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है। इसे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अगले चरण की महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है,बल्कि डिजाइन,अनुसंधान,विनिर्माण,पैकेजिंग,परीक्षण और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना है।

मंत्रालय के अनुसार,भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान और डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार 332 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्ट-अप्स को उन्नत डिजाइन उपकरण उपलब्ध करा रही है। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नई कंपनियों को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन तकनीक पर काम करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त,डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत 24 स्टार्ट-अप्स को मंजूरी दी जा चुकी है।

सरकार के अनुसार, ‘सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम’ के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में तेजी आई है। घरेलू सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए ‘सेमीकॉन 1.0’ के तहत 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में से तीन में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं से देश में चिप निर्माण और इससे जुड़े उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वर्ष 2026 का संस्करण भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर आयोजित हो रहा है। उन्होंने बताया कि ‘सेमीकॉन 1.0’ के तहत स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से तीन ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। उनके मुताबिक,छह प्रमुख स्तंभों के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ की घोषणा भारत के मजबूत और टिकाऊ सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करती है।

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी को देखते हुए इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले बड़े स्तर पर होने की उम्मीद है। प्रदर्शनी में 500 से अधिक प्रदर्शकों के शामिल होने की संभावना है। इनमें 240 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ होंगी। इसके अलावा 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इससे भारत को वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के सामने अपनी तकनीकी क्षमताओं, नीतिगत ढाँचे और निवेश अवसरों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

आयोजन में छह देशों के विशेष पवेलियन और 10 राज्य सरकारों के पवेलियन भी बनाए जाएँगे। इनके जरिए अलग-अलग देशों और राज्यों की सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़ी क्षमताओं और निवेश अवसरों को सामने रखा जाएगा। इसके अलावा स्टार्ट-अप पवेलियन,इनोवेशन शोकेस और स्टार्ट-अप पिच प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इससे नई कंपनियों और निवेशकों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

विद्यार्थियों को भी इस आयोजन से जोड़ने के लिए स्टूडेंट हैकाथॉन का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से युवा प्रतिभाओं को सेमीकंडक्टर,इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित तकनीकी क्षेत्रों में अपने विचार तथा समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा,जहाँ भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने से जुड़े विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।

वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की भूमिका को लेकर सेमी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत मनोचा ने कहा कि भारत अपने प्रतिभाशाली मानव संसाधन, नीतिगत समर्थन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के कारण वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी भूमिका बढ़ाने की अच्छी स्थिति में है। भारत के पास बड़ी युवा आबादी और तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन है,जो सेमीकंडक्टर डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सेमी इंडिया और आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंडक ने कहा कि यह आयोजन भारत की व्यापक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करने की कोशिशों को दर्शाता है। उनके अनुसार,यह मंच उद्योग जगत के नेताओं,नीति निर्माताओं,निवेशकों और शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी परियोजनाओं के लिए तकनीकी विशेषज्ञता,निवेश और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की जरूरत होती है,इसलिए विभिन्न पक्षों के बीच सहयोग को इस क्षेत्र के विकास के लिए अहम माना जा रहा है।

भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और देश में उत्पादन क्षमता विकसित करना है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर चिप की कमी ने सेमीकंडक्टर की रणनीतिक महत्ता को स्पष्ट किया था। इसके बाद कई देशों ने घरेलू चिप विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश और प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू कीं। भारत भी इसी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ इस दृष्टि से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। सम्मेलन में न केवल मौजूदा परियोजनाओं और नीतियों की जानकारी साझा की जाएगी, बल्कि भविष्य में निवेश,अनुसंधान,डिजाइन और उत्पादन के नए अवसरों पर भी चर्चा होगी। वैश्विक कंपनियों की भागीदारी से भारतीय कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी के नए अवसर मिलने की संभावना है।

सरकार का जोर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक ऐसा व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर है,जिसमें डिजाइन से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया में भारत की भागीदारी बढ़े। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों,विश्वविद्यालयों,स्टार्ट-अप्स,उद्योगों और सरकार के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 सितंबर से शुरू होने वाला यह आयोजन इसी व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मंच बनेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन के साथ शुरू होने वाला ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। 500 से अधिक प्रदर्शकों, 240 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों और 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी इस आयोजन के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय महत्व को दर्शाती है। अब सरकार और उद्योग की नजर इस बात पर होगी कि सम्मेलन से कितने नए निवेश,तकनीकी सहयोग और साझेदारी के अवसर सामने आते हैं और भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र किस गति से आगे बढ़ता है।